{"_id":"6920c59645f968f63e0c4ad5","slug":"illegal-transport-recovery-names-of-arto-and-gst-mobile-squad-drivers-surface-creating-panic-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-149371-2025-11-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध परिवहन वसूली : एआरटीओ और जीएसटी सचल दल के चालकों का सामने आया नाम, हड़कंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध परिवहन वसूली : एआरटीओ और जीएसटी सचल दल के चालकों का सामने आया नाम, हड़कंप
Sat, 22 Nov 2025 01:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:33 AM IST
विज्ञापन
कुशीनगर। हाईवे पर अवैध परिवहन के वसूली के खेल में एआरटीओ और जीएसटी सचल दल के चालकों का नाम सामने आया है। पुलिस अब कार्रवाई में जुट गई है। वसूली का केंद्र हाईवे के किनारे मुजहना हेतिमपुर में संचालित सेठी ढाबा रहा। अफसरों की छापेमारी में ढाबे से मिली डायरी और संचालक के मोबाइल नंबरों की जांच के बाद पुलिस को यह प्रमाण मिला। विवेचना में दोनों विभाग के चालकों का नाम पुलिस ने शामिल किया है। इन्हें पुलिस अब जल्द गिरफ्तार कर सकती है।
इसके पहले ढाबा संचालक समेत तीन आरोपियों को पुलिस जेल भिजवा चुकी है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, दोनों विभाग के लोगों की संलिप्तता के प्रमाण भी मिल रहे हैं। इसको लेकर जिम्मेदारों की बेचैनी बढ़ गई है। जांच में पता चला कि दो सौ बसों का हाईवे से प्रतिदिन आना-जाना होता है। हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिम टोल प्लाजा के पास संचालित सेठी ढाबा से लग्जरी बसों और ओवरलोड ट्रकों को चालान का भय दिखाकर वसूली होती थी। हाईवे पर सक्रिय गैंग का संचालन ढाबा मालिक सुनील कुमार सिंह करता था।
राज्यकर विभाग के सचल दस्ते के प्रभारी की तहरीर पर पुलिस ने ढाबा संचालक, अज्ञात कर्मी और कुछ अन्य लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। ढाबा संचालक अवैध परिवहन करने वालों को राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की लोकेशन की जानकारी देता था। इससे टैक्स चोरी करने वाले वाहन आसानी से निकल जाते थे। हाईवे पर अफसरों की सक्रियता के बाद भी लंबी दूरी की लग्जरी बसे और ओवरलोड ट्रक बेखौफ आवागमन भरते हैं। हाईवे पर लगातार लग्जरी बसों से हादसा होने के बाद डीएम महेंद्र सिंह तंवर और एसपी केशव कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया।
विज्ञापन
सेठी ढाबा संचालक सुनील कुमार सिंह से हाटा कोतवाली के पुलिसकर्मियों ने बस मालिक बनकर बात की और हाईवे पर सक्रिय इस गिरोह के बारे में जानकारी ली। इसके बाद ढाबा पर छापेमारी कर संचालक को गिरफ्तार कर लिया। ढाबा में रखी एक डायरी मिली, इसमें कई खास लोगों के नाम और परिवहन विभाग का नाम दर्ज था। विवेचना में एआरटीओ विभाग और जीएसटी के सचल दल टीम के चालक और एआरटीओ कार्यालय के एक चालक का नाम सामने आया है।
सेठी ढाबा संचालक से प्रतिदिन 30 से अधिक बार बात हुई है। इसके अलावा पुलिस को ढाबा संचालक के मोबाइल से 55 संदिग्ध नंबर मिले थे, इसमें कई ऑडियो रिकार्डिंग हैं। जिसमें गोरखपुर के एक नाम को शामिल पुलिस करेगी। सहायक आयुक्त राज्य कर अंबरीश कुमार सिंह की तहरीर पर हाटा कोतवाली में सेठी ढाबा के मालिक सुनील कुमार सिंह और अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज है। इसमें ढाबा मालिक समेत तीन आरोपियों को पुलिस जेल भिजवा चुकी है।
सूत्रों की मानें तो विवेचना में दोनों विभाग के जिम्मेदारों के शामिल होने का प्रमाण पुलिस के हाथ लगे हैं। इस पर पुलिस काम कर रही है। गोरखपुर, दिल्ली, बिहार के बस नंबरों का नाम ऑडियो रिकार्डिंग में लिया जा रहा है। तय रकम वसूली होने का भी जिक्र किया जा रहा है।
