{"_id":"65f9e6e34382894996021894","slug":"jagadguru-shankaracharya-is-the-pinnacle-of-sanatan-culture-dr-pride-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-114366-2024-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"सनातन संस्कृति के शिखर पुरुष हैं जगद्गुरु शंकराचार्य : डाॅ. गौरव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सनातन संस्कृति के शिखर पुरुष हैं जगद्गुरु शंकराचार्य : डाॅ. गौरव
Wed, 20 Mar 2024 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 20 Mar 2024 12:56 AM IST
विज्ञापन
पकवा इनार। बुद्ध पीजी कॉलेज परिसर में जगद्गुरु शंकराचार्य एवं भारत की एकात्मता विषय पर बुधवार की सुबह 11 बजे से भंते सभागार में व्याख्यानमाला होगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।
हिंदी विभाग के सह आचार्य व व्याख्यानमाला के संयोजक डाॅ. गौरव तिवारी ने मंगलवार को बताया कि व्याख्यानमाला भारतीय भाषा समिति की तरफ से प्रायोजित है। मुख्य वक्ता उत्तर भारत दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर सभापति मिश्र होंगे। विशिष्ट वक्ता गोविवि में दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर द्वारिका नाथ होंगे। विषय प्रवर्तन काॅलेज के दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र प्रताप मिश्र करेंगे। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु शंकराचार्य सनातन संस्कृति एवं भारतवर्ष के शिखर पुरुष हैं। उनका ज्ञान, दर्शन और साहित्य हमारी धरोहर है। भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता एवं अखंडता को पुष्ट करने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने देश की सभी दिशाओं में यात्रा कर संवाद कौशल से ज्ञान पताका लहराई। किसी भी देश की भाषा और संस्कृति उसकी विरासत का द्वार होती है। संस्कृति और सभ्यताओं की सबसे गूढ़ एवं मूलभूत बातों तक पहुंचना है तो उसके साहित्य को खंगालना होगा। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति पूरे देश में जगद्गुरु शंकराचार्य के दर्शन एवं कार्यों से युवाओं का परिचय कराने के लिए व्याख्यानमाला का आयोजन कर रही है।
विज्ञापन
हिंदी विभाग के सह आचार्य व व्याख्यानमाला के संयोजक डाॅ. गौरव तिवारी ने मंगलवार को बताया कि व्याख्यानमाला भारतीय भाषा समिति की तरफ से प्रायोजित है। मुख्य वक्ता उत्तर भारत दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर सभापति मिश्र होंगे। विशिष्ट वक्ता गोविवि में दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर द्वारिका नाथ होंगे। विषय प्रवर्तन काॅलेज के दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र प्रताप मिश्र करेंगे। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु शंकराचार्य सनातन संस्कृति एवं भारतवर्ष के शिखर पुरुष हैं। उनका ज्ञान, दर्शन और साहित्य हमारी धरोहर है। भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता एवं अखंडता को पुष्ट करने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने देश की सभी दिशाओं में यात्रा कर संवाद कौशल से ज्ञान पताका लहराई। किसी भी देश की भाषा और संस्कृति उसकी विरासत का द्वार होती है। संस्कृति और सभ्यताओं की सबसे गूढ़ एवं मूलभूत बातों तक पहुंचना है तो उसके साहित्य को खंगालना होगा। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति पूरे देश में जगद्गुरु शंकराचार्य के दर्शन एवं कार्यों से युवाओं का परिचय कराने के लिए व्याख्यानमाला का आयोजन कर रही है।
विज्ञापन