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Kushinagar News: एक साल बाद भी नहीं दी सूचना, सीएम पोर्टल पर शिकायत
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। दुदही ब्लॉक के मिश्रौली कुबेरा भुआल पट्टी गांव में हुए विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी गांव के एक युवक ने जन सूचना अधिकार (आरटीआई) से मांगी। सूचना एक साल बाद भी नहीं उपलब्ध कराई गई। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर युवक ने की है।
आरोप है कि शिकायतकर्ता से बिना संपर्क किए सचिव और बीडीओ ने रिपोर्ट लगाई है कि शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया, लेकिन हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इसके अलावा जो भी सूचना मांगी गई है। वह देने के लिए पन्ने की फोटो कॉपी कराने के लिए 17 हजार रुपये जमा करने का जिक्र किया गया है। झूठी रिपोर्ट लगाकर निस्तारण करने वाले बीडीओ व सचिव के खिलाफ युवक ने डीएम शिकायत की।
मिश्रौली कुबेरा भुआल पट्टी गांव निवासी प्रवीण कुमार मिश्रा का आरोप है कि एक साल पूर्व गांव में हुए विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। रिमाइंडर भी किया, लेकिन एक साल बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। आरटीआई से मांगी गई जानकारी नहीं देने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर 28 दिन पूर्व किया। सचिव और बीडीओ की ओर से झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है। इसमें गवाह के रूप में जिनका नाम लिखा गया है वह वर्तमान प्रधान के परिवार के सदस्य और रोजगार सेवक हैं, शिकायत के निस्तारण के लिए कोई संपर्क शिकायतकर्ता से नहीं किया गया।
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निस्तारण रिपोर्ट में बताया गया है कि जो सूचना आरटीआई के तहत मांगी गई है, उसमें 17465 रुपये खर्च आएंगा।
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पडरौना। दुदही ब्लॉक के मिश्रौली कुबेरा भुआल पट्टी गांव में हुए विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी गांव के एक युवक ने जन सूचना अधिकार (आरटीआई) से मांगी। सूचना एक साल बाद भी नहीं उपलब्ध कराई गई। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर युवक ने की है।
आरोप है कि शिकायतकर्ता से बिना संपर्क किए सचिव और बीडीओ ने रिपोर्ट लगाई है कि शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया, लेकिन हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इसके अलावा जो भी सूचना मांगी गई है। वह देने के लिए पन्ने की फोटो कॉपी कराने के लिए 17 हजार रुपये जमा करने का जिक्र किया गया है। झूठी रिपोर्ट लगाकर निस्तारण करने वाले बीडीओ व सचिव के खिलाफ युवक ने डीएम शिकायत की।
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मिश्रौली कुबेरा भुआल पट्टी गांव निवासी प्रवीण कुमार मिश्रा का आरोप है कि एक साल पूर्व गांव में हुए विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। रिमाइंडर भी किया, लेकिन एक साल बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। आरटीआई से मांगी गई जानकारी नहीं देने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर 28 दिन पूर्व किया। सचिव और बीडीओ की ओर से झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है। इसमें गवाह के रूप में जिनका नाम लिखा गया है वह वर्तमान प्रधान के परिवार के सदस्य और रोजगार सेवक हैं, शिकायत के निस्तारण के लिए कोई संपर्क शिकायतकर्ता से नहीं किया गया।
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निस्तारण रिपोर्ट में बताया गया है कि जो सूचना आरटीआई के तहत मांगी गई है, उसमें 17465 रुपये खर्च आएंगा।