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Kushinagar News: रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल बिगाड़ रही मिट्टी की सेहत

Mon, 26 Feb 2024 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 26 Feb 2024 01:03 AM IST
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Indiscriminate use of chemicals is spoiling the health of the soil
-मिट्टी के नमूनों की जांच के बाद चिंताजनक तस्वीर सामने आई
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- दो साल में 20 हजार मिट्टी के नमूने की जांच में 95 फीसदी मिले बीमार
सुधीर कुमार मिश्रा
पडरौना। खेतों में रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी बीमार हो रही है। जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा तेजी से कम हो रही है तो मित्र कीट भी नष्ट हो रहे हैं। मृदा परीक्षण के लिए नमूनों की जांच में यह तथ्य सामने आया है। यही हाल रहा तो जिले की धरती सोना नहीं उगल सकेगी और उसर हो जाएगी। मृदा परीक्षण की जांच रिपोर्ट के बाद कृषि विभाग की चिंता बढ़ गई है।
जिले में गेहूं, धान, आलू, मक्का और गन्ना आदि फसलों की खेती प्रमुखता से होती है। अधिक उत्पादन की चाह में किसान रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का बेतहाशा प्रयोग कर रहे हैं। तात्कालिक लाभ भले मिल रहा हो, लेकिन भविष्य के लिए चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। वर्ष 2022-23 में मिट्टी के 14814 नमूने की 12 पैरामीटर पर जांच की गई। इसमें 95 फसदी नमूनों की जांच में नाइट्रोजन, फासफोरस, पोटास, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी मिली है। यही हाल वर्ष 23-24 में जांच किए गए 8400 नमूनों की जांच रिपोर्ट काफी चिंताजनक है। समय रहते किसानों ने अगर खेती-किसानी के तरीके में बदलाव नहीं किया तो नेबुआ नौरंगिया, तमकुहीराज, खड्डा और विशुनपुरा ब्लॉक के खेतों में फसल उगाना मुश्किल हो जाएगा।
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ये करें उपाय

कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के वैज्ञानिक डॉ. अशोक ने बताया कि कीटनाशक के इस्तेमाल से मित्र कीट मर जाते हैं। वहीं खेत में फसल अवशेष जलाने से सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी कमी आती है। किसान इसमें सुधार चाहते हैं तो उन्हें गोबर की खाद व वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करना होगा। हरी खाद के लिए हैंचा व दलहनी फसलों की बुवाई पर जोर देना होगा। किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच कराकर उसके अनुसार ही उर्वरकों व पोषक तत्वों का इस्तेमाल करें।
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घुलनशीलता कम होने से उर्वरक बेअसर
मिट्टी में सल्फर को घुलनशीलता 15 पीपीएम से अधिक है। तब इसे पर्याप्त माना जाता है। वहीं 10-15 पीपीएम तक की स्थिति में भी इसे सामान्य माना जाता है। पर जिले में इसकी हालत बहुत खराब (आठ से भी कम) है। यहां पर फास्फेट की घुलनशीलता कम हो जाएगी तो, यह एक परत बना देगी। इससे उर्वरक जमीन के अंदर तक जाएंगे ही नहीं।


मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की मात्रा में सुधार लाएं

95 फीसदी नमूनों में जीवांश कार्बन व सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी मिली है। जिला भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष विजय प्रकाश वर्मा ने बताया कि मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की मात्रा व जीवांश कार्बन की स्थिति में सुधारा नहीं लाया गया तो फसल का उत्पादन नहीं होगा। मिट्टी में मौजूद मित्र कीट मर रहे हैं। अगर किसान नहीं चेते तो परिणाम घातक होगा। विजय ने बताया कि किसानों को खेती की ओर ध्यान देना चाहिए। कीटनाशक का इस्तेमाल कम करें। सरकार और अधिकारी किसानों को टिप्स दे सकते हैं पर इसका उपयोग किसानों को ही करना होगा।

जीवांश कार्बन की स्थिति भी खराब

मिट्टी में जीवांश कार्बन 0.80 पीपीएम से अधिक होने पर इसे उच्च स्तर पर माना जाता है। वहीं 0.51 से 0.80 तक होने पर भी मध्यम स्तर होता है। यहां तक स्थिति सामान्य रहती है। जिले में यह महज 0.02 से 0.04 तक पहुंच गया है। जो चिंताजनक है।


मिट्टी के पोषक तत्वों में आई कमी को बेहतर करने के लिए फसल चक्र में बदलाव की जरूरत है। दलहनी फसल को खेत में बोना जरूरी है। गन्ना, धान, गेंहू की लगातार बुआई कर उर्वरक का प्रयोग किया जा रहा है। यह एक बड़ी वजह है। हरी खाद की कमी के कारण बोरान की कमी आई है। इससे फसल की उपज पर सीधा असर पड़ता है। न्याय पंचायतों में गोष्ठी के माध्यम से किसानों में जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. बीआर मौर्या, भूमि संरक्षण अधिकारी, कुशीनगर
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तत्वों की औसत स्थिति

तत्व मानक औसत स्थिति
जिंक 1.0- 20 0.6 पीपीएम
फास्फोरस 50- 100 20.0 पीपीएम
आयरन 8-10 08 पीपीएम
बोरान 0.50 0.25 पीपीएम
मैगनिक 0.4 0.2 पीपीएम
काॅपर 0.4 0.3 पीपीएम
(पीपीएम : पार्ट प्रति मिलियन)
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