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कुश्ती के प्रति युवाओं में बढ़ी रुचि, प्रशिक्षक नहीं

Tue, 31 May 2022 11:34 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 11:34 PM IST
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Increased interest in youth towards wrestling, not a coach
कुश्ती के प्रति युवाओं में बढ़ी रुचि, प्रशिक्षक नहीं
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सांसद खेल प्रतियोगिता और ग्रामीणांचल में होने वाली कुश्ती स्पर्धा में पहुंचते हैं पहलवान
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। प्राचीन खेलों में शुमार कुश्ती के लिए जिला स्टेडियम में कोच नहीं हैं। हालांकि सांसद खेल प्रतियोगिता हो या ग्रामीणांचल में आयोजित होने वाली कुश्ती स्पर्धा में हिस्सा लेने काफी संख्या में पहलवान आते हैं। इनमें कई पहलवान जनपद के होते हैं।
जानकारों की मानें तो कुश्ती वैश्विक स्तर पर मार्शल आर्ट के रूप में सात हजार ईसा पूर्व से अस्तित्व में है। कुश्ती के प्रारंभिक रूप को ‘मल्ल-युद्ध’ के रूप में भी जाना जाता था। जनपद में विभिन्न हिस्सों में कुश्ती का आयोजन होता है। इसमें जिले के पहलवानों के अलावा दूसरे राज्यों से पहलवान आकर दांव आजमाते हैं, लेकिन खेल विभाग की तरफ से काफी दिनों से यहां कुश्ती के प्रशिक्षक नहीं हैं। जिले के पूर्व में क्रीड़ाधिकारी रहे सर्वदेव सिंह यादव इसके कोच थे, उस समय कुश्ती का प्रशिक्षण दिया जाता था। अब न तो इसे बढ़ावा देने के लिए कोच मिले न ही यहां प्रशिक्षण लेने के लिए खिलाड़ी पहुंचरहे हैं।
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जिला क्रीड़ाधिकारी रवि कुमार निषाद ने कहा कि सांसद खेल प्रतियोगिता हो या अन्य खेल प्रतियोगिताओं में कुश्ती के खिलाड़ी अधिक संख्या में आते हैं, लेकिन प्रशिक्षण लेने के लिए खिलाड़ी बहुत कम आते हैं। इसलिए कुश्ती के कोच की तैनाती नहीं हो पा रही है।
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