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जोखिम के बावजूद नाव है मजबूरी

Thu, 19 Apr 2018 12:41 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Thu, 19 Apr 2018 12:41 AM IST
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In spite of risk boat is compulsion
नाव पर लदे ट्रैक्टर। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
तमकुहीरोड।      ग्रामीण जोखिम जानते हुए भी नाव की सवारी को मजबूर हैं, क्योंकि उसके बिना उनकी आजीविका ही बंद हो जाएगी। इसका कारण है गंडक के एक छोर पर गांव और दूसरे छोर पर है उनका खेत है। कई बार तो एक नाव पर ही कई ट्रैक्टर के साथ ही ग्रामीण भी अपनी जान हथेली पर रखकर नाव की सवारी करते हैं। यह हकीकत है जवहींदयाल गांव की, जहां बड़ी गंडक नदी में कोई पुल न होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कई बार इसके लिए मांग करने के बावजूद आज तक ग्रामीणों की समस्या पर किसी नेता या प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। 
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इससे उस पार सैकड़ों एकड़ क्षेत्रफल में बोई गई उनके गन्ने की ढुलाई नावों से करानी पड़ रही है। किसानों को इसमें जोखिम मोल लेना पड़ रहा है। किसानों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में गंडक नदी पर पुल का निर्माण हो जाए तो कई गांवों के किसानों को नांव से नदी पार करने की समस्या से निजात मिल जाएगी।  
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सेवरही गन्ना बाहुल्य क्षेत्र है। यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति गन्ने पर ही निर्भर करती है, लेकिन यह विडंबना ही है कि गन्ना किसानों को हर साल पर्ची और आवागमन की समस्या से जूझना पड़ता है। इस समय गंडक नदी के उस पार यूपी क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ क्षेत्रफल में गन्ने की फसल बोयी गई है, लेकिन गंडक नदी पर कोई पुल न होने से किसानों को अपना गन्ना नाव से इस पार लाना पड़ रहा है।  
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जवहीदयाल, जंगलीपट्टी, बिनटोली, चैनपट्टी सहित ऐसे कई गांव के किसानों की खेती गंडक नदी के उस पर है और यह किसान केवल गन्ने की ही खेती करते हैं। अब जब इस माह के अंत में चीनी मिल की बंदी का काउंटडाउन शुरू हो जाएगा, इसलिए किसान अपना गन्ना चीनी मिल तक पहुंचाने में जुट गए हैं।

इस क्षेत्र के मथुरा सिंह, टुन्ना मद्देशिया, बाबूलाल निषाद, जेपी साहनी, प्रभुनाथ यादव आदि का कहना है कि जब तक गंडक नदी में पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक गन्ना किसानों की आवागमन की समस्या जस की तस बनी रहेगी। साथ ही किसानों को जोखिम उठाकर नावों के सहारे गन्ना इस पार लाना पड़ेगा।
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