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Kushinagar News: लोक संस्कृति का अंतरराष्ट्रीय उत्सव 14 व 15 अप्रैल को
Tue, 12 Mar 2024 12:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 12 Mar 2024 12:21 PM IST
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फाजिलनगर। सांस्कृतिक भड़ैंती, फूहड़पन के विरुद्ध, जनसंस्कृति के संवर्द्धन के लिए 14 व 15 अप्रैल को जोगिया जनूबी पट्टी में लोकरंग आयोजित होगा। यह आयोजन लोकरंग सांस्कृतिक समिति, जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर के मुक्ताकाशी मंच पर होता है।
संस्था ने विदेशों के गिरमिटिया कलाकारों को भी इस आयोजन से जोड़ा है। सात समंदर पार बसे सूरीनाम और नीदरलैंड के कलाकारों को लोकरंग मंच पर उतारा है। इस वर्ष सूरीनाम और नीदरलैंड से पांच सदस्यीय टीम, प्रसिद्ध सरनामी लोक गायक, राजमोहन के नेतृत्व में भाग लेने पहुंच रही है। राजमोहन के अलावा लोकरंग में भाग लेने आ रहे शेष कलाकार पहली बार शिरकत करेंगे, जिसमें भोजपुरी पॉप रैपर रग्गा मेन्नो, सोंदर हीरा, वरुण नंदा और किशन हीरा की प्रस्तुतियां पहली बार देखने को मिलेंगी। वरुण नंदा प्रसिद्ध सूरनामी ढोलक वादक हैं, जबकि सोंदर हीरा ने पूर्वांचल के लवंडा और अहीरवा नाच को सात समंदर पार जिंदा रखा हुआ है, जो गिरमिटिया मजदूरों के साथ दो सदी पूर्व सूरीनाम पहुंचा था।
आयोजन समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुशवाहा ने बताया कि लोकरंग का उद्घाटन ‘लोकरंग 2024’ पत्रिका के लोकार्पण से होगा। गांव की महिलाएं परंपरागत सोहर से सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत करेंगी। परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान, बिहार की टीम इस बार दोनों रात लोकगीतों के अलावा नाटक भी प्रस्तुत करेगी। कुशीनगर जनपद का प्रसिद्ध पंवरिया नृत्य, किन्नर नृत्य भी देखने को मिलेगा। लोकरंग में पहली बार असम का बागुरुम्बा, बोडो और भोरताल नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। सिक्किम की सांस्कृतिक टीम पहली बार आमंत्रित की गई है। ताल म्यूजिक एंड डांस अकादमी, नामची, सिक्किम द्वारा तमांग सेलो, मारुनी और कोडा डांस प्रस्तुत किया जाएगा।
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लोकरंग में इस बार राजस्थान के तमाम परंपरागत लोक वाद्य यंत्रों की धुन गूंजेगी तो परंपरागत राजस्थानी नृत्य भी देखने को मिलेगा। चंदा लाल कालबेलिया एंड पार्टी, जयपुर, राजस्थान को आमंत्रित किया गया है। भाई विरोध और दगा हो गए बालम दो नाटक भी मंचित किए जाएंगे, जो परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान बिहार की ओर से प्रस्तुत किया जाएगा। 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे से विचार गोष्ठी होगी। इसका विषय लोकसंस्कृति के समावेशी तत्व रख गया है। इस गोष्ठी में देश के तमाम साहित्यकार, प्रोफेसर और अध्यापक शामिल होंगे। इसमें वरिष्ठ साहित्यकार कंवल भारती, अवधेश प्रधान, प्रोफेसर सदानंद शाही प्रोफेसर नीरज खरे, प्रोफेसर दिनेश कुशवाह, प्रोफेसर निरंजन सहाय, प्रोफेसर अनिल राय, बीआर विप्लवी, प्रोफेसर अनिल सिंह, प्रोफेसर राजेश मल्ल, प्रोफेसर कमलेश वर्मा, डॉ. रवि शंकर सोनकर, प्रोफेसर राहुल कुमार मौर्य, डॉ. आशा सिंह, डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, डॉ. विंध्याचल यादव, रामजी यादव, स्वदेश सिन्हा (साहित्यकार, डॉ. दीनानाथ कुशवाहा और मनोेज कुमार सिंह शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा हिन्दी विभागाध्यक्ष, रीवा विश्वविद्यालय (म.प्र.) करेंगे।
