कुशीनगर के गन्ने की बढ़ी मिठास

कुशीनगर (ब्यूरो) Updated Wed, 14 Mar 2018 11:58 PM IST
कुशीनगर के गन्ने की बढ़ी मिठास
कुशीनगर के गन्ने की बढ़ी मिठास - फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। वैसे तो गन्ना अपनी कुदरती मिठास के लिए हमेशा से सबकी पसंद रहा है, लेकिन कुशीनगर जिले में इसकी मिठास में और इजाफा हुआ है। यह मुमकिन हुआ है अस्वीकृत प्रजातियों के गन्ने की बुआई बंद कर अगैती गन्ना बोने से। फलस्वरूप जनपद की सभी पांच चीनी मिलों में चीनी का उत्पादन बढ़ने की बात कही जाने लगी है। फलस्वरूप जिले की सभी पांच चीनी मिलों में चीनी का उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ चीनी परता (प्रति क्विंटल गन्ने से बनने वाली चीनी की मात्रा) भी बढ़ा है। 
तीस साल पहले तक यहां संचालित पडरौना, कठकुइयां, रामकोला (खेतान), लक्ष्मीगंज, छितौनी, खड्डा, कप्तानगंज, रामकोला (पंजाब) और सेवरही सहित नौ चीनी मिलों में से पांच एक-एक कर बंद हो जाने के बाद किसान उपेक्षित थे। किसान की बेरुखी का एक प्रमुख कारण यह था कि न तो गन्ने का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाता था और न चीनी मिलें समय से गन्ना मूल्य का भुगतान करती थीं। इसके चलते गन्ने की खेती के प्रति किसानों का मोह भंग होने लगा था। परंतु व्यवस्था में सुधार आने के बाद पिछले पेराई सत्र से गन्ने की खेती के प्रति किसानों की रुचि बढ़ी है। गन्ना विभाग की मानी जाए तो प्रति क्विंटल गन्ना रिकवरी औसतन 10 किलोग्राम होनी चाहिए, जिसकी तुलना में इस वर्ष जनपद की कई चीनी मिलों ने औसत से अधिक चीनी की रिकवरी प्राप्त की है। 
 

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