Kushinagar: स्कूल जाने के बजाय बच्चे बेच रहे ताड़ी, सुबह से लेकर देर रात तक सजती है दुकान
जिला आबकारी अधिकारी राजवीर सिंह ने कहा कि शिकायत के आधार पर लगातार विभागीय कार्रवाई हो रही है। बच्चों की ऐसे कार्य में संलिप्तता दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को समझाया जाएगा। बिना लाइसेंस चल रही दुकानों पर कार्रवाई की जाएगी।
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कुशीनगर जिले के कसया-सेवरही मुख्य मार्ग पर कई जगहों पर बच्चे ताड़ी बेचते दिख जाएंगे। इस रोड पर सुबह से देर रात तक ताड़ी बेची जाती है। पढ़ने की उम्र में ताड़ी बेचने वाले बच्चों को देखकर शायद ही कोई कुछ कहता है। इन बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार और शासन की स्कूल चलो योजनाएं बेमानी साबित हो रही हैं। वहीं, वाहन किनारे खड़े करके ताड़ी पीने से दुर्घटनाएं भी होती हैं।
कसया-सेवरही मार्ग पर ताड़ी बेचने वाले कई बच्चे कहते हैं कि पढ़ने का मन तो बहुत करता है, लेकिन मजबूरी है। ताड़ी बेचकर कुछ पैसे कमा लेते हैं, तो मां-बाप सहित भाई-बहन के लिए रोज खाने की व्यवस्था हो जाती है। पढ़ने जाएंगे तो खाएंगे क्या? यह कहने पर कि मां-बाप तो कोई काम कर सकते हैं। बच्चे कहते हैं कि कोई और काम तो मिलता नहीं, ताड़ी बेचते हैं तो पुलिस पकड़ ले जाती है। हम बच्चे लोग पुलिस से छिपकर किसी तरह ताड़ी बेचते हैं।
जानकारी के अनुसार, ताड़ी बेचने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन इस क्षेत्र में बिना लाइसेंस के ही ताड़ी बेची जा रही है। यही नहीं इसमें नशीली दवा मिलाने का भी आरोप लगाया जाता है। सुबह से शाम तक तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के कसया से सेवरही सड़क पर प्रेम नगर, तुर्कपट्टी से फाजिलनगर सड़क पर गोंड टोला, देवपोखर आदि जगहों पर ताड़ी पीने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है।
बच्चों की संलिप्तता दुर्भाग्यपूर्ण
शिकायत के आधार पर लगातार विभागीय कार्रवाई हो रही है। बच्चों की ऐसे कार्य में संलिप्तता दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को समझाया जाएगा। बिना लाइसेंस चल रही दुकानों पर कार्रवाई की जाएगी। - राजवीर सिंह, जिला आबकारी अधिकारी
अभिभावकों का सहयोग अपेक्षित
स्कूल चलो अभियान के साथ मेरा उद्देश्य अभिभावक जागरूकता अभियान को बढ़ावा देना है। लगातार हेडमास्टर और शिक्षक अभिभावकों से मिलकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसमें अभिभावकों से भी सहयोग अपेक्षित है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोज कमाने खाने वाले लोग बच्चों को पढ़ाने से बेहतर कमाने पर जोर देते है। उन्हें पढ़ाई की अहमियत नहीं पता। विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया जाएगा कि वह बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें। - अंकिता सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, तमकुही