एसपी केशव कुमार ने कहा कि परिवहन विभाग के चालक और जीएसटी के एक चालक का नाम विवेचना में सामने आया है। इनकी जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। इसके अलावा साक्ष्य के आधार पर विवेचना में कई लोगों का नाम अभी सामने आ सकता है।
-- -- -- -- -- -
वसूली का केंद्र था सेठी ढाबा
हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिम टोल प्लाजा के पास सेठी ढाबा संचालित है। बताया जा रहा है कि इस ढाबे की आड़ में अवैध रूप से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की एंट्री कराई जाती थी। इन वाहनों से राज्य कर विभाग की कार्रवाई से बचाने के लिए उन्हें सचल दल की लोकेशन की जानकारी दी जाती थी। इस खेल के बदले ढाबा मालिक हर माह मोटी रकम वसूलता था। सूत्रों के अनुसार यह अवैध गतिविधि लंबे समय से संचालित रही। सूत्रों की मानें तो मेरठ का रहने वाला सेठी ढाबा का संचालक सुनील इसके पहले सहजनवा में ढाबा संचालित करता था। इसके बाद क्यों कुशीनगर को चुना, इसकी भी जांच पुलिस कर रही है।
अफसरों के मूवमेंट की लीक करते थे सूचनाएं
राज्य कर विभाग की टीम ने प्राथमिक जांच के दौरान पाया कि सेठी ढाबा पर अवैध रूप से ट्रक चालकों और टैक्स चोरी करने वाले परिवहनकर्ताओं का जमावड़ा रहता था। यहां से उन्हें राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की मूवमेंट की सूचना मिलती थी। बताया गया कि जैसे ही सचल दस्ता किसी इलाके में चेकिंग के लिए निकलता था, वैसे ही ढाबा से जुड़े लोग यह सूचना अवैध परिवहन करने वालों तक पहुंचा देते थे। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा था, लेकिन मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी खुद को फंसते देख आनन-फानन में प्राथमिकी दर्ज कराया।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आरोपियों से पूछताछ में मिले अहम क्लू
पुलिस का कहना है कि मामले में नामजद आरोपियों को पुलिस जेल भेजने से पहले पूछताछ की। इसमें पूरे खेल की सच्चाई ढाबा संचालक और इसके सहयोगियों ने पुलिस को बता दिया। इसमें जीएसटी सचल दल और परिवहन विभाग के कई कर्मचारियों का नाम भी बताया है। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी है। दोनों चालकों का नाम सामने आने के बाद विभागीय कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ गई है।
विज्ञापन
इसके पहले ढाबा संचालक समेत तीन आरोपियों को पुलिस जेल भिजवा चुकी है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, दोनों विभाग के लोगों की संलिप्तता के प्रमाण भी मिल रहे हैं। इसको लेकर जिम्मेदारों की बेचैनी बढ़ गई है। जांच में पता चला कि दो सौ बसों का हाईवे से प्रतिदिन आना-जाना होता है। हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिम टोल प्लाजा के पास संचालित सेठी ढाबा से लग्जरी बसों और ओवरलोड ट्रकों को चालान का भय दिखाकर वसूली होती थी। हाईवे पर सक्रिय गैंग का संचालन ढाबा मालिक सुनील कुमार सिंह करता था।
विज्ञापन
राज्यकर विभाग के सचल दस्ते के प्रभारी की तहरीर पर पुलिस ने ढाबा संचालक, अज्ञात कर्मी और कुछ अन्य लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। ढाबा संचालक अवैध परिवहन करने वालों को राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की लोकेशन की जानकारी देता था। इससे टैक्स चोरी करने वाले वाहन आसानी से निकल जाते थे। हाईवे पर अफसरों की सक्रियता के बाद भी लंबी दूरी की लग्जरी बसे और ओवरलोड ट्रक बेखौफ आवागमन भरते हैं। हाईवे पर लगातार लग्जरी बसों से हादसा होने के बाद डीएम महेंद्र सिंह तंवर और एसपी केशव कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया।
