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दोनों जंगलों को जोड़ने की पहल
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2017 11:34 PM IST
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व मदनपुर क्षेत्र की फोटो ।
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज जिले के सोहगी बरवां वन्य जीव अभ्यारण्य को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से मिलाने के लिए वन विभाग के अफसर संभावनाएं तलाश रहे हैं। इस कवायद के पीछे वन्य जीवों की सुरक्षा और निगरानी के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने की मंशा भी है। इसके लिए जल्दी ही वन विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक होगी।
कुशीनगर जिले की सीमा से सटा बिहार प्रांत का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में है। सात रेंज में बंटे इस जंगल में बांघ, तेंदुआ, गैंडा समेत तमाम प्रजातियों के जानवर रहते हैं। इससे सटे ही पड़ोसी जिला महराजगंज का सोहगी बरवा वन्य जीव अभ्यारण्य भी है। इन दिनों उत्तराखंड से भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञ उज्ज्वल कुमार, आशीष प्रसाद, देवरंजन लाहा व नेहा अवस्थी तथा वन्य जीव विशेषज्ञ डाक्टर आईपी बोपन्ना की टीम वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आसपास के लोगों और वनकर्मियों को जागरूक कर रही है। इस टीम ने भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए दोनों जंगलों को एक साथ जोड़ने की पहल शुरू की है। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो इस मुद्दे पर विचार के लिए जल्द ही यूपी और बिहार के वन विभाग के वरिष्ठ अफसरों की बैठक होने वाली है। जानकर बताते हैं कि वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के कई जानवर अक्सर ही सोहगी बरवां के जंगल में चले जाते हैं। इससे इन जानवरों की निगरानी व सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहता है। अगर ये दोनों जंगल मिला दिए जाते हैं तो इससे जानवरों को और अधिक लंबा क्षेत्रफल मिलेगा। साथ ही इनकी निगरानी भी आसान हो जाएगी। बता दें कि सोहगीबरवा व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अलावा नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान की सीमाएं आपस में मिलती हैं। इन जंगलों का वातावरण एक जैसा होने के चलते समान प्रकार के ही जानवर पाए जाते हैं।
इस संबंध में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र निदेशक एस चंद्रशेखर ने बताया कि दोनों तरफ के जंगल जुड़ जाने से पर्यटकों के लिए सही योजना बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही वन्य जीवों की निगरानी भी आसान हो जाएगी। इसके लिए यूपी के वन प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही बैठक करके इसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
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कुशीनगर जिले की सीमा से सटा बिहार प्रांत का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में है। सात रेंज में बंटे इस जंगल में बांघ, तेंदुआ, गैंडा समेत तमाम प्रजातियों के जानवर रहते हैं। इससे सटे ही पड़ोसी जिला महराजगंज का सोहगी बरवा वन्य जीव अभ्यारण्य भी है। इन दिनों उत्तराखंड से भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञ उज्ज्वल कुमार, आशीष प्रसाद, देवरंजन लाहा व नेहा अवस्थी तथा वन्य जीव विशेषज्ञ डाक्टर आईपी बोपन्ना की टीम वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आसपास के लोगों और वनकर्मियों को जागरूक कर रही है। इस टीम ने भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए दोनों जंगलों को एक साथ जोड़ने की पहल शुरू की है। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो इस मुद्दे पर विचार के लिए जल्द ही यूपी और बिहार के वन विभाग के वरिष्ठ अफसरों की बैठक होने वाली है। जानकर बताते हैं कि वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के कई जानवर अक्सर ही सोहगी बरवां के जंगल में चले जाते हैं। इससे इन जानवरों की निगरानी व सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहता है। अगर ये दोनों जंगल मिला दिए जाते हैं तो इससे जानवरों को और अधिक लंबा क्षेत्रफल मिलेगा। साथ ही इनकी निगरानी भी आसान हो जाएगी। बता दें कि सोहगीबरवा व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अलावा नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान की सीमाएं आपस में मिलती हैं। इन जंगलों का वातावरण एक जैसा होने के चलते समान प्रकार के ही जानवर पाए जाते हैं।
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इस संबंध में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र निदेशक एस चंद्रशेखर ने बताया कि दोनों तरफ के जंगल जुड़ जाने से पर्यटकों के लिए सही योजना बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही वन्य जीवों की निगरानी भी आसान हो जाएगी। इसके लिए यूपी के वन प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही बैठक करके इसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
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