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Kushinagar News: बिना रजिस्ट्रेशन का चल रहा अस्पताल सील
Sun, 20 Jul 2025 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 20 Jul 2025 12:38 AM IST
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सिया हॉस्पिटल को सील करातीं तहसीलदार जया सिंह। स्रोत-सोशल मीडिया
हाटा। नगर के देवरिया रोड पर स्थित मकान के बेसमेंट में संचालित हो रहा बगैर पंजीकरण का अस्पताल शनिवार को सील कर दिया गया। अवैध अस्पतालों के संबंध में अमर उजाला ने शनिवार को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।
सीएचसी हाटा की टीम उक्त अस्पताल की जांच करने पहुंची तो अस्पताल संचालक पंजीकरण से संबंधित कोई वैध कागजात नहीं दिखा सका। अस्पताल में कोई डॉक्टर, स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट भी मौजूद नहीं था, जबकि दो गर्भवती महिलाओं को आपरेशन कर उन्हें बेसमेंट में लगे बेड पर लिटाया गया था। जांच के बाद टीम ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी और तहसीलदार हाटा जया सिंह की मौजूदगी में मरीजों को एंबुलेंस बुलाकर सरकारी अस्पताल में भेज कर अस्पताल को सील कर दिया गया। शनिवार को दोपहर बाद हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अमित गुप्ता शहर में संचालित हो रहे अस्पतालों की जांच करने अपनी टीम के साथ निकले।
टीम करीब चार बजे हाटा-देवरिया मार्ग पर स्थित सिया हाॅस्पिटल पर पहुुंची। टीम जब अस्पताल में दाखिल हुई तो देखा कि मकान के बेसमेंट में आठ बेड लगाए गए थे। उनमें से तीन बेड पर मरीज लेटे हुए है। पूछने पर पता चला कि एक महिला के बच्चेदानी का ऑपेरशन दो दिनों पहले हुआ है।
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उसने अपना नाम सोनकेशा देवी निवासी रामपुर पैटवा बताया, जबकि भर्ती हुई दूसरी मरीज अमारी झांगा की रहने वाली शलिकला थी और दो दिनों पहले उनका आपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था। उनके परिजनों से पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी गांव की आशा कार्यकर्ता उन्हें ऑपरेशन के लिए इस अस्पताल पर लाई थी।
टीम ने जब अस्पताल के संचालक से अस्पताल के पंजीकरण का कागजात मांगा तो उन लोगों ने बताया कि अभी पंजीकरण नहीं हुआ है आवेदन किया गया है। टीम यह देख कर दंग रह गई कि अस्पताल में डॉक्टर की बात तो छोड़िए स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट तक मौजूद नहीं थे, जबकि यहां ऑपरेशन तक किया जा रहा था। टीम ने पूरे अस्पताल की वीडियोग्राफी कर मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
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सीएचसी हाटा की टीम उक्त अस्पताल की जांच करने पहुंची तो अस्पताल संचालक पंजीकरण से संबंधित कोई वैध कागजात नहीं दिखा सका। अस्पताल में कोई डॉक्टर, स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट भी मौजूद नहीं था, जबकि दो गर्भवती महिलाओं को आपरेशन कर उन्हें बेसमेंट में लगे बेड पर लिटाया गया था। जांच के बाद टीम ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी और तहसीलदार हाटा जया सिंह की मौजूदगी में मरीजों को एंबुलेंस बुलाकर सरकारी अस्पताल में भेज कर अस्पताल को सील कर दिया गया। शनिवार को दोपहर बाद हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अमित गुप्ता शहर में संचालित हो रहे अस्पतालों की जांच करने अपनी टीम के साथ निकले।
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टीम करीब चार बजे हाटा-देवरिया मार्ग पर स्थित सिया हाॅस्पिटल पर पहुुंची। टीम जब अस्पताल में दाखिल हुई तो देखा कि मकान के बेसमेंट में आठ बेड लगाए गए थे। उनमें से तीन बेड पर मरीज लेटे हुए है। पूछने पर पता चला कि एक महिला के बच्चेदानी का ऑपेरशन दो दिनों पहले हुआ है।
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उसने अपना नाम सोनकेशा देवी निवासी रामपुर पैटवा बताया, जबकि भर्ती हुई दूसरी मरीज अमारी झांगा की रहने वाली शलिकला थी और दो दिनों पहले उनका आपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था। उनके परिजनों से पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी गांव की आशा कार्यकर्ता उन्हें ऑपरेशन के लिए इस अस्पताल पर लाई थी।
टीम ने जब अस्पताल के संचालक से अस्पताल के पंजीकरण का कागजात मांगा तो उन लोगों ने बताया कि अभी पंजीकरण नहीं हुआ है आवेदन किया गया है। टीम यह देख कर दंग रह गई कि अस्पताल में डॉक्टर की बात तो छोड़िए स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट तक मौजूद नहीं थे, जबकि यहां ऑपरेशन तक किया जा रहा था। टीम ने पूरे अस्पताल की वीडियोग्राफी कर मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।