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ग्राम पंचायताें के रिक्त पदों के लिए 65.3 फीसदी मतदान
अमर उजाला ब्यूरो/कुशीनगर
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:26 PM IST
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पंचायताें के रिक्त पदों के लिए मतदान रविवार को संपन्न हो गया। शाम पांच बजे तक 65.3 फीसदी मतदान हुआ। मतदान के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कुकुरहा में प्रधान पद के एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कराने का आरोप तहसीलदार पर लगाकर कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने प्रशासन विरोधी नारे भी लगाए। अन्य पदों के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। दो ग्राम प्रधानों और 12 ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए मतदान की प्रक्रिया शाम तक चली।
जनपद की 19 ग्राम पंचायतें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आरक्षित होने और वहां से उम्मीदवार न होने की वजह से वहां मतदान नहीं हुआ था। पिछले चुनाव में सीटें रिक्त रह गई थीं। ब्लॉक प्रमुख का चुनाव संपन्न होने के बाद रिक्त पदों के लिए पुन: अधिसूचना जारी हुई और नामांकन पत्र दाखिल हुआ था, जिसमें 17 सीटों के लिए नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिए गए थे।
केवल विशुनपुरा के कुकुरहा और सुकरौली ब्लॉक के चिलुआ के लिए दाखिल दो-दो उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाए गए थे। इसी तरह सेवरही ब्लॉक के खैरटिया के तीन वार्डों, हाटा के मिश्र ढाढ़ा सहित दो वार्डों, सुकरौली के बगरा देऊर और फाजिलनगर के मधुरिया, भटवा एवं भड़सरवा के लिए दाखिल दो-दो प्रत्याशियों के नामांकन पत्र ही सही पाए गए थे। दो गांवों के प्रधान पद के दो-दो प्रत्यशियों और ग्राम पंचायत सदस्यों के 12 वार्ड के दो-दो उम्मीदवारों सहित कुल 28 लोग चुनाव मैदान में थे।
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इन गांवों और वार्डों के उम्मीदवारों के लिए मतदान रविवार को प्रात: सात बजे आरओ और एआरओ की मौजूदगी में शुरू हुआ। शाम पांच बजे तक मतदान की प्रक्रिया जारी रही। विशुनपुरा ब्लॉक के कुकुरहा गांव में प्रधान पद के चुनाव में मतदान के दौरान शाम को थोड़ी देर के लिए शोरशराबे का माहौल बन गया।
एक पक्ष का आरोप था कि पडरौना के तहसीलदार ने दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर विदेश में बसे व्यक्ति को भी मत डालने की अनुमति दी। नाराज पक्ष ने मतदान केंद्र से कुछ दूर प्रशासन विरोधी नारे लगाए और प्रदर्शन किया। हालांकि तहसीलदार ने आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। मतदान शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत चुनाव श्याम नारायण प्रसाद ने बताया कि सेवरही ब्लॉक के खैरटिया के वार्ड नंबर-दो, पांच और नौ में 65 प्रतिशत, हाटा ब्लॉक के मिश्र ढाढ़ा के वार्ड नंबर-दो और नौ में 60 प्रतिशत, सुकरौली ब्लॉक के बगरा देऊर के वार्ड नंबर-आठ में 58 प्रतिशत, सुकरौली के ही चिलुआ में प्रधान पद के लिए हुए मतदान में 62.7 प्रतिशत, विशुनपुरा के कुकुरहां गांव में प्रधान पद के लिए 70 प्रतिशत मतदान हुआ।
जबकि फाजिलनगर ब्लॉक के मधुरिया गांव के वार्ड नंबर-आठ, भटवा के वार्ड नंबर-चार और भड़सरवा के वार्ड नंबर पांच, छह, आठ और 11 में 63.2 प्रतिशत वोट पड़े। इस तरह दोनों गांवों और सभी 12 वार्डों को मिलाकर कुल 65.3 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्हाेंने बताया कि सभी मतपेटियां संबंधित ब्लॉकों के स्ट्रांगरूम में कड़ी सुरक्षा के बीच जमा करा दी गईं। इनकी गिनती 23 तारीख को प्रात: आठ बजे से होगी।
सत्रह ग्राम पंचायतें इस बार भी रह गईं खाली
पडरौना। ग्राम प्रधानों के लिए अनुसूचित जनजाति की श्रेेणी में आरक्षित सीटों में से 17 इस बार भी खाली रह गईं। क्योंकि इन सीटों के लिए जिन उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था, जांच में कमियां पाए जाने के कारण उनके पर्चे निरस्त कर दिए गए थे।
चूंकि इस जिले में गोंड जाति के लोगों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में प्रमाण पत्र जारी होता है, जबकि देवरिया, महराजगंज सहित अन्य जनपदों और बिहार में अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में जाति प्रमाण पत्र जारी होता है। पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद गोंड जाति के ज्यादातर लोग असमंजस में रहे कि वे किस श्रेणी से नामांकन पत्र दाखिल करें।
