{"_id":"5f00b87e8ebc3e4337591576","slug":"guru-purnima-will-be-celebrate-with-social-distancing-kushinagar-news-gkp3569816162","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरु पूर्णिमा पर आरएसएस करेगा ऑनलाइन ध्वज पूजा, सोशल डिस्टेंसिंग का होगा पालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरु पूर्णिमा पर आरएसएस करेगा ऑनलाइन ध्वज पूजा, सोशल डिस्टेंसिंग का होगा पालन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरु पूर्णिमा पर आरएसएस करेगा ऑनलाइन ध्वज पूजा, सोशल डिस्टेंसिंग का होगा पालन
पडरौना। गुरु पूर्णिमा पर इस बार आरएसएस के आयोजन में न तो स्वयंसेवकों की भीड़ होगी और न ही शोभा यात्रा निकलेगी। तय स्थान पर सीमित संख्या में स्वयंसेवक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ध्वज पूजा करेंगे। जिले के अन्य स्वयंसेवक ऑनलाइन ध्वज पूजा करेंगे। इसी तरह अन्य स्थानों पर भी भीड़ नहीं जुटेगी।
जरार निवासी शास्त्री रवींद्रनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु के प्रति आदर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त कर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। भारतीय संस्कृति में गुरु को देव तुल्य माना गया है। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है। इस दिन गुरु बृहस्पति की भी पूजा होती है। उन्होंने बताया कि इस साल यह पर्व पांच जुलाई को मनाया जाएगा। जिस किसी के अपने गुरु या कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं, वे अपने शिक्षक आदि को वंदन कर उपहार भेंटकर आशीर्वाद लेते हैं। इसके अलावा वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रचलन करने वाले महर्षि वेदव्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को करीब तीन हजार ईसा पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर वर्ष गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। भगवान शिव पहले गुरु माने जाते हैं। मान्यता है कि शिव ने ही धरती पर सबसे पहले सभ्यता और धर्म का प्रचार-प्रसार किया था। इसीलिए उन्हें आदिदेव और आदि गुरु भी कहा जाता है। शिव को आदिनाथ भी कहा जाता है। कोरोना महामारी की वजह से शिक्षण संस्थानों में गुरु पूर्णिमा नहीं मनाई जाएगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से भी गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इसदिन किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि आरएसएस के ध्वज को गुरु मानकर पूजा की जाती है। आरएसएस के जिला कार्यवाह फूलबदन बताते हैं कि संगठन की तरफ से ध्वज को ही गुरु माना गया है। इस दिन सभी स्वयंसेवकों की ओर से प्रार्थना की जाती है। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार गुरु पूर्णिमा पर भीड़ नहीं जुटाई जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नगरीय क्षेत्र में ध्वज की पूजा की जाएगी तथा उसके बाद उद्बोधन होगा। न्याय पंचायत स्तर पर स्वयंसेवक इसे ऑनलाइन देखकर ध्वज पूजा करेंगे।
विज्ञापन
श्रीराम जानकी मठ में मनेगा गुरु पूर्णिमा का पर्व
कसया। श्रीराम जानकी मठ (मंदिर) में रविवार सुबह गुरु पूर्णिमा की तैयारी पूरी कर ली गई है।
मठ के पुजारी देवनारायण शरण दास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर सुबह सात से नौ बजे तक विविध आयोजन होंगे। शुभारंभ मंदिर के गर्भगृह में राम दरबार व ठाकुर जी की आरती से होगा। महंत त्रिभुवन शरण दास गुरुजनों का चित्र लगाकर पूजा अर्चना करेंगे। मठ पर मौजूद नगर के श्रद्धालुओं की ओर से महंत त्रिभुवन शरण दास की पूजा की जाएगी। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ होगा।
विज्ञापन
पडरौना। गुरु पूर्णिमा पर इस बार आरएसएस के आयोजन में न तो स्वयंसेवकों की भीड़ होगी और न ही शोभा यात्रा निकलेगी। तय स्थान पर सीमित संख्या में स्वयंसेवक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ध्वज पूजा करेंगे। जिले के अन्य स्वयंसेवक ऑनलाइन ध्वज पूजा करेंगे। इसी तरह अन्य स्थानों पर भी भीड़ नहीं जुटेगी।
जरार निवासी शास्त्री रवींद्रनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु के प्रति आदर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त कर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। भारतीय संस्कृति में गुरु को देव तुल्य माना गया है। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है। इस दिन गुरु बृहस्पति की भी पूजा होती है। उन्होंने बताया कि इस साल यह पर्व पांच जुलाई को मनाया जाएगा। जिस किसी के अपने गुरु या कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं, वे अपने शिक्षक आदि को वंदन कर उपहार भेंटकर आशीर्वाद लेते हैं। इसके अलावा वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रचलन करने वाले महर्षि वेदव्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को करीब तीन हजार ईसा पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर वर्ष गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। भगवान शिव पहले गुरु माने जाते हैं। मान्यता है कि शिव ने ही धरती पर सबसे पहले सभ्यता और धर्म का प्रचार-प्रसार किया था। इसीलिए उन्हें आदिदेव और आदि गुरु भी कहा जाता है। शिव को आदिनाथ भी कहा जाता है। कोरोना महामारी की वजह से शिक्षण संस्थानों में गुरु पूर्णिमा नहीं मनाई जाएगी।
विज्ञापन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से भी गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इसदिन किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि आरएसएस के ध्वज को गुरु मानकर पूजा की जाती है। आरएसएस के जिला कार्यवाह फूलबदन बताते हैं कि संगठन की तरफ से ध्वज को ही गुरु माना गया है। इस दिन सभी स्वयंसेवकों की ओर से प्रार्थना की जाती है। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार गुरु पूर्णिमा पर भीड़ नहीं जुटाई जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नगरीय क्षेत्र में ध्वज की पूजा की जाएगी तथा उसके बाद उद्बोधन होगा। न्याय पंचायत स्तर पर स्वयंसेवक इसे ऑनलाइन देखकर ध्वज पूजा करेंगे।
विज्ञापन
श्रीराम जानकी मठ में मनेगा गुरु पूर्णिमा का पर्व
कसया। श्रीराम जानकी मठ (मंदिर) में रविवार सुबह गुरु पूर्णिमा की तैयारी पूरी कर ली गई है।
मठ के पुजारी देवनारायण शरण दास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर सुबह सात से नौ बजे तक विविध आयोजन होंगे। शुभारंभ मंदिर के गर्भगृह में राम दरबार व ठाकुर जी की आरती से होगा। महंत त्रिभुवन शरण दास गुरुजनों का चित्र लगाकर पूजा अर्चना करेंगे। मठ पर मौजूद नगर के श्रद्धालुओं की ओर से महंत त्रिभुवन शरण दास की पूजा की जाएगी। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ होगा।