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Kushinagar News: जिले के बैंकों ने 60 हजार से अधिक खाताधारकों की रद्द की केवाईसी

Sun, 20 Aug 2023 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 20 Aug 2023 12:22 AM IST
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kyc canceled of fifty thousand customers
फोटो है।
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ग्राहक अंगूठा लगाकर नहीं निकाल पा रहे रुपये, नाम, पता, पिता का नाम आदि मिसमैच होने पर रद्द की गई है केवाईसी

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के बड़े सरकारी बैंकों में शुमार पंजाब नेशनल बैंक, एसबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बड़ौदा यूपी बैंक समेत अन्य बैंकों के ग्राहक इन दिनों खासे परेशान हैं। इन बैंकों ने बड़ी संख्या में ग्राहकों की केवाईसी निरस्त कर दी है। केवाईसी निरस्त होने का मुख्य कारण पासबुक और आधार डाटा एक-दूसरे से मैच नहीं करना बताया जा रहा है। बैंकों के अनुसार 60 हजार से अधिक ग्राहकों की केवाईसी रद्द की गई है।
कुशीनगर जिले में सबसे अधिक बड़ौदा यूपी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एसबीआई की शाखाएं संचालित होती हैं। इसके अलावा इंडियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, बड़ौदा यूपी बैंक, आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया समेत अन्य बैंकों की शाखाएं संचालित होती हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में बैंकों ने अपने ग्राहकों को मोबाइल पर संदेश भेजकर 31 अगस्त तक अनिवार्य रूप से केवाईसी कराने के लिए कहा था।
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मोबाइल पर मिले संदेश को पढ़कर वे परेशान हो गए। वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि केवाईसी कराने के बाद भी उन्हें आखिर यह संदेश क्यों भेजा जा रहा है। ग्राहकों ने बैंक की संबंधित शाखाओं से संपर्क करना शुरू किया तो उन्हें बताया गया कि बैंक पासबुक और आधार में दर्ज उनका नाम, पता आदि विवरण के शब्दों और अक्षरों में भिन्नता है। इससे उनकी केवाईसी रद्द कर दी गई है।
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ग्राहक इसे ठीक कराने के लिए अपनी बैंक शाखा में आधार व पैनकार्ड की फोटो कॉपी लगाकर फार्म भर रहे हैं। इससे सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग खाताधारकों को हो रही है।


यह है केवाईसी
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य किया है कि वे उन सभी ग्राहकों की पहचान और पते को सत्यापित करें, जो उनके साथ वित्तीय ट्रांजेक्शन करते हैं। केवाईसी (नो योर कस्टमर) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से बैंक या वित्तीय संस्थान किसी व्यक्ति की पहचान और पते की पुष्टि करते हैं। किसी ग्राहक को म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉज़िट, बैंक अकाउंट आदि में निवेश शुरू करने से पहले अपना केवाईसी जमा करनी होती है।
आरबीआई वर्ष 2002 में केवाईसी को अस्तित्व में लाया। वर्ष 2004 में सभी बैंकों के लिए दिसंबर 2005 तक ग्राहकों का केवाईसी करना अनिवार्य कर दिया गया। केवाईसी करवाने के बाद बैंक को आपकी पहचान, पता और वित्तीय इतिहास के बारे में जानकारी मिल जाती है। केवाईसी दो तरह की होती है। आधार आधारित केवाईसी और इन-पर्सन-वेरिफिकेशन आधारित केवाईसी। आधार आधारित केवाईसी वाले ग्राहकों को केवल हर वित्त वर्ष में 50,000 रुपये निवेश करने की अनुमति है। यदि ग्राहक हर साल एक विशिष्ट फंड में अधिक निवेश करना चाहता है तो उसे इन-पर्सन-वेरिफिकेशन करवाना होगा। इसके लिए ग्राहक आवेदन के साथ पहचान प्रमाण और पता प्रमाण पत्र संबंधित बैंक में जमा कर केवाईसी करा सकते हैं।



यह है ई-केवाईसी
सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निजी संस्थाओं को सत्यापन के लिए आधार ई-केवाईसी का उपयोग करने से रोककर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। इसके बाद, यूआईडीएआई ने निजी प्रतिष्ठानों को प्रमाणीकरण उद्देश्यों के लिए आधार ई-केवाईसी की अनुमति दी। आधार और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने ऑनलाइन केवाईसी सत्यापन का मार्ग प्रशस्त किया, जिसमें व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी पहचान सत्यापित करने के लिए आधार संख्या का उपयोग करते हैं। यह प्रक्रिया ग्राहकों को आधार डेटा का दुरुपयोग होने से बचाती है।


