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Kushinagar News: एयरपोर्ट की जमीन से हटे मकान और पेड़, आईएलएस के इंस्टॉलेशन में आएगी तेजी
Wed, 03 Sep 2025 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 03 Sep 2025 01:16 AM IST
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एयरपोर्ट पर लगाए जा रहे आईएलएस उपकरण। स्रोत- सोशल मीडिया
कसया। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर में लगने वाले आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) में बाधा बन रहे मकान, टावर और पेड़ों को हटाए जाने के बाद अब इस काम में तेजी आएगी। आईएलएस में लगने वाले पार्ट को रूस से मंगाया गया है। इसमें लोकलाइजर का इंस्टॉलेशन हो गया था, लेकिन ग्लाइड पथ के इंस्टाल करने में दो मकान रोड़ा बन रहे थे। अब इन सभी अवरोधों को जिला प्रशासन की मदद से दूर कर लिया गया है। अधूरे कार्य को पूरा करने के बाद कम दृश्यता में भी विमान लैंड कर सकेंगे। यहां से उड़ान भरने को लेकर विमानन कंपनियों का रुझान बढ़ेगा और पर्यटन व्यवसाय को भी गति मिलेगी।
एयरपोर्ट को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए वर्ष 2020 में आईएलएस और आईएफआर लगाने के लिए 30.14 एकड़ भूमि किसानों से अतिरिक्त ली गई थी। उसके बाद एयरपोर्ट पर डीवीओआर और आईएलएस सिस्टम लगाने का कार्य शुरू हुआ। डीवीओआर का इंस्टॉलेशन तो गया, लेकिन वहीं आईएलएस सिस्टम के इंस्टाल में बाधा बन रहे कुछ पेड़ों को हटाया गया। करीब 13 मोबाइल फोन टावर की ऊंचाई कम की गई। इसके साथ ही भलुही मदारी पट्टी में दो मकानों की ऊंचाई बाधा बन रही थी। जिसे प्रशासन की ओर से दूर कर लिया गया है।
अब एयरपोर्ट की बाउंड्रीवाल पूरी करने के बाद आईएलएस का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जिसमें करीब तीन माह का समय लगेगा। विमानों को सुरक्षित उड़ान भरने के लिए आईएलएस और आईएफआर का होना बहुत जरूरी है, जिससे कि कम दृश्यता में भी विमान सुरक्षित लैंड हो सकें। एयरपोर्ट पर आईएलएस 4.504 करोड़ की लागत से लगाए जाने ले लिए रूस से मशीन लाकर रखा गया था। आईएलएस में दो पार्ट होते हैं, जिसमें एक लोकलाइजर का वर्क पूरा कर लिया गया है। वहीं दूसरा ग्लाइड पथ के इंस्टॉलेशन में भलुही में बने मकान बाधा बन रहे थे। जिसके वजह से इसके लगाने का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा था। उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद अवैध कब्जाधारियों को हटाने के साथ ही मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई का आदेश दिया गया। जिसे प्रशासन ने अनुपालन कराते हुए आठ मकानों को ध्वस्त करा दिया।
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अब एयरपोर्ट अथॉरिटी के सामने किसी प्रकार की बाधा नहीं है। आईएलएस के निर्माण कार्य में गति आएगी। इसमें लगने वाले इंस्ट्रूमेंट रूस से लाकर रखे गए थे। आईएलएस और आईएफआर नहीं होने की वजह से विमानन कंपनियां यहां से उड़ान भरने को लेकर रुचि नहीं ले रहीं थीं, लेकिन अब दोनों के हो जाने से सुरक्षित उड़ान किसी भी मौसम में आसानी से हो सकेगी। विमानन को एयरपोर्ट की ओर से यहां से उड़ान को लेकर प्रोत्साहन योजना का भी लाभ देने के लिए प्रयास किया जा रहा था।
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एयरपोर्ट को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए वर्ष 2020 में आईएलएस और आईएफआर लगाने के लिए 30.14 एकड़ भूमि किसानों से अतिरिक्त ली गई थी। उसके बाद एयरपोर्ट पर डीवीओआर और आईएलएस सिस्टम लगाने का कार्य शुरू हुआ। डीवीओआर का इंस्टॉलेशन तो गया, लेकिन वहीं आईएलएस सिस्टम के इंस्टाल में बाधा बन रहे कुछ पेड़ों को हटाया गया। करीब 13 मोबाइल फोन टावर की ऊंचाई कम की गई। इसके साथ ही भलुही मदारी पट्टी में दो मकानों की ऊंचाई बाधा बन रही थी। जिसे प्रशासन की ओर से दूर कर लिया गया है।
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अब एयरपोर्ट की बाउंड्रीवाल पूरी करने के बाद आईएलएस का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जिसमें करीब तीन माह का समय लगेगा। विमानों को सुरक्षित उड़ान भरने के लिए आईएलएस और आईएफआर का होना बहुत जरूरी है, जिससे कि कम दृश्यता में भी विमान सुरक्षित लैंड हो सकें। एयरपोर्ट पर आईएलएस 4.504 करोड़ की लागत से लगाए जाने ले लिए रूस से मशीन लाकर रखा गया था। आईएलएस में दो पार्ट होते हैं, जिसमें एक लोकलाइजर का वर्क पूरा कर लिया गया है। वहीं दूसरा ग्लाइड पथ के इंस्टॉलेशन में भलुही में बने मकान बाधा बन रहे थे। जिसके वजह से इसके लगाने का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा था। उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद अवैध कब्जाधारियों को हटाने के साथ ही मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई का आदेश दिया गया। जिसे प्रशासन ने अनुपालन कराते हुए आठ मकानों को ध्वस्त करा दिया।
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अब एयरपोर्ट अथॉरिटी के सामने किसी प्रकार की बाधा नहीं है। आईएलएस के निर्माण कार्य में गति आएगी। इसमें लगने वाले इंस्ट्रूमेंट रूस से लाकर रखे गए थे। आईएलएस और आईएफआर नहीं होने की वजह से विमानन कंपनियां यहां से उड़ान भरने को लेकर रुचि नहीं ले रहीं थीं, लेकिन अब दोनों के हो जाने से सुरक्षित उड़ान किसी भी मौसम में आसानी से हो सकेगी। विमानन को एयरपोर्ट की ओर से यहां से उड़ान को लेकर प्रोत्साहन योजना का भी लाभ देने के लिए प्रयास किया जा रहा था।