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इंडोनेशियाई पर्यटकों का दल पहुंचा कुशीनगर
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कुशीनगर महापरिनिर्वाण मंदिर के पीछे स्थित विशाल स्तूप के सायने बैठकर विश्व शांति के लिए पाठ करत?
- फोटो : KUSHINAGAR
इंडोनेशियाई पर्यटकों का दल पहुंचा कुशीनगर
पडरौना। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में विदेशी पर्यटकों के आगमन का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि विदेशी पर्यटकों के आने की शुरूआत अक्तूबर से मानी जाती रही है।
बीते मंगलवार की देर शाम 40 सदस्यीय इंडोनेशियाई पर्यटकों का दल कुशीनगर पहुंचा। रात्रि प्रवास के बाद यह दल बुधवार की सुबह कुशीनगर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा कर चीवर चढ़ाया। वहीं, दल के सदस्यों ने यहां विशाल स्तूप के सामने ध्यान मुद्रा में बैठकर विश्व शांति के लिए पाठ किया।
यह दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद रामाभार स्तूप पहुंचा। स्तूप की परिक्रमा कर विधि-विधान से पूजा की। वहीं, दल के सदस्यों ने माथा कुंवर मंदिर का भी दर्शन किया। इसके अलावा, कुशीनगर के अन्य दर्शनीय स्थलों जैसे थाई मंदिर, वर्मी मंदिर, तिब्बत मंदिर समेत बौद्धकालीन हिरण्यवती नदी के किनारे बने पार्क व घाटों का लुत्फ उठाया।
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पूर्व सभासद व पूजा संबंधी सामनों के व्यवसायी योगेंद्र चौरसिया ने बताया कि दल कुशीनगर से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी के लिए रवाना हो गया है। वहीं बुधवार की देर शाम भी करीब 15 सदस्यीय वियतनामी दल कुशीनगर पहुंचा है, जो रात्रि प्रवास के बाद बृहस्पतिवार को पूजा कर अगले गंतव्य के लिए रवाना होगा।
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पडरौना। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में विदेशी पर्यटकों के आगमन का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि विदेशी पर्यटकों के आने की शुरूआत अक्तूबर से मानी जाती रही है।
बीते मंगलवार की देर शाम 40 सदस्यीय इंडोनेशियाई पर्यटकों का दल कुशीनगर पहुंचा। रात्रि प्रवास के बाद यह दल बुधवार की सुबह कुशीनगर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा कर चीवर चढ़ाया। वहीं, दल के सदस्यों ने यहां विशाल स्तूप के सामने ध्यान मुद्रा में बैठकर विश्व शांति के लिए पाठ किया।
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यह दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद रामाभार स्तूप पहुंचा। स्तूप की परिक्रमा कर विधि-विधान से पूजा की। वहीं, दल के सदस्यों ने माथा कुंवर मंदिर का भी दर्शन किया। इसके अलावा, कुशीनगर के अन्य दर्शनीय स्थलों जैसे थाई मंदिर, वर्मी मंदिर, तिब्बत मंदिर समेत बौद्धकालीन हिरण्यवती नदी के किनारे बने पार्क व घाटों का लुत्फ उठाया।
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पूर्व सभासद व पूजा संबंधी सामनों के व्यवसायी योगेंद्र चौरसिया ने बताया कि दल कुशीनगर से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी के लिए रवाना हो गया है। वहीं बुधवार की देर शाम भी करीब 15 सदस्यीय वियतनामी दल कुशीनगर पहुंचा है, जो रात्रि प्रवास के बाद बृहस्पतिवार को पूजा कर अगले गंतव्य के लिए रवाना होगा।