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Kushinagar News: जांच में हुई शौचालय निर्माण में घोटाले की पुष्टि, कार्रवाई नहीं
Sun, 29 Oct 2023 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 29 Oct 2023 12:06 AM IST
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- सरकारी अभिलेख में एक ही गांव में बना दिए गए 12 लाख रुपये से अधिक के शौचालय
संवाद न्यूज एजेंसी
जौरा बाजार। फाजिलनगर ब्लॉक के कुछ ऐसे भी गांव हैं, जहां शौचालय सिर्फ सरकारी अभिलेखों में बनाकर गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। हालत यह है कि केवल एक ही गांव में 12 लाख रुपये से अधिक का शौचालय सरकारी अभिलेख में बनाकर रुपये हजम कर लिए गए। आश्चर्य की बात तो यह है कि जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस वजह से गांव के लोग आज भी खुले में नित्यक्रिया बाहर करते हैं।
घर-घर शौचालय बनवाने के लिए सरकार ने रुपये भी खर्च किए, लेकिन ब्लॉक के कुछ गांव के लोगों के घर शौचालय नहीं बने हैं। दरअसल उन्हें शौचालय बनवाने के लिए मिलने पाला धन लाभार्थी को उपलब्ध न कराकर सरकारी अभिलेख में हजम कर लिया गया। यह मामला विभागीय जांच में ही पता चला है।
दरअसल, क्षेत्र के परसौनी गांव के निवासी श्रीकांत सिंह की अगुवाई में गांव के 20 लोगों ने नोटरी बयान हल्फी के साथ डीएम को शिकायती पत्र दिया था। इन लोगों ने वर्ष 2017 से 2020 के बीच गांव में बने शौचालयों में धांधली की शिकायत कर जांच की मांग की थी।
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डीएम के निर्देश पर बीते जनवरी माह में गांव में जांच करने पहुंचे अपर जिला कृषि अधिकारी राकेश पांडेय ने घर-घर जाकर सरकारी धन से बने शौचालयों की जांच की। इसमें 102 शौचालयों का निर्माण केवल सरकारी अभिलेखों में मिला। जांच के दौरान गांव के करीब 50 लोग नहीं मिले। गांव के लोगों के मुताबिक जांच के दिन जो नहीं मिले, उनके घर भी शौचालय नहीं बने थे, लेकिन उनके नाम पर शौचालय निर्माण की रकम निकाल ली गई थी।
आश्चर्य की बात तो यह है कि जांच में शौचालय निर्माण के नाम पर घोटाला होने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस संबंध में डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि जांच में अनियमितता के बाद भी कार्रवाई नहीं होना गंभीर बात है। इसके बारे में विस्तार से जानकारी लेकर शीघ्र कार्रवाई करवाता हूं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जौरा बाजार। फाजिलनगर ब्लॉक के कुछ ऐसे भी गांव हैं, जहां शौचालय सिर्फ सरकारी अभिलेखों में बनाकर गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। हालत यह है कि केवल एक ही गांव में 12 लाख रुपये से अधिक का शौचालय सरकारी अभिलेख में बनाकर रुपये हजम कर लिए गए। आश्चर्य की बात तो यह है कि जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस वजह से गांव के लोग आज भी खुले में नित्यक्रिया बाहर करते हैं।
घर-घर शौचालय बनवाने के लिए सरकार ने रुपये भी खर्च किए, लेकिन ब्लॉक के कुछ गांव के लोगों के घर शौचालय नहीं बने हैं। दरअसल उन्हें शौचालय बनवाने के लिए मिलने पाला धन लाभार्थी को उपलब्ध न कराकर सरकारी अभिलेख में हजम कर लिया गया। यह मामला विभागीय जांच में ही पता चला है।
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दरअसल, क्षेत्र के परसौनी गांव के निवासी श्रीकांत सिंह की अगुवाई में गांव के 20 लोगों ने नोटरी बयान हल्फी के साथ डीएम को शिकायती पत्र दिया था। इन लोगों ने वर्ष 2017 से 2020 के बीच गांव में बने शौचालयों में धांधली की शिकायत कर जांच की मांग की थी।
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डीएम के निर्देश पर बीते जनवरी माह में गांव में जांच करने पहुंचे अपर जिला कृषि अधिकारी राकेश पांडेय ने घर-घर जाकर सरकारी धन से बने शौचालयों की जांच की। इसमें 102 शौचालयों का निर्माण केवल सरकारी अभिलेखों में मिला। जांच के दौरान गांव के करीब 50 लोग नहीं मिले। गांव के लोगों के मुताबिक जांच के दिन जो नहीं मिले, उनके घर भी शौचालय नहीं बने थे, लेकिन उनके नाम पर शौचालय निर्माण की रकम निकाल ली गई थी।
आश्चर्य की बात तो यह है कि जांच में शौचालय निर्माण के नाम पर घोटाला होने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस संबंध में डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि जांच में अनियमितता के बाद भी कार्रवाई नहीं होना गंभीर बात है। इसके बारे में विस्तार से जानकारी लेकर शीघ्र कार्रवाई करवाता हूं।