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संस्था ने विदेशों के गिरमिटिया कलाकारों को भी इस आयोजन से जोड़ा है। सात समंदर पार बसे सूरीनाम और नीदरलैंड के कलाकारों को लोकरंग मंच पर उतारा है। इस वर्ष सूरीनाम और नीदरलैंड से पांच सदस्यीय टीम, प्रसिद्ध सरनामी लोक गायक, राजमोहन के नेतृत्व में भाग लेने पहुंच रही है। राजमोहन के अलावा लोकरंग में भाग लेने आ रहे शेष कलाकार पहली बार शिरकत करेंगे, जिसमें भोजपुरी पॉप रैपर रग्गा मेन्नो, सोंदर हीरा, वरुण नंदा और किशन हीरा की प्रस्तुतियां पहली बार देखने को मिलेंगी। वरुण नंदा प्रसिद्ध सूरनामी ढोलक वादक हैं, जबकि सोंदर हीरा ने पूर्वांचल के लवंडा और अहीरवा नाच को सात समंदर पार जिंदा रखा हुआ है, जो गिरमिटिया मजदूरों के साथ दो सदी पूर्व सूरीनाम पहुंचा था।
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आयोजन समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुशवाहा ने बताया कि लोकरंग का उद्घाटन ‘लोकरंग 2024’ पत्रिका के लोकार्पण से होगा। गांव की महिलाएं परंपरागत सोहर से सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत करेंगी। परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान, बिहार की टीम इस बार दोनों रात लोकगीतों के अलावा नाटक भी प्रस्तुत करेगी। कुशीनगर जनपद का प्रसिद्ध पंवरिया नृत्य, किन्नर नृत्य भी देखने को मिलेगा। लोकरंग में पहली बार असम का बागुरुम्बा, बोडो और भोरताल नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। सिक्किम की सांस्कृतिक टीम पहली बार आमंत्रित की गई है। ताल म्यूजिक एंड डांस अकादमी, नामची, सिक्किम द्वारा तमांग सेलो, मारुनी और कोडा डांस प्रस्तुत किया जाएगा।
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लोकरंग में इस बार राजस्थान के तमाम परंपरागत लोक वाद्य यंत्रों की धुन गूंजेगी तो परंपरागत राजस्थानी नृत्य भी देखने को मिलेगा। चंदा लाल कालबेलिया एंड पार्टी, जयपुर, राजस्थान को आमंत्रित किया गया है। भाई विरोध और दगा हो गए बालम दो नाटक भी मंचित किए जाएंगे, जो परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान बिहार की ओर से प्रस्तुत किया जाएगा। 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे से विचार गोष्ठी होगी। इसका विषय लोकसंस्कृति के समावेशी तत्व रख गया है। इस गोष्ठी में देश के तमाम साहित्यकार, प्रोफेसर और अध्यापक शामिल होंगे। इसमें वरिष्ठ साहित्यकार कंवल भारती, अवधेश प्रधान, प्रोफेसर सदानंद शाही प्रोफेसर नीरज खरे, प्रोफेसर दिनेश कुशवाह, प्रोफेसर निरंजन सहाय, प्रोफेसर अनिल राय, बीआर विप्लवी, प्रोफेसर अनिल सिंह, प्रोफेसर राजेश मल्ल, प्रोफेसर कमलेश वर्मा, डॉ. रवि शंकर सोनकर, प्रोफेसर राहुल कुमार मौर्य, डॉ. आशा सिंह, डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, डॉ. विंध्याचल यादव, रामजी यादव, स्वदेश सिन्हा (साहित्यकार, डॉ. दीनानाथ कुशवाहा और मनोेज कुमार सिंह शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा हिन्दी विभागाध्यक्ष, रीवा विश्वविद्यालय (म.प्र.) करेंगे।