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एक माह में भी दूर नहीं हुई महिला डॉक्टर की समस्या
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जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक के कक्ष के बाहर खड़े होकर डॉक्टर का इंतजार करती मरीज।संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
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जिला अस्पताल में एक भी महिला डॉक्टर नहीं
जिला संयुक्त अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के सामान्य प्रसव से लेकर ऑपरेशन तक में आ रही समस्या
डॉ. रीता बर्नवाल 31 मार्च को हो गईं सेवानिवृत्ति, दूसरी महिला डॉक्टर हैं मातृत्व अवकाश पर
कुशीनगर। जिला संयुक्त अस्पताल की महिला परामर्शदाता की सेवानिवृत्ति के एक माह बाद भी किसी स्थायी महिला डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। संविदा पर तैनात एक अन्य महिला सर्जन मातृत्व अवकाश पर हैं। महिला डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सीएमओ ने चार महिला डॉक्टरों को जिला अस्पताल से संबद्ध किया है, लेकिन इनमें से केवल एक डॉक्टर ने ही कार्यभार संभाला है। ऐसे में दूरदराज से आने वाली महिला मरीजों को सीएचसी कसया अथवा गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ रहा है।
जनपद के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सीएचसी पर समुचित इलाज नहीं मिल पाने पर मरीज जिला अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां भी समस्या कम नहीं है। जिला संयुक्त अस्पताल चिकित्सकीय स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। सबसे बड़ी समस्या महिला डॉक्टर की कमी की है। जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के तौर पर स्थायी रूप से महिला परामर्शदाता डॉ. रीता बर्नवाल तैनात थीं। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गईं। दूसरी महिला सर्जन डॉ. स्वाति जायसवाल हैं, जो पिछले साल संविदा पर नियुक्त की गई हैं। डॉ. स्वाति के आने से जिला अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था हो गई थी। लेकिन वह करीब छह माह से मातृत्व अवकाश पर हैं। उनका अवकाश 20 जून को समाप्त होगा। महिला सर्जन डॉक्टर नहीं होने की वजह से गंभीर हालत वाली महिलाओं को कसया सीएचसी अथवा मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर करना पड़ रहा है।
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चार सीएचसी पर है ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि कसया सीएचसी की एमओआईसी डॉ. नीलकमल सर्जन हैं। लिहाजा, कसया सीएचसी में ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा है। जिनका सामान्य प्रसव नहीं हो पाता, उन्हें जिला अस्पताल से कसया सीएचसी भेजना पड़ता है। इसके अलावा सुकरौली क्षेत्र की देवतहां स्थित सीएचसी, फाजिलनगर और तमकुहीराज सीएचसी में भी ऑपरेशन की व्यवस्था शुरू की गई है।
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इन महिला डॉक्टरों को किया गया है संबद्ध
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौली चाफ की महिला चिकित्सक डॉ. नेहा खरे को सोमवार और बुधवार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलकुड़िया की महिला चिकित्सक डॉ. रश्मि सिंह को मंगलवार व शुक्रवार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परसौनी की महिला चिकित्सक डॉ. प्रमिला को बृहस्पतिवार और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोट्ठा की महिला चिकित्सक डॉ. अनीता जायसवाल को शनिवार को जिला संयुक्त अस्पताल से संबद्ध किया गया है, ताकि महिला मरीजों को इलाज संबंधी परेशानी न हो।
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एमसीएच विंग में भी नहीं हैं कोई डॉक्टर
महिलाओं और बच्चों के बेहतर इलाज के लिए 19.20 करोड़ रुपये खर्च कर जिला संयुक्त अस्पताल परिसर में 100 बेड का एमसीएच (मैटर्निटी एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग का निर्माण किया गया है। वर्ष 2019 में तीन गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. नदीम वारसी, डॉ. विनीशा श्री और डॉ. निलांशा राय की नियुक्ति हुई थी, लेकिन तीनों एक साल के भीतर त्यागपत्र देकर चले गए। तब से यहां किसी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। अब यह अस्पताल कोविड टीकाकरण एवं सैंपलिंग के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
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कोट