केवाईसी नहीं होने से ग्राहकों को हो रही हैं कई दिक्कतें
बैंकों की तरफ से केवाईसी रद्द करने के बाद ग्राहकों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जब तक केवाईसी पूरी थी, तब तक वह किसी भी ग्राहक सेवा केंद्र पर अंगूठा लगाकर रुपये निकाल लेते थे। जब से केवाईसी रद्द हुई है तब से यह सुविधा बंद हो गई है। अब ग्राहकों को रुपये निकालने के लिए बैंकों में जाना पड़ रहा है। इसके अलावा केवाईसी रद्द होने से लोगों को शासन की योजनाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। उन्हें पीएम सम्मान निधि, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन समेत अन्य सरकारी लाभ नहीं मिल पा रहा है।



इन खातों की रद्द हुई है केवाईसी
बैंक ने उन खातों की केवाईसी रद्द की है जो बिना आधार के खोले गए थे। इसके बाद आधार की फोटो कॉपी लगाकर खाते को उससे लिंक कराया गया था। बैंक अफसरों का कहना है कि आधार से लिंक कराए गए खातों में ग्राहक का नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि व पते में भिन्नता मिली है। इसकी वजह से केवाईसी रद्द की गई है।


केवाईसी के पहले ठीक कराना पड़ेगा अभिलेख

ग्राहकों को केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने से पहले खुद के अभिलेख में दर्ज नाम, पता आदि को दुरुस्त कराना पड़ेगा। यदि किसी ग्राहक के आधार पर दर्ज नाम, पिता का नाम, पता आदि सही है तो उसे बैंक के समक्ष इस आशय से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना होगा कि आधार में उसका डाटा सही है। ऐसे में आधार को सही मानकर बैंक पासबुक में दर्ज विवरण को ठीक किया जाए। इसके बाद बैंक इसे ठीक करेगा। अन्यथा यदि आधार में दर्ज विवरण गलत है तो पहले आधार को ठीक कराना पड़ेगा। इसके बाद बैंक में केवाईसी के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करें।


खाताधारक बोेले

रुपये निकालने के लिए पकड़ियार बाजार स्थित एक ग्राहक सेवा केंद्र गया था। केंद्र संचालक ने बताया कि खाते से लिंक आधार को रद्द कर दिया गया है। इसलिए रुपये नहीं निकलेंगे। बैंक जाकर पासबुक, आधार और पैनकार्ड की छाया प्रति जमा करनी पड़ेगी। इसके बाद बैंक आधार से लिंक कर केवाईसी करेगा, तब जाकर रुपये निकालने की सुविधा मिलेगी।

-सुरेश कुशवाहा, सौरहा खुर्द



बैंक घर से दूर है। बेटों के भेजे गए रुपये निकालने के लिए गांव में संचालित ग्राहक सेवा केंद्र की मदद लेते हैं। बीते 16 अगस्त को रुपये निकालने एक ग्राहक सेवा केंद्र पर पहुंचे तो संचालक ने बताया कि खाता से लिंक आधार रद्द कर दिया गया है। इसके बारे में बैंक के अधिकारियों से जानकारी ली तो पता चला कि पासबुक पर दर्ज नाम और आधार पर दर्ज नाम में भिन्नता है। पासबुक में दर्ज नाम ही सही है। बैंक के अधिकारी आधार को सही कराकर बैंक बुलाए हैं।

- सुरेश यादव, पकड़ियार बाजार


अफसर बोले

जिन ग्राहकों के खाते बंद हैं, उन्हें केवाईसी करानी पड़ेगी। क्योंकि इन ग्राहकों के बैंक पासबुक और आधार में दर्ज विवरण में कई भिन्नताएं पाई गई हैं। 31 अगस्त तक यह प्रक्रिया सभी शाखाओं को अनिवार्य रूप से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।



- सुनील त्यागी, एलडीएम


सभी बचत खाताधारकों को पहली बार केवाईसी होने की तिथि अथवा खाता संचालन शुरू होने की तिथि के प्रत्येक दस वर्ष में दोबारा केवाईसी करानी पड़ती है। इसके लिए बैंक की तरफ से खाता धारकों के मोबाइल पर संदेश भेजकर उन्हें बैंक में बुलाया जाता है। बैंक में जो भी ग्राहक केवाईसी के लिए आ रहे हैं, उनकी समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

-अनुपम प्रधान, शाखा प्रबंधक, पीएनबी मुख्य शाखा, पडरौना
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