{"_id":"62a62ca0b0953e4f1a39bc9c","slug":"hut-down-and-suresh-life-end-kushinagar-news-gkp440110266","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्महत्या के बाद जागा प्रशासन, अब दे रहा जमीन का पट्टा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आत्महत्या के बाद जागा प्रशासन, अब दे रहा जमीन का पट्टा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झोपड़ी उजड़ते ही बिखर गई सुरेश की जिंदगी
दुदही (कुशीनगर )। नौकरशाही का कमाल देखिए। जीते जी सुरेश अपनी जमीन और रुपये के लिए दौड़ता रहा। आत्महत्या की धमकी के बाद भी पुलिस ने उसकी बात अनसुनी कर दी। लिहाजा झोपड़ी उजड़ जाने के साथ ही सुरेश की जिंदगी भी उजड़ गई। उसके आत्महत्या करने के बाद प्रशासन उसे जमीन पर पट्टा दे रहा है।
पीड़ित सुरेश (45) पुत्र धुरी भगवानपुर का निवासी था। वर्ष 1998 में नारायणी नदी की कटान में उसका घर नदी में विलीन हो गया। बाढ़ में घर बहने पर उसने बांसगांव खलवा टोला में करीब एक डिस्मिल जमीन में फूस का आवास बना लिया। वहां परिवार के साथ रहकर वह ठेला चलाता था। गरीब होने के बावजूद उसे सरकारी आवास और शौचालय की सुविधा नहीं मिल सकी। वह अपने पांच बच्चों जिनमें चार बेटियां निशा (16), मुन्नी (11), प्रीति (8), आरती (6) और गुलाब (2) वर्ष सहित परिवार का पालन कर रहा था। उसने जब घर बनवाया तो आसपास रास्ते की जगह नहीं बची। इससे परेशान होकर उसने सुभाष से 75 हजार रुपये में जमीन खरीदी। उसकी झोपड़ी बन गई तो गांव के ही मोतीलाल ने अपनी जमीन कह झोपड़ी उजाड़ दी। इस मामले में शिकायत पर पुलिस ने कोई मदद नहीं की।
आत्महत्या की धमकी पर गंभीर नहीं हुई पुलिस
सुरेश ने इसकी शिकायत थाना पर की। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब वह सुभाष से जमीन के बदले दिए गए रुपये वापस मांगने लगा तो सुभाष पैसे लौटाने से मना करने लगा। परेशान हाल सुरेश छह माह तक दौड़ता रहा। उसने थाने पर इसकी भी शिकायत की। लेकिन पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी। रविवार को थाना पर दोनों पक्षों को बुलाया गया। रुपये न मिलने पर सुरेश ने पुलिस के सामने ही आत्महत्या की धमकी दी। फिर न्याय न मिलने की बात कहते हुए घर चला गया। उसकी धमकी को भी पुलिस ने हल्के में ले लिया।
विज्ञापन
फंदे से झूला सुरेश तो अफसर पहुंचे घर
घर पहुंचते ही सुरेश ने पत्नी की साड़ी का फंदा बनाया। लोग कुछ समझ पाते इसके पहले वह झूल गया। मामले की जानकारी होने पर पुलिस हरकत में आई। सुरेश के पिता धुरी से तहरीर लेकर सुभाष और मोतीलाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई में जुट गई। सुरेश की मौत की जानकारी पाकर एसडीएम, कानूनगो एवं लेखपाल पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने पट्टे की जमीन और आवास देने का आश्वासन उसकी पत्नी और बच्चों को दिया। इस बात की चर्चा रही कि जीते जी सुरेश को न तो कोई सरकारी सहायता मिली। न ही कोई सुविधा। बल्कि पैसे लेने वालों ने भी उसका उत्पीड़न ही किया।
विज्ञापन
दुदही (कुशीनगर )। नौकरशाही का कमाल देखिए। जीते जी सुरेश अपनी जमीन और रुपये के लिए दौड़ता रहा। आत्महत्या की धमकी के बाद भी पुलिस ने उसकी बात अनसुनी कर दी। लिहाजा झोपड़ी उजड़ जाने के साथ ही सुरेश की जिंदगी भी उजड़ गई। उसके आत्महत्या करने के बाद प्रशासन उसे जमीन पर पट्टा दे रहा है।
पीड़ित सुरेश (45) पुत्र धुरी भगवानपुर का निवासी था। वर्ष 1998 में नारायणी नदी की कटान में उसका घर नदी में विलीन हो गया। बाढ़ में घर बहने पर उसने बांसगांव खलवा टोला में करीब एक डिस्मिल जमीन में फूस का आवास बना लिया। वहां परिवार के साथ रहकर वह ठेला चलाता था। गरीब होने के बावजूद उसे सरकारी आवास और शौचालय की सुविधा नहीं मिल सकी। वह अपने पांच बच्चों जिनमें चार बेटियां निशा (16), मुन्नी (11), प्रीति (8), आरती (6) और गुलाब (2) वर्ष सहित परिवार का पालन कर रहा था। उसने जब घर बनवाया तो आसपास रास्ते की जगह नहीं बची। इससे परेशान होकर उसने सुभाष से 75 हजार रुपये में जमीन खरीदी। उसकी झोपड़ी बन गई तो गांव के ही मोतीलाल ने अपनी जमीन कह झोपड़ी उजाड़ दी। इस मामले में शिकायत पर पुलिस ने कोई मदद नहीं की।
विज्ञापन
आत्महत्या की धमकी पर गंभीर नहीं हुई पुलिस
सुरेश ने इसकी शिकायत थाना पर की। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब वह सुभाष से जमीन के बदले दिए गए रुपये वापस मांगने लगा तो सुभाष पैसे लौटाने से मना करने लगा। परेशान हाल सुरेश छह माह तक दौड़ता रहा। उसने थाने पर इसकी भी शिकायत की। लेकिन पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी। रविवार को थाना पर दोनों पक्षों को बुलाया गया। रुपये न मिलने पर सुरेश ने पुलिस के सामने ही आत्महत्या की धमकी दी। फिर न्याय न मिलने की बात कहते हुए घर चला गया। उसकी धमकी को भी पुलिस ने हल्के में ले लिया।
विज्ञापन
फंदे से झूला सुरेश तो अफसर पहुंचे घर
घर पहुंचते ही सुरेश ने पत्नी की साड़ी का फंदा बनाया। लोग कुछ समझ पाते इसके पहले वह झूल गया। मामले की जानकारी होने पर पुलिस हरकत में आई। सुरेश के पिता धुरी से तहरीर लेकर सुभाष और मोतीलाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई में जुट गई। सुरेश की मौत की जानकारी पाकर एसडीएम, कानूनगो एवं लेखपाल पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने पट्टे की जमीन और आवास देने का आश्वासन उसकी पत्नी और बच्चों को दिया। इस बात की चर्चा रही कि जीते जी सुरेश को न तो कोई सरकारी सहायता मिली। न ही कोई सुविधा। बल्कि पैसे लेने वालों ने भी उसका उत्पीड़न ही किया।