जनपद में अनुसूचित जाति से जाति प्रमाण पत्र जारी होता रहा है, जबकि सर्वे के बाद गोंड जाति की आबादी को देखते हुए 40 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गई थीं। ऐसी दशा में अनुसूचित जनजाति की ज्यादातर सीटें रिक्त रह गईं। अनुसूचित जनजाति की सीटों से जीतने वाली ज्यादातर महिला उम्मीदवार रहीं, जिन्होंने अपने मायके के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव में दावेदारी की थी।
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जनपद की 19 ग्राम पंचायतें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आरक्षित होने और वहां से उम्मीदवार न होने की वजह से वहां मतदान नहीं हुआ था। पिछले चुनाव में सीटें रिक्त रह गई थीं। ब्लॉक प्रमुख का चुनाव संपन्न होने के बाद रिक्त पदों के लिए पुन: अधिसूचना जारी हुई और नामांकन पत्र दाखिल हुआ था, जिसमें 17 सीटों के लिए नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिए गए थे।
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केवल विशुनपुरा के कुकुरहा और सुकरौली ब्लॉक के चिलुआ के लिए दाखिल दो-दो उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाए गए थे। इसी तरह सेवरही ब्लॉक के खैरटिया के तीन वार्डों, हाटा के मिश्र ढाढ़ा सहित दो वार्डों, सुकरौली के बगरा देऊर और फाजिलनगर के मधुरिया, भटवा एवं भड़सरवा के लिए दाखिल दो-दो प्रत्याशियों के नामांकन पत्र ही सही पाए गए थे। दो गांवों के प्रधान पद के दो-दो प्रत्यशियों और ग्राम पंचायत सदस्यों के 12 वार्ड के दो-दो उम्मीदवारों सहित कुल 28 लोग चुनाव मैदान में थे।
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इन गांवों और वार्डों के उम्मीदवारों के लिए मतदान रविवार को प्रात: सात बजे आरओ और एआरओ की मौजूदगी में शुरू हुआ। शाम पांच बजे तक मतदान की प्रक्रिया जारी रही। विशुनपुरा ब्लॉक के कुकुरहा गांव में प्रधान पद के चुनाव में मतदान के दौरान शाम को थोड़ी देर के लिए शोरशराबे का माहौल बन गया।
एक पक्ष का आरोप था कि पडरौना के तहसीलदार ने दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर विदेश में बसे व्यक्ति को भी मत डालने की अनुमति दी। नाराज पक्ष ने मतदान केंद्र से कुछ दूर प्रशासन विरोधी नारे लगाए और प्रदर्शन किया। हालांकि तहसीलदार ने आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। मतदान शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत चुनाव श्याम नारायण प्रसाद ने बताया कि सेवरही ब्लॉक के खैरटिया के वार्ड नंबर-दो, पांच और नौ में 65 प्रतिशत, हाटा ब्लॉक के मिश्र ढाढ़ा के वार्ड नंबर-दो और नौ में 60 प्रतिशत, सुकरौली ब्लॉक के बगरा देऊर के वार्ड नंबर-आठ में 58 प्रतिशत, सुकरौली के ही चिलुआ में प्रधान पद के लिए हुए मतदान में 62.7 प्रतिशत, विशुनपुरा के कुकुरहां गांव में प्रधान पद के लिए 70 प्रतिशत मतदान हुआ।
जबकि फाजिलनगर ब्लॉक के मधुरिया गांव के वार्ड नंबर-आठ, भटवा के वार्ड नंबर-चार और भड़सरवा के वार्ड नंबर पांच, छह, आठ और 11 में 63.2 प्रतिशत वोट पड़े। इस तरह दोनों गांवों और सभी 12 वार्डों को मिलाकर कुल 65.3 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्हाेंने बताया कि सभी मतपेटियां संबंधित ब्लॉकों के स्ट्रांगरूम में कड़ी सुरक्षा के बीच जमा करा दी गईं। इनकी गिनती 23 तारीख को प्रात: आठ बजे से होगी।
सत्रह ग्राम पंचायतें इस बार भी रह गईं खाली
पडरौना। ग्राम प्रधानों के लिए अनुसूचित जनजाति की श्रेेणी में आरक्षित सीटों में से 17 इस बार भी खाली रह गईं। क्योंकि इन सीटों के लिए जिन उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था, जांच में कमियां पाए जाने के कारण उनके पर्चे निरस्त कर दिए गए थे।
चूंकि इस जिले में गोंड जाति के लोगों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में प्रमाण पत्र जारी होता है, जबकि देवरिया, महराजगंज सहित अन्य जनपदों और बिहार में अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में जाति प्रमाण पत्र जारी होता है। पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद गोंड जाति के ज्यादातर लोग असमंजस में रहे कि वे किस श्रेणी से नामांकन पत्र दाखिल करें।
जनपद में अनुसूचित जाति से जाति प्रमाण पत्र जारी होता रहा है, जबकि सर्वे के बाद गोंड जाति की आबादी को देखते हुए 40 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गई थीं। ऐसी दशा में अनुसूचित जनजाति की ज्यादातर सीटें रिक्त रह गईं। अनुसूचित जनजाति की सीटों से जीतने वाली ज्यादातर महिला उम्मीदवार रहीं, जिन्होंने अपने मायके के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव में दावेदारी की थी।