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प्राइवेट अस्पतालों में केवल आपातकालीन सेवाओं का हुआ संचालन
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कलेक्ट्रेट में डीएम को मांग पत्र सौंपने के बाद बाहर आते आईएमए से जुडे चिकित्सक।
- फोटो : KUSHINAGAR
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प्राइवेट अस्पतालों में केवल आपातकालीन सेवाओं का हुआ संचालन
आयुर्वेदिक डॉक्टरों को भी ऑपरेशन की अनुमति से नाराज हैं एलोपैथी चिकित्सक
डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखा, आपातकालीन मरीजों का किया उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। आयुर्वेद के डॉक्टरों को भी ऑपरेशन की अनुमति मिलने से नाराज आईएमए (इंडियन मेडिकल कौंसिल) से संबंधित डॉक्टरों ने विरोध स्वरूप शुक्रवार को ओपीडी बंद रखा। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन मरीजों का उपचार किया गया। इससे मरीजों को असुविधा तो हुई लेकिन इमरजेंसी चालू होने से शुगर, ब्लड प्रेशर व अन्य गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों को थोड़ी राहत रही।
आईएमए के जनरल सेक्रेटरी डॉ. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि देश में 95 प्रतिशत मरीज आधुनिक चिकित्सा पद्धति से अपना इलाज कराते हैं। सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना अलग महत्व है। सभी को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जाना चाहिए। परंतु मिक्सोपैथी (सभी चिकित्सा पद्धति को मिलाकर) ठीक नहीं है। आईएमए इसके सख्त खिलाफ है। क्योंकि इस मिलीजुली पद्धति से इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसलिए आईएमए सरकार से यह मांग करती है कि मिक्सोपैथी को किसी भी दशा में लागू न किया जाए और अपनी इसी मांग को लेकर शुक्रवार को आईएमए से संबंधित डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
संगठन के आह्वान पर शुक्रवार को आईएमए से जुड़े डॉ. केएन सिंह, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. वीके सिंह, डॉ. केपी गौड़, डॉ. सिद्धार्थ पांडेय, डॉ. यशा मिश्रा, डॉ. संदीप अरुण, डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. देवशरण सिंह, डॉ. पीएन राय, डॉ. अभिषेक शुक्ला, डॉ. पवन यादव, डॉ. रिषभ सिंह, डॉ. एमके जायसवाल समेत कई अन्य प्राइवेट चिकित्सकों के अस्पताल में ओपीडी में मरीज नहीं देखे गए। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं ही संचालित हुईं।
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शिवपुर के नितिन विश्वकर्मा पेट संबंधी दिक्कत का इलाज कराने आए थे लेकिन किसी प्राइवेट अस्पताल में ओपीडी नहीं चल रहा था। इसके चलते लौटना पड़ा। जटहां बाजार निवासी सुमंत शर्मा को कई दिन से पैर में दर्द की शिकायत थी लेकिन हड्डी के डॉक्टर ने ओपीडी में मरीज नहीं देखा। लिहाजा, अगले दिन का नंबर लगवाकर लौट गए। मटिहनिया के विमलेश यादव अपने बुजुर्ग पिता को इलाज के लिए लेकर आए थे लेकिन कहीं ओपीडी नहीं चल रही थी। जगदीशपुरम कॉलोनी के सोनू कुरैशी बेटी को लेकर बच्चों के डॉक्टर के यहां गए थे लेकिन वहां भी ओपीडी बंद थी। आईएमए के कुशीनगर इकाई के प्रेसिडेंट डॉ. केएन सिंह ने कहा कि मिक्सोपैथी के विरोध में शुक्रवार को संगठन से जुड़े सभी चिकित्सकों ने ओपीडी बंद रखा। केवल आपातकालीन सेवाएं संचालित की गईं। इसके अलावा प्रधानमंत्री व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को ऑनलाइन मांगपत्र भेजकर किसी भी दशा में मिक्सोपैथी को लागू नहीं करने की मांग की गई।
आयुष चिकित्सकों ने किया निशुल्क इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीराज। केंद्र सरकार की ओर से आयुष चिकित्सकों को कुछ मामलों में ऑपरेशन की अनुमति देने पर कस्बे के आयुष चिकित्सकों ने खुशी जाहिर करते हुए बिल के समर्थन में शुक्रवार को निशुल्क इलाज किया।
शुक्रवार को कस्बे के आयुष चिकित्सकों की बैठक हुई। इस दौरान डॉ. मुन्ना गुप्ता ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है। विश्व में सबसे पहले सफल ऑपरेशन करने का प्रमाण भारतीय चिकित्सा पद्धति के इतिहास में ही मिलता है। वर्तमान सरकार ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को पुन: प्रतिस्थापित करने के लिए जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है। मरीजों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए निशुल्क इलाज का निर्णय लिया गया। इस दौरान डॉ. अतिउल्लाह, डॉ. जेपी गुप्ता, डॉ. संजय कुमार मिश्र, डॉ. विजय पटेल, डॉ. एनपी यादव आदि मौजूद रहे।
