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Kushinagar News: समय रहते नहीं चेते जिम्मेदार तो नारायणी का वेग नहीं झेल पाएंगे बांध

Sat, 30 May 2026 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 30 May 2026 01:52 AM IST
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If the responsible people do not wake up in time, the dam will not be able to withstand the speed of Narayani.
तमकुहीरोड। तमकुहीराज क्षेत्र के नरवाजोत से अहिरौलीदान और एपी बंधे पर इस साल तीन परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, लेकिन बाढ़ से बचाव का कार्य काफी सुस्त है। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद तटवर्ती गांव वालों की चिंता बढ़ गई है। पहले बंधे पर रेनकट तो बने ही थे इस बारिश में इसकी संख्या और बढ़ गई है। नोनियापट्टी और कचहरी टोला बंधे के कई हिस्से अब भी जर्जर हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया तो नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को बंधे नहीं झेल पाएंगे और तटवर्ती गांव वालों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
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सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक लगभग साढ़े सत्रह किमी लंबी गंडक नदी बहती है। वर्ष 2007 में नदी का बांध घघवा जगदीश गांव के पास टूट चुका है और बंधे के किनारे बसी बड़ी आबादी बाढ़ की विभीषिका झेल चुकी है। यही नही, गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद होने वाले कटान से पिपराघाट का गोवर्धन टोला, फल टोला और नान्हु टोला तो अहिरौली दान का बैरिया टोला, कंचन टोला, एकरी टोला का वजूद खत्म हो चुका है। कचहरी टोला, खैरखुटा और नोनियापट्टी का आधा से अधिक हिस्सा कटान की भेंट चढ़ चुका है।
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तटवर्ती गांव के मथुरा सिंह, प्रभुनाथ यादव, ओमप्रकाश निषाद, दीनानाथ सिंह, बृजकिशोर साहनी का कहना है कि वर्ष 2021 से कई परियोजनाओं पर काम हुआ, लेकिन बाढ़ की समस्या से निजात नहीं मिल सका। इस वर्ष 32.71 करोड़ की लागत से तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है, जबकि 15 जून तक इसे पूरा होने का समय तय किया गया है। शुक्रवार को सुबह हुई बारिश के बाद बंधे पर एक हजार से अधिक रेनकट बन गए है, जबकि पुराने रेनकट को अब तक ठीक नहीं किया जा सका है। समय रहते जिम्मेदार बाढ़ से बचाव कार्य को पूरा नहीं करते हैं और नदी में पानी आने के बाद आधी अधूरी तैयारियों के बीच परियोजनाओं को कागज में पूरा दिखाकर इतिश्री कर लेते हैं। अरबों रुपये बाढ़ से बचाव पर खर्च के बाद कचहरी टोला व नोनियापट्टी सहित बांध के कई हिस्से आज भी सुरक्षित नही है। अगर समय रहते इन संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नही किए गए तो नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बंधे के साथ किनारे बसे गांवों में तबाही मच सकती है।
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-परियोजना के कार्यों को पूरा कराया जा रहा है। साथ ही बंधे के सभी संवेदनशील स्थानों की निगरानी भी की जा रही है। सभी संवेदनशील स्थानों को भी सुरक्षित किया जाएगा। इसके लिए योजना बनाई गई है। बीच में काम की गति सुस्त होने के कारण अब तक परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। -दीपरतन सिंह, एसडीओ बाढ़ खंड
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