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कालाजार के 60, जेई-एईएस के मामले में 54 गांव संवेदनशील
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कालाजार के 60, जेई-एईएस के मामले में 54 गांव संवेदनशील
- विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह और दस्तक पखवाड़ा में सतर्कता बरतने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कुशीनगर जिले के 1,14 गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष नजर रहेगी। इनमें 60 कालाजार तो 54 गांव जेई-एईएस के मामलों को लेकर संवेदनशील हैं। इन गांवों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ रोगों से बचाव के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चिह्नित किए गए गांव कालाजार और जेई-एईएस के मामले में उच्च जोखिम वाले हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगा दी गई हैं।
इन गांवों में विशेष तौर पर झाड़ियों और नालियों की साफ-सफाई, फागिंग, एंटी लार्वा का छिड़काव, टीकाकरण, क्लोरिनेशन, सुअरबाड़े वाले गांवों में संवेदीकरण, उथले हैंड पंप पर लाल निशान लगाना, इंडिया मार्का हैंडपंप पानी पीने के लिए प्रेरित करना, शौचालय का प्रयोग करने तथा घर के आसपास गंदगी या जलभराव न होने देने के लिए जन समुदाय को जागरूक किया जा रहा है।
कालाजार के मामले में उच्च जोखिम वाले गांवों में दवा का छिड़काव कराया जा रहा है, तथा बीमारी से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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उच्च जोखिम वाले गांव का मानक
मलेरिया निरीक्षक विजय गिरी ने ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जिस गांव में जापानी इंसेफलाटिस ( जेई) या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम ( एईएस) के केस मिले हैं,अथवा जेई- एईएस से किसी की मृत्यु हुई है तो उस गांव को उच्च जोखिम गांव की श्रेणी में रखा जाता है। इसी प्रकार जिन गांवों में तीन साल के अंदर कोई कालाजार या चमड़ी कालाजार के केस मिले हैं, उन गांवों के सभी घरों में दवा का छिड़काव कराया जाता है।
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एसीएमओ ने बताया कि आगामी 21 अक्टूबर तक चलने वाले दस्तक पखवाड़े में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार के रोगियों के साथ साथ मलेरिया, चिकनगुनिया या डेंगू तथा क्षय रोग लक्षण वाले व्यक्तियों को चिह्नित कर जांच व उपचार के लिए अस्पताल भेजवाएंगी। कुपोषित बच्चों को भी चिह्नित किया जा रहा है। ग्राम सभा की बैठक मातृ समिति की बैठक तथा छाया वीएचएसएनडी सत्र आयोजित कर जन समुदाय को जागरूक किया जा रहा है।
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- विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह और दस्तक पखवाड़ा में सतर्कता बरतने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कुशीनगर जिले के 1,14 गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष नजर रहेगी। इनमें 60 कालाजार तो 54 गांव जेई-एईएस के मामलों को लेकर संवेदनशील हैं। इन गांवों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ रोगों से बचाव के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चिह्नित किए गए गांव कालाजार और जेई-एईएस के मामले में उच्च जोखिम वाले हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगा दी गई हैं।
इन गांवों में विशेष तौर पर झाड़ियों और नालियों की साफ-सफाई, फागिंग, एंटी लार्वा का छिड़काव, टीकाकरण, क्लोरिनेशन, सुअरबाड़े वाले गांवों में संवेदीकरण, उथले हैंड पंप पर लाल निशान लगाना, इंडिया मार्का हैंडपंप पानी पीने के लिए प्रेरित करना, शौचालय का प्रयोग करने तथा घर के आसपास गंदगी या जलभराव न होने देने के लिए जन समुदाय को जागरूक किया जा रहा है।
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कालाजार के मामले में उच्च जोखिम वाले गांवों में दवा का छिड़काव कराया जा रहा है, तथा बीमारी से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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उच्च जोखिम वाले गांव का मानक
मलेरिया निरीक्षक विजय गिरी ने ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जिस गांव में जापानी इंसेफलाटिस ( जेई) या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम ( एईएस) के केस मिले हैं,अथवा जेई- एईएस से किसी की मृत्यु हुई है तो उस गांव को उच्च जोखिम गांव की श्रेणी में रखा जाता है। इसी प्रकार जिन गांवों में तीन साल के अंदर कोई कालाजार या चमड़ी कालाजार के केस मिले हैं, उन गांवों के सभी घरों में दवा का छिड़काव कराया जाता है।
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एसीएमओ ने बताया कि आगामी 21 अक्टूबर तक चलने वाले दस्तक पखवाड़े में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार के रोगियों के साथ साथ मलेरिया, चिकनगुनिया या डेंगू तथा क्षय रोग लक्षण वाले व्यक्तियों को चिह्नित कर जांच व उपचार के लिए अस्पताल भेजवाएंगी। कुपोषित बच्चों को भी चिह्नित किया जा रहा है। ग्राम सभा की बैठक मातृ समिति की बैठक तथा छाया वीएचएसएनडी सत्र आयोजित कर जन समुदाय को जागरूक किया जा रहा है।