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आयुर्वेदिक डॉक्टरों को भी ऑपरेशन की अनुमति से नाराज हैं एलोपैथी चिकित्सक
डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखा, आपातकालीन मरीजों का किया उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। आयुर्वेद के डॉक्टरों को भी ऑपरेशन की अनुमति मिलने से नाराज आईएमए (इंडियन मेडिकल कौंसिल) से संबंधित डॉक्टरों ने विरोध स्वरूप शुक्रवार को ओपीडी बंद रखा। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन मरीजों का उपचार किया गया। इससे मरीजों को असुविधा तो हुई लेकिन इमरजेंसी चालू होने से शुगर, ब्लड प्रेशर व अन्य गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों को थोड़ी राहत रही।
आईएमए के जनरल सेक्रेटरी डॉ. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि देश में 95 प्रतिशत मरीज आधुनिक चिकित्सा पद्धति से अपना इलाज कराते हैं। सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना अलग महत्व है। सभी को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जाना चाहिए। परंतु मिक्सोपैथी (सभी चिकित्सा पद्धति को मिलाकर) ठीक नहीं है। आईएमए इसके सख्त खिलाफ है। क्योंकि इस मिलीजुली पद्धति से इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसलिए आईएमए सरकार से यह मांग करती है कि मिक्सोपैथी को किसी भी दशा में लागू न किया जाए और अपनी इसी मांग को लेकर शुक्रवार को आईएमए से संबंधित डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
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संगठन के आह्वान पर शुक्रवार को आईएमए से जुड़े डॉ. केएन सिंह, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. वीके सिंह, डॉ. केपी गौड़, डॉ. सिद्धार्थ पांडेय, डॉ. यशा मिश्रा, डॉ. संदीप अरुण, डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. देवशरण सिंह, डॉ. पीएन राय, डॉ. अभिषेक शुक्ला, डॉ. पवन यादव, डॉ. रिषभ सिंह, डॉ. एमके जायसवाल समेत कई अन्य प्राइवेट चिकित्सकों के अस्पताल में ओपीडी में मरीज नहीं देखे गए। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं ही संचालित हुईं।
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शिवपुर के नितिन विश्वकर्मा पेट संबंधी दिक्कत का इलाज कराने आए थे लेकिन किसी प्राइवेट अस्पताल में ओपीडी नहीं चल रहा था। इसके चलते लौटना पड़ा। जटहां बाजार निवासी सुमंत शर्मा को कई दिन से पैर में दर्द की शिकायत थी लेकिन हड्डी के डॉक्टर ने ओपीडी में मरीज नहीं देखा। लिहाजा, अगले दिन का नंबर लगवाकर लौट गए। मटिहनिया के विमलेश यादव अपने बुजुर्ग पिता को इलाज के लिए लेकर आए थे लेकिन कहीं ओपीडी नहीं चल रही थी। जगदीशपुरम कॉलोनी के सोनू कुरैशी बेटी को लेकर बच्चों के डॉक्टर के यहां गए थे लेकिन वहां भी ओपीडी बंद थी। आईएमए के कुशीनगर इकाई के प्रेसिडेंट डॉ. केएन सिंह ने कहा कि मिक्सोपैथी के विरोध में शुक्रवार को संगठन से जुड़े सभी चिकित्सकों ने ओपीडी बंद रखा। केवल आपातकालीन सेवाएं संचालित की गईं। इसके अलावा प्रधानमंत्री व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को ऑनलाइन मांगपत्र भेजकर किसी भी दशा में मिक्सोपैथी को लागू नहीं करने की मांग की गई।
आयुष चिकित्सकों ने किया निशुल्क इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीराज। केंद्र सरकार की ओर से आयुष चिकित्सकों को कुछ मामलों में ऑपरेशन की अनुमति देने पर कस्बे के आयुष चिकित्सकों ने खुशी जाहिर करते हुए बिल के समर्थन में शुक्रवार को निशुल्क इलाज किया।
शुक्रवार को कस्बे के आयुष चिकित्सकों की बैठक हुई। इस दौरान डॉ. मुन्ना गुप्ता ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है। विश्व में सबसे पहले सफल ऑपरेशन करने का प्रमाण भारतीय चिकित्सा पद्धति के इतिहास में ही मिलता है। वर्तमान सरकार ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को पुन: प्रतिस्थापित करने के लिए जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है। मरीजों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए निशुल्क इलाज का निर्णय लिया गया। इस दौरान डॉ. अतिउल्लाह, डॉ. जेपी गुप्ता, डॉ. संजय कुमार मिश्र, डॉ. विजय पटेल, डॉ. एनपी यादव आदि मौजूद रहे।