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Kushinagar News: दुदही में स्वास्थ्य विभाग का छापा, दो अस्पताल सील
Mon, 16 Dec 2024 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 16 Dec 2024 11:58 PM IST
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दुदही। कार्रवाई के बाद अवैध तरीके से संचालित कर रहे दो निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को सील कर दिया। इससे दुदही कस्बे में संचालित अवैध अस्पताल और पैथालॉजी संचालक अपना शटर बंद कर फरार हो गए। पूरे दिन टीम दुदही कस्बे में जमी रही।
सूत्रों की मानें तो आशा कार्यकर्ताओं के मिलीभगत से सीएचसी लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों के इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण करने का जाल फैला है। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद हरकत में आए अफसरों ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई किया।
दुदही के बैकुंठपुर कोठी बाजार में अक्तूबर माह में अवैध तरीके से एक बंगाली अस्पताल का संचालन कर रहा था। शिकायत पर पहुंचे डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कर दिया। इसके अलावा गौरीश्रीराम में भी एक अवैध अस्पताल को सील किया गया था। कुछ दिन बाद अस्पताल का सील खोलकर संचालक संचालन करने लगे। अमर उजाला ने 14 दिसंबर के अंक में शिकायत पर सील, फिर संचालित होने लगा अस्पताल, शीर्षक से खबर प्रकाशित की। डीएम विशाल भारद्वाज ने खबर का संज्ञान लेते हुए सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया को कार्रवाई के निर्देश दिए।
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इसके बाद हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम डिप्टी सीएमओ डॉ. अवधेश कुशवाहा के नेतृत्व में दुदही कस्बे में सोमवार को दोपहर में पहुंची। बैकुठपुर के बंगाली डॉक्टर की ओर से संचालित क्लीनिक को सील कर दिया और यहां से 100 मीटर की दूरी पर बिना बोर्ड लगाए संचालित हो रहे एक निजी अस्पताल को सील किया। इसकी भनक लगते ही बाकी अवैध अस्पताल और जांच केंद्र बंद कर संचालक फरार हो गए। इसके बाद टीम सीएचसी पहुंची। शाम तक किसी भी अवैध अस्पताल या जांच केंद्रों का ताला नहीं खुला था। हालांकि, टीम गौरीश्रीराम नहीं पहुंच पाई क्यों कि गौरीश्रीराम में बंगाली डॉक्टर की ओर से संचालित अस्पताल में वर्ष 2016 में बतरौली धुरखड़वा के मरीज राजेन्द्र गुप्ता की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले की जांच में अस्पताल अवैध मिला था और उसी समय सील किया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद सील खोलकर उसमें सामान निकालकर वहां से करीब 100 मीटर दूसरे नाम से अस्पताल का संचालन कर रहा है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. अवधेश कुशवाहा ने बताया कि दो अस्पतालों को सील किया गया है। इनके पास कोई डिग्री जांच में नहीं मिली। इनको अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया है।
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सूत्रों की मानें तो आशा कार्यकर्ताओं के मिलीभगत से सीएचसी लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों के इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण करने का जाल फैला है। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद हरकत में आए अफसरों ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई किया।
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दुदही के बैकुंठपुर कोठी बाजार में अक्तूबर माह में अवैध तरीके से एक बंगाली अस्पताल का संचालन कर रहा था। शिकायत पर पहुंचे डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कर दिया। इसके अलावा गौरीश्रीराम में भी एक अवैध अस्पताल को सील किया गया था। कुछ दिन बाद अस्पताल का सील खोलकर संचालक संचालन करने लगे। अमर उजाला ने 14 दिसंबर के अंक में शिकायत पर सील, फिर संचालित होने लगा अस्पताल, शीर्षक से खबर प्रकाशित की। डीएम विशाल भारद्वाज ने खबर का संज्ञान लेते हुए सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया को कार्रवाई के निर्देश दिए।
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इसके बाद हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम डिप्टी सीएमओ डॉ. अवधेश कुशवाहा के नेतृत्व में दुदही कस्बे में सोमवार को दोपहर में पहुंची। बैकुठपुर के बंगाली डॉक्टर की ओर से संचालित क्लीनिक को सील कर दिया और यहां से 100 मीटर की दूरी पर बिना बोर्ड लगाए संचालित हो रहे एक निजी अस्पताल को सील किया। इसकी भनक लगते ही बाकी अवैध अस्पताल और जांच केंद्र बंद कर संचालक फरार हो गए। इसके बाद टीम सीएचसी पहुंची। शाम तक किसी भी अवैध अस्पताल या जांच केंद्रों का ताला नहीं खुला था। हालांकि, टीम गौरीश्रीराम नहीं पहुंच पाई क्यों कि गौरीश्रीराम में बंगाली डॉक्टर की ओर से संचालित अस्पताल में वर्ष 2016 में बतरौली धुरखड़वा के मरीज राजेन्द्र गुप्ता की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले की जांच में अस्पताल अवैध मिला था और उसी समय सील किया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद सील खोलकर उसमें सामान निकालकर वहां से करीब 100 मीटर दूसरे नाम से अस्पताल का संचालन कर रहा है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. अवधेश कुशवाहा ने बताया कि दो अस्पतालों को सील किया गया है। इनके पास कोई डिग्री जांच में नहीं मिली। इनको अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया है।