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Kushinagar News: रियल टाइम खतौनी में सुधार के लिए अब एसडीएम कोर्ट का चक्कर, किसान परेशान
Sun, 22 Sep 2024 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 22 Sep 2024 12:54 AM IST
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पडरौना। रीयल टाइम खतौनी में हुई गड़बड़ी में सुधार के लिए लोगों को अब एसडीएम कोर्ट में धारा 34 का मुकदमा करना पड़ रहा है। पहले रियल टाइम खतौनी में आई गड़बड़ियों को ठीक कराने के लिए लोग अधिकारियों के पास पहुंचकर उनका चक्कर लगाते थे, तो सर्वर में गड़बड़ी बताकर उन्हें लौटा दिए जा रहे थे। अब खतौनी में सुधार के लिए एसडीएम कोर्ट में मुकदमा करना पड़ रहा है। इसको लेकर किसान परेशान हैं।
रीयल टाइम खतौनी में हुई गड़बड़ी के बाद लोगों को जमीन के बैनामे के बाद खारिज दाखिल कराने में परेशानी हो रही है। क्योंकि इस त्रुटि की वजह से बिक्री के बाद वारिस का नाम नहीं चढ़ रहा है। उसे दुरुस्त कराने के लिए लोग तहसील में दौड़ रहे हैं। रीयल टाइम खतौनी में हुई त्रुटि का मामला करीब-करीब सभी गांव में है, लेकिन यदि तहसीलों तक पहुंची शिकायत की बात करें तो धारा 32/38 के तहत खतौनी में त्रुटि को सही कराने के लिए पडरौना तहसील में दो सौ से अधिक मामले लंबित हैं।
कप्तागंज में सात, हाटा तहसील में पांच, कसया तहसील में दो हजार से अधिक और तमकुहीराज तहसील में सात सौ से अधिक मामले लंबित हैं, जिन्हें निस्तारण के लिए अधिकारी कार्रवाई में जुटे हैं। इसमें से बहुत सारे ऐसे भी मामले हैं, जिनमें लेखपाल से लेकर तहसीलदार ने रिपोर्ट लगा दी है, लेकिन एसडीएम कोर्ट से आदेश जारी नहीं हुआ।
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कसया तहसील में रामबर के प्रहलाद ने करीब एक वर्ष पहले खतौनी को ठीक करने के लिए आवेदन किया। परसौना के गणेश कुमार की खतौनी में त्रुटिवश जमीन विक्रेता के वारिसों का नाम दर्ज हो गया। आवेदन में नाम हटाने के लिए अनुरोध किया। जिस पर लेखपाल व तहसीलदार ने रिपोर्ट भी लगा दी, लेकिन अभी तक कोई आदेश नहीं हुआ। ऐसे ही बहुत सारे मामले अटके पड़े हैं, जिसे लेकर लोग परेशान हैं।
तहसील दिवस में आने वाले फरियादी भी जमीन के बैनामे की खारिज दाखिल, अंश निर्धारण और वरासत में खतौनी में नामों में हुई त्रुटि का सुधार कराने की शिकायत कर रहे हैं। उन्हें लेखपाल और कानूनगो समेत अन्य कर्मचारी एसडीएम कोर्ट में 32/38 वाद दाखिल करने की सलाह दे रहे हैं। तमकुहीराज तहसील में शिकायत लेकर पहुंचे धनौजी खास के सदीक ने बताया की अंश निर्धारण को लेकर लेखपाल और कानूनगो का रिपोर्ट दो वर्ष पूर्व दिया गया है। लेकिन अभी तक अंश निर्धारण नहीं हुआ है। इसको लेकर कई बार तहसील का चक्कर लगा रहा हूं।
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केस नंबर एक-
हाटा तहसील के विशुनपुरा निवासी नरेंद्र प्रताप सिंह के खाते के कई खातेदार हैं। खातेदारों का नाम खतौनी में दर्ज होने से छूट गया है। अब वे उसको सही कराने के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दर्ज कराए हैं।
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केस नंबर दो-
ग्राम सभा पटनी निवासी रामप्यारी ने भी खतौनी में खातेदारों का नाम छूटने की शिकायत पर उप जिलाधिकारी न्यायालय में वाद पंजीकृत कराए हैं। लेकिन दो वर्ष से केवल तारीख पर तारीख लग रही है।
बातचीत
भू-अभिलेख में 40 डिसमिल जमीन दर्ज है। नए बनाए जा रहे हाईवे के लिए कुछ अंश आरक्षित किया गया है। जारी गजट में मेरा नाम भी है। इसके बावजूद राजस्व टीम मेरा नाम सूची में शामिल नहीं कर रहीं है। इसके लिए एडीएम के पास शिकायत दर्ज कराया हूं।
-मोतिचंद निषाद, निवासी, गाजीपुर।
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हमारे नाम से नौ डिसमिल जमीन दर्ज है, जिसे जोतते-बोते रहे हैं। बनाए जा रहे हाईवे के लिए जारी गजट में हमारा नाम भू- स्वामी के रूप में दर्ज था। अब राजस्व टीम झरही नहर का जमीन बता रही है। इससे उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। इसके लिए एसडीएम कोर्ट में वााद दाखिल करने की सलाह दी जा रही है।
