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फिर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होगा कुशीनगर का निर्माणाधीन एयरपोर्ट
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कुशीनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का रास्ता साफ
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद सांसद और डीएम ने लिया जायजा
खास बातें
- वर्ष 1948 में बनी कसया हवाई पट्टी का 1995 में हुआ था जीर्णोद्घार
- वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी
- वर्ष 2012 में जमीन अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ था काम
अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर पर्यटकों की सुविधा के लिए बन रहे एयरपोर्ट को फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस एयरपोर्ट से जल्दी उड़ान शुरू होने व क्षेत्र में पर्यटक विकास की नई संभावनाओं को बल मिला है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद बुधवार की शाम सांसद व डीएम समेत अन्य अफसरों ने एयरपोर्ट का जायजा लिया।
वर्ष 1948 में कसया में ऐरा ड्रम (हवाई पट्टी) का निर्माण कराया गया था। हालांकि यहां से उड़ान शुरू न होने से करीब चार दशक तक हवाई पट्टी बेकार पड़ी रही। उसकी अधिकांश जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया। वर्ष 1995 में केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने इस हवाई पट्टी की सुधि ली और बाउंड्रीवाल बनाने समेत यहां एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) बिल्डिंग व गेस्ट हाउस का निर्माण कराया परंतु हवाई सेवा शुरू न होने से जल्दी ही एयरपोर्ट फिर पुरानी स्थिति में आ गया। वर्ष 2008 में कुशीनगर आईं बसपा सुप्रीमो व तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कुशीनगर विकास प्राधिकरण के गठन तथा कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की घोषणा की। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण करने में ही चार साल लग गए।
वर्ष 2012 में एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही एक बार फिर इस पर ग्रहण लग गया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने खर्च के अनुरूप यात्रियों की संख्या न होने का हवाला देते हुए निर्माण कार्य से हाथ पीछे खींच लिया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पहल की और वर्ष 2016 में हवाई अड्डे को पुन: अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाने लगा। 584.35 एकड़ जमीन पर बन रहे इस एयरपोर्ट का रनवे, फायर बिल्डिंग व बाउंड्रीवाल का काम पूरा हो चुका है। नई एटीसी बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए भी 21 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।
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योगी सरकार ने की नए सिरे से पहल
पिछले वर्ष गोरखपुर में मुख्यमंत्री की तरफ से नया एयरपोर्ट बनाने की घोषणा के साथ ही कुशीनगर एयरपोर्ट के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे। आरोप लग रहा था कि गोरखपुर में एयरपोर्ट बन जाने के बाद कुशीनगर एयरपोर्ट का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सांसद विजय कुमार दूबे ने मुख्यमंत्री से मिलकर इसके लिए पहल की तो मुख्यमंत्री के प्रयास से निर्माण कार्य में तेजी आई। पिछले दिनों सड़क चौड़ीकरण के साथ ही निर्माणाधीन एयरपोर्ट परिसर में स्थित शिवमंदिर व स्कूल को भी हटाने का रास्ता साफ हो गया।
जल्दी शुरू होगी उड़ान: डीएम
डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि कुशीनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के मानक के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। काफी काम हो चुका है। सरकार की मंशा है कि यहां से जल्दी से जल्दी उड़ान शुरू कराई जाए। इसके लिए भी तैयारी की जा रही है।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद सांसद और डीएम ने लिया जायजा
खास बातें
- वर्ष 1948 में बनी कसया हवाई पट्टी का 1995 में हुआ था जीर्णोद्घार
- वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी
- वर्ष 2012 में जमीन अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ था काम
अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर पर्यटकों की सुविधा के लिए बन रहे एयरपोर्ट को फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस एयरपोर्ट से जल्दी उड़ान शुरू होने व क्षेत्र में पर्यटक विकास की नई संभावनाओं को बल मिला है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद बुधवार की शाम सांसद व डीएम समेत अन्य अफसरों ने एयरपोर्ट का जायजा लिया।
वर्ष 1948 में कसया में ऐरा ड्रम (हवाई पट्टी) का निर्माण कराया गया था। हालांकि यहां से उड़ान शुरू न होने से करीब चार दशक तक हवाई पट्टी बेकार पड़ी रही। उसकी अधिकांश जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया। वर्ष 1995 में केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने इस हवाई पट्टी की सुधि ली और बाउंड्रीवाल बनाने समेत यहां एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) बिल्डिंग व गेस्ट हाउस का निर्माण कराया परंतु हवाई सेवा शुरू न होने से जल्दी ही एयरपोर्ट फिर पुरानी स्थिति में आ गया। वर्ष 2008 में कुशीनगर आईं बसपा सुप्रीमो व तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कुशीनगर विकास प्राधिकरण के गठन तथा कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की घोषणा की। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण करने में ही चार साल लग गए।
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वर्ष 2012 में एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही एक बार फिर इस पर ग्रहण लग गया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने खर्च के अनुरूप यात्रियों की संख्या न होने का हवाला देते हुए निर्माण कार्य से हाथ पीछे खींच लिया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पहल की और वर्ष 2016 में हवाई अड्डे को पुन: अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाने लगा। 584.35 एकड़ जमीन पर बन रहे इस एयरपोर्ट का रनवे, फायर बिल्डिंग व बाउंड्रीवाल का काम पूरा हो चुका है। नई एटीसी बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए भी 21 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।
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योगी सरकार ने की नए सिरे से पहल
पिछले वर्ष गोरखपुर में मुख्यमंत्री की तरफ से नया एयरपोर्ट बनाने की घोषणा के साथ ही कुशीनगर एयरपोर्ट के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे। आरोप लग रहा था कि गोरखपुर में एयरपोर्ट बन जाने के बाद कुशीनगर एयरपोर्ट का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सांसद विजय कुमार दूबे ने मुख्यमंत्री से मिलकर इसके लिए पहल की तो मुख्यमंत्री के प्रयास से निर्माण कार्य में तेजी आई। पिछले दिनों सड़क चौड़ीकरण के साथ ही निर्माणाधीन एयरपोर्ट परिसर में स्थित शिवमंदिर व स्कूल को भी हटाने का रास्ता साफ हो गया।
जल्दी शुरू होगी उड़ान: डीएम
डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि कुशीनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के मानक के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। काफी काम हो चुका है। सरकार की मंशा है कि यहां से जल्दी से जल्दी उड़ान शुरू कराई जाए। इसके लिए भी तैयारी की जा रही है।