विज्ञापन
सेठी ढाबा संचालक सुनील कुमार सिंह से हाटा कोतवाली के पुलिसकर्मियों ने बस मालिक बनकर बात की और हाईवे पर सक्रिय इस गिरोह के बारे में जानकारी ली। इसके बाद ढाबा पर छापेमारी कर संचालक को गिरफ्तार कर लिया। ढाबा में रखी एक डायरी मिली, इसमें कई खास लोगों के नाम और परिवहन विभाग का नाम दर्ज था। विवेचना में एआरटीओ विभाग और जीएसटी के सचल दल टीम के चालक और एआरटीओ कार्यालय के एक चालक का नाम सामने आया है।
सेठी ढाबा संचालक से प्रतिदिन 30 से अधिक बार बात हुई है। इसके अलावा पुलिस को ढाबा संचालक के मोबाइल से 55 संदिग्ध नंबर मिले थे, इसमें कई ऑडियो रिकार्डिंग हैं। जिसमें गोरखपुर के एक नाम को शामिल पुलिस करेगी। सहायक आयुक्त राज्य कर अंबरीश कुमार सिंह की तहरीर पर हाटा कोतवाली में सेठी ढाबा के मालिक सुनील कुमार सिंह और अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज है। इसमें ढाबा मालिक समेत तीन आरोपियों को पुलिस जेल भिजवा चुकी है।
सूत्रों की मानें तो विवेचना में दोनों विभाग के जिम्मेदारों के शामिल होने का प्रमाण पुलिस के हाथ लगे हैं। इस पर पुलिस काम कर रही है। गोरखपुर, दिल्ली, बिहार के बस नंबरों का नाम ऑडियो रिकार्डिंग में लिया जा रहा है। तय रकम वसूली होने का भी जिक्र किया जा रहा है।
एसपी केशव कुमार ने कहा कि परिवहन विभाग के चालक और जीएसटी के एक चालक का नाम विवेचना में सामने आया है। इनकी जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। इसके अलावा साक्ष्य के आधार पर विवेचना में कई लोगों का नाम अभी सामने आ सकता है।
वसूली का केंद्र था सेठी ढाबा
हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिम टोल प्लाजा के पास सेठी ढाबा संचालित है। बताया जा रहा है कि इस ढाबे की आड़ में अवैध रूप से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की एंट्री कराई जाती थी। इन वाहनों से राज्य कर विभाग की कार्रवाई से बचाने के लिए उन्हें सचल दल की लोकेशन की जानकारी दी जाती थी। इस खेल के बदले ढाबा मालिक हर माह मोटी रकम वसूलता था। सूत्रों के अनुसार यह अवैध गतिविधि लंबे समय से संचालित रही। सूत्रों की मानें तो मेरठ का रहने वाला सेठी ढाबा का संचालक सुनील इसके पहले सहजनवा में ढाबा संचालित करता था। इसके बाद क्यों कुशीनगर को चुना, इसकी भी जांच पुलिस कर रही है।
अफसरों के मूवमेंट की लीक करते थे सूचनाएं
राज्य कर विभाग की टीम ने प्राथमिक जांच के दौरान पाया कि सेठी ढाबा पर अवैध रूप से ट्रक चालकों और टैक्स चोरी करने वाले परिवहनकर्ताओं का जमावड़ा रहता था। यहां से उन्हें राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की मूवमेंट की सूचना मिलती थी। बताया गया कि जैसे ही सचल दस्ता किसी इलाके में चेकिंग के लिए निकलता था, वैसे ही ढाबा से जुड़े लोग यह सूचना अवैध परिवहन करने वालों तक पहुंचा देते थे। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा था, लेकिन मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी खुद को फंसते देख आनन-फानन में प्राथमिकी दर्ज कराया।
आरोपियों से पूछताछ में मिले अहम क्लू
पुलिस का कहना है कि मामले में नामजद आरोपियों को पुलिस जेल भेजने से पहले पूछताछ की। इसमें पूरे खेल की सच्चाई ढाबा संचालक और इसके सहयोगियों ने पुलिस को बता दिया। इसमें जीएसटी सचल दल और परिवहन विभाग के कई कर्मचारियों का नाम भी बताया है। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी है। दोनों चालकों का नाम सामने आने के बाद विभागीय कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ गई है।