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हत्या के मामले में पति को सात साल का कारावास
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हत्या के मामले में पति को सात साल का कारावास
सभी 12 गवाह मुकरे, डॉक्टर और चिकित्सकीय प्रमाणपत्र पर हुई सजा
कुशीनगर। कसया थानाक्षेत्र के गोपालगढ़ गांव के महोबा टोला में वर्ष 2017 में हुई एक विवाहिता की हत्या के मामले में न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। न्यायालय ने पति को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता उपेंद्र पाठक ने बताया कि कसया थानाक्षेत्र के प्रेमवलिया गांव के गोसाई टोला निवासी बलराम गुप्ता ने थाने में तहरीर दी थी कि उन्होंने बहन प्रेमकला की शादी वर्ष 2002 में इसी थानाक्षेत्र के गोपालगढ़ गांव के महोबा टोला निवासी नागेंद्र से की थी। बहन के दो बेटे आठ वर्षीय मनीष और पांच वर्षीय का पवन हैं। आरोप लगाया था बहन के साथ सास-ससुर व उनके बेटे मारपीट करते थे। कमरे में बंद कर भोजन भी नहीं देते थे। तीन नवंबर 2017 की भोर में ससुराल के लोगों ने उनकी बहन की गला दबाकर हत्या कर दी थी। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के बाद सास लीलावती देवी, ससुर हरिशंकर और पति नागेंद्र के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर तीन में चल रही थी। शुक्रवार को इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु के समक्ष 12 गवाह प्रस्तुत हुए। सभी गवाह अपनी बात से मुकर गए। केवल चिकित्सकीय प्रमाणपत्र और डॉक्टर की गवाही के आधार पर न्यायालय ने मृतका के पति नागेंद्र को दोषी मानते हुए हत्या के प्रयास में सात साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। उसके बाद पति को जेल भेज दिया गया।
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सभी 12 गवाह मुकरे, डॉक्टर और चिकित्सकीय प्रमाणपत्र पर हुई सजा
कुशीनगर। कसया थानाक्षेत्र के गोपालगढ़ गांव के महोबा टोला में वर्ष 2017 में हुई एक विवाहिता की हत्या के मामले में न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। न्यायालय ने पति को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता उपेंद्र पाठक ने बताया कि कसया थानाक्षेत्र के प्रेमवलिया गांव के गोसाई टोला निवासी बलराम गुप्ता ने थाने में तहरीर दी थी कि उन्होंने बहन प्रेमकला की शादी वर्ष 2002 में इसी थानाक्षेत्र के गोपालगढ़ गांव के महोबा टोला निवासी नागेंद्र से की थी। बहन के दो बेटे आठ वर्षीय मनीष और पांच वर्षीय का पवन हैं। आरोप लगाया था बहन के साथ सास-ससुर व उनके बेटे मारपीट करते थे। कमरे में बंद कर भोजन भी नहीं देते थे। तीन नवंबर 2017 की भोर में ससुराल के लोगों ने उनकी बहन की गला दबाकर हत्या कर दी थी। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के बाद सास लीलावती देवी, ससुर हरिशंकर और पति नागेंद्र के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर तीन में चल रही थी। शुक्रवार को इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु के समक्ष 12 गवाह प्रस्तुत हुए। सभी गवाह अपनी बात से मुकर गए। केवल चिकित्सकीय प्रमाणपत्र और डॉक्टर की गवाही के आधार पर न्यायालय ने मृतका के पति नागेंद्र को दोषी मानते हुए हत्या के प्रयास में सात साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। उसके बाद पति को जेल भेज दिया गया।
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