-चंद्रदेव प्रसाद कुशवाहा, निवासी, गाजीपुर।
कोट
रीयल टाइम खतौनी में गड़बड़ी होने से खातेदारों की हिस्सेदारी प्रभावित होगी। जिस खातेदारों को अधिक अंश मिल जाएगा, वह अपने हिस्से से अधिक भूमि का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा कब्जेदारी को लेकर भी विवाद उत्पन्न होगा।
-मृत्युंजय कुमार सिंह, महामंत्री कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन, कुशीनगर।
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रीयल टाइम खतौनी में हुई गड़बड़ी के बाद लोगों को जमीन के बैनामे के बाद खारिज दाखिल कराने में परेशानी हो रही है। क्योंकि इस त्रुटि की वजह से बिक्री के बाद वारिस का नाम नहीं चढ़ रहा है। उसे दुरुस्त कराने के लिए लोग तहसील में दौड़ रहे हैं। रीयल टाइम खतौनी में हुई त्रुटि का मामला करीब-करीब सभी गांव में है, लेकिन यदि तहसीलों तक पहुंची शिकायत की बात करें तो धारा 32/38 के तहत खतौनी में त्रुटि को सही कराने के लिए पडरौना तहसील में दो सौ से अधिक मामले लंबित हैं।
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कप्तागंज में सात, हाटा तहसील में पांच, कसया तहसील में दो हजार से अधिक और तमकुहीराज तहसील में सात सौ से अधिक मामले लंबित हैं, जिन्हें निस्तारण के लिए अधिकारी कार्रवाई में जुटे हैं। इसमें से बहुत सारे ऐसे भी मामले हैं, जिनमें लेखपाल से लेकर तहसीलदार ने रिपोर्ट लगा दी है, लेकिन एसडीएम कोर्ट से आदेश जारी नहीं हुआ।
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कसया तहसील में रामबर के प्रहलाद ने करीब एक वर्ष पहले खतौनी को ठीक करने के लिए आवेदन किया। परसौना के गणेश कुमार की खतौनी में त्रुटिवश जमीन विक्रेता के वारिसों का नाम दर्ज हो गया। आवेदन में नाम हटाने के लिए अनुरोध किया। जिस पर लेखपाल व तहसीलदार ने रिपोर्ट भी लगा दी, लेकिन अभी तक कोई आदेश नहीं हुआ। ऐसे ही बहुत सारे मामले अटके पड़े हैं, जिसे लेकर लोग परेशान हैं।
तहसील दिवस में आने वाले फरियादी भी जमीन के बैनामे की खारिज दाखिल, अंश निर्धारण और वरासत में खतौनी में नामों में हुई त्रुटि का सुधार कराने की शिकायत कर रहे हैं। उन्हें लेखपाल और कानूनगो समेत अन्य कर्मचारी एसडीएम कोर्ट में 32/38 वाद दाखिल करने की सलाह दे रहे हैं। तमकुहीराज तहसील में शिकायत लेकर पहुंचे धनौजी खास के सदीक ने बताया की अंश निर्धारण को लेकर लेखपाल और कानूनगो का रिपोर्ट दो वर्ष पूर्व दिया गया है। लेकिन अभी तक अंश निर्धारण नहीं हुआ है। इसको लेकर कई बार तहसील का चक्कर लगा रहा हूं।
केस नंबर एक-
हाटा तहसील के विशुनपुरा निवासी नरेंद्र प्रताप सिंह के खाते के कई खातेदार हैं। खातेदारों का नाम खतौनी में दर्ज होने से छूट गया है। अब वे उसको सही कराने के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दर्ज कराए हैं।
केस नंबर दो-
ग्राम सभा पटनी निवासी रामप्यारी ने भी खतौनी में खातेदारों का नाम छूटने की शिकायत पर उप जिलाधिकारी न्यायालय में वाद पंजीकृत कराए हैं। लेकिन दो वर्ष से केवल तारीख पर तारीख लग रही है।
बातचीत
भू-अभिलेख में 40 डिसमिल जमीन दर्ज है। नए बनाए जा रहे हाईवे के लिए कुछ अंश आरक्षित किया गया है। जारी गजट में मेरा नाम भी है। इसके बावजूद राजस्व टीम मेरा नाम सूची में शामिल नहीं कर रहीं है। इसके लिए एडीएम के पास शिकायत दर्ज कराया हूं।
-मोतिचंद निषाद, निवासी, गाजीपुर।
हमारे नाम से नौ डिसमिल जमीन दर्ज है, जिसे जोतते-बोते रहे हैं। बनाए जा रहे हाईवे के लिए जारी गजट में हमारा नाम भू- स्वामी के रूप में दर्ज था। अब राजस्व टीम झरही नहर का जमीन बता रही है। इससे उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। इसके लिए एसडीएम कोर्ट में वााद दाखिल करने की सलाह दी जा रही है।
-चंद्रदेव प्रसाद कुशवाहा, निवासी, गाजीपुर।
कोट
रीयल टाइम खतौनी में गड़बड़ी होने से खातेदारों की हिस्सेदारी प्रभावित होगी। जिस खातेदारों को अधिक अंश मिल जाएगा, वह अपने हिस्से से अधिक भूमि का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा कब्जेदारी को लेकर भी विवाद उत्पन्न होगा।
-मृत्युंजय कुमार सिंह, महामंत्री कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन, कुशीनगर।