जिला अस्पताल में एक महीने से कोई स्थायी महिला डॉक्टर नहीं है। संविदा पर एक सर्जन डॉ. स्वाति जायसवाल तैनात हैं, लेकिन वह मातृत्व अवकाश पर हैं। इससे महिला मरीजों की गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन सहित प्रसव तक में असुविधा हो रही है। ऐसे मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला संयुक्त अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के सामान्य प्रसव से लेकर ऑपरेशन तक में आ रही समस्या
डॉ. रीता बर्नवाल 31 मार्च को हो गईं सेवानिवृत्ति, दूसरी महिला डॉक्टर हैं मातृत्व अवकाश पर
कुशीनगर। जिला संयुक्त अस्पताल की महिला परामर्शदाता की सेवानिवृत्ति के एक माह बाद भी किसी स्थायी महिला डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। संविदा पर तैनात एक अन्य महिला सर्जन मातृत्व अवकाश पर हैं। महिला डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सीएमओ ने चार महिला डॉक्टरों को जिला अस्पताल से संबद्ध किया है, लेकिन इनमें से केवल एक डॉक्टर ने ही कार्यभार संभाला है। ऐसे में दूरदराज से आने वाली महिला मरीजों को सीएचसी कसया अथवा गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ रहा है।
जनपद के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सीएचसी पर समुचित इलाज नहीं मिल पाने पर मरीज जिला अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां भी समस्या कम नहीं है। जिला संयुक्त अस्पताल चिकित्सकीय स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। सबसे बड़ी समस्या महिला डॉक्टर की कमी की है। जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के तौर पर स्थायी रूप से महिला परामर्शदाता डॉ. रीता बर्नवाल तैनात थीं। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गईं। दूसरी महिला सर्जन डॉ. स्वाति जायसवाल हैं, जो पिछले साल संविदा पर नियुक्त की गई हैं। डॉ. स्वाति के आने से जिला अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था हो गई थी। लेकिन वह करीब छह माह से मातृत्व अवकाश पर हैं। उनका अवकाश 20 जून को समाप्त होगा। महिला सर्जन डॉक्टर नहीं होने की वजह से गंभीर हालत वाली महिलाओं को कसया सीएचसी अथवा मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर करना पड़ रहा है।
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चार सीएचसी पर है ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि कसया सीएचसी की एमओआईसी डॉ. नीलकमल सर्जन हैं। लिहाजा, कसया सीएचसी में ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा है। जिनका सामान्य प्रसव नहीं हो पाता, उन्हें जिला अस्पताल से कसया सीएचसी भेजना पड़ता है। इसके अलावा सुकरौली क्षेत्र की देवतहां स्थित सीएचसी, फाजिलनगर और तमकुहीराज सीएचसी में भी ऑपरेशन की व्यवस्था शुरू की गई है।
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इन महिला डॉक्टरों को किया गया है संबद्ध
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौली चाफ की महिला चिकित्सक डॉ. नेहा खरे को सोमवार और बुधवार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलकुड़िया की महिला चिकित्सक डॉ. रश्मि सिंह को मंगलवार व शुक्रवार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परसौनी की महिला चिकित्सक डॉ. प्रमिला को बृहस्पतिवार और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोट्ठा की महिला चिकित्सक डॉ. अनीता जायसवाल को शनिवार को जिला संयुक्त अस्पताल से संबद्ध किया गया है, ताकि महिला मरीजों को इलाज संबंधी परेशानी न हो।
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एमसीएच विंग में भी नहीं हैं कोई डॉक्टर
महिलाओं और बच्चों के बेहतर इलाज के लिए 19.20 करोड़ रुपये खर्च कर जिला संयुक्त अस्पताल परिसर में 100 बेड का एमसीएच (मैटर्निटी एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग का निर्माण किया गया है। वर्ष 2019 में तीन गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. नदीम वारसी, डॉ. विनीशा श्री और डॉ. निलांशा राय की नियुक्ति हुई थी, लेकिन तीनों एक साल के भीतर त्यागपत्र देकर चले गए। तब से यहां किसी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। अब यह अस्पताल कोविड टीकाकरण एवं सैंपलिंग के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
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कोट
जिला अस्पताल में एक महीने से कोई स्थायी महिला डॉक्टर नहीं है। संविदा पर एक सर्जन डॉ. स्वाति जायसवाल तैनात हैं, लेकिन वह मातृत्व अवकाश पर हैं। इससे महिला मरीजों की गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन सहित प्रसव तक में असुविधा हो रही है। ऐसे मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल