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Kushinagar News: खौलते शीरे में गिरा मासूम, बुझ गया घर का चिराग
Sun, 26 Apr 2026 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 26 Apr 2026 01:16 AM IST
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मृतक आशीष की फाइल फोटो।
पटहेरवा। चाय की दुकान में जलेबी के लिए तैयार खौलते शीरे में गिरकर तीन वर्षीय मासूम गंभीर रूप से झुलस गया। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान शुक्रवार देर शाम मौत हो गई। हादसे के बाद दुकान सूनी पड़ी है और परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
महुअवा देवरिया गांव निवासी गोविंदर गुप्ता का बेटा गोलू कुछ समय पहले तक विदेश में रहकर परिवार का भरण-पोषण करता था। कुछ दिन पूर्व वह गांव लौटा और घर के पास ही रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। करीब छह माह पहले काजीपुर हाईवे के किनारे टिनशेड में चाय की दुकान खोल ली। दुकान पर उसकी पत्नी पूजा, भाई रघु और तीन वर्षीय इकलौता बेटा आशीष भी दिनभर साथ रहते थे। शुक्रवार सुबह रोज की तरह दुकान खुली थी। जलेबी बनाने के लिए कड़ाही में शीरा तैयार किया गया था। इसी दौरान खेलते-खेलते मासूम आशीष गर्म शीरे से भरी कड़ाही में गिर पड़ा। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फाजिलनगर ले गए। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
वहां से उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद देर शाम उसकी जान चली गई। आशीष अपने माता-पिता की की इकलौती संतान था। आशीष के जन्म के बाद ही परिवार में खुशियां लौटी थीं और माता-पिता उसे बेहद दुलार करते थे। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। घर में सन्नाटा पसरा है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वालों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से परिवार को एक संतान का सहारा मिला था, लेकिन नियति ने उसे भी छीन लिया।
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महुअवा देवरिया गांव निवासी गोविंदर गुप्ता का बेटा गोलू कुछ समय पहले तक विदेश में रहकर परिवार का भरण-पोषण करता था। कुछ दिन पूर्व वह गांव लौटा और घर के पास ही रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। करीब छह माह पहले काजीपुर हाईवे के किनारे टिनशेड में चाय की दुकान खोल ली। दुकान पर उसकी पत्नी पूजा, भाई रघु और तीन वर्षीय इकलौता बेटा आशीष भी दिनभर साथ रहते थे। शुक्रवार सुबह रोज की तरह दुकान खुली थी। जलेबी बनाने के लिए कड़ाही में शीरा तैयार किया गया था। इसी दौरान खेलते-खेलते मासूम आशीष गर्म शीरे से भरी कड़ाही में गिर पड़ा। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फाजिलनगर ले गए। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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वहां से उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद देर शाम उसकी जान चली गई। आशीष अपने माता-पिता की की इकलौती संतान था। आशीष के जन्म के बाद ही परिवार में खुशियां लौटी थीं और माता-पिता उसे बेहद दुलार करते थे। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। घर में सन्नाटा पसरा है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वालों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से परिवार को एक संतान का सहारा मिला था, लेकिन नियति ने उसे भी छीन लिया।
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