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Kushinagar News: बढ़ने लगा गंडक का जलस्तर, बांसी नदी भी उफनाने को बेताब
Thu, 06 Jul 2023 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 06 Jul 2023 12:17 AM IST
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महदेवा गांव के पास बह रही गंडक।संवाद
बुधवार को गंडक नदी का जलस्तर 1.29 लाख क्यूसेक रहा
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में भी बढ़ा है गंडक नदी का जलस्तर
गोलाघाट-जोगनी मार्ग पर कटान का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। गंडक नदी का जलस्तर मंगलवार से फिर बढ़ता जा रहा है। हालांकि, इसकी गति अभी धीमी है। फिर भी गंडक नदी चेतावनी के निशान को पार कर गई है। बुधवार को सुबह डिस्चार्ज 1.29 लाख क्यूसेक रिकाॅर्ड किया गया। इससे गंडक के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। इससे निकली बांसी नदी में भी पानी बढ़ने लगा है, जिससे तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में गोलाघाट-जाेगनी मार्ग पर कटान का खतरा बढ़ गया है।
गंडक नदी चेतावनी बिंदु से 22 सेंटीमीटर ऊपर
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। वाल्मीकि गंडक बैराज से बुधवार को नदी में एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया। इससे जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर गया। नदी चेतावनी के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। हालांकि, पूर्व के वर्षों में गंडक के निशाने पर आने वाले महदेवा गांव के पास नदी की धारा धीमी व परिवर्तित होने से स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
बुधवार की सुबह छह बजे गंडक नदी का डिस्चार्ज 1,26,000 क्यूसेक था। सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक 1,16,500 क्यूसेक दर्ज किया गया। डिस्चार्ज के सापेक्ष खड्डा क्षेत्र के भैसहां गेज स्थल पर सुबह आठ बजे चेतावनी बिंदु से 22 सेंटीमीटर ऊपर 95.22 मीटर था। दोपहर 12 बजे छह सेंटीमीटर की कमी आई और 95.16 मीटर था। शाम चार बजे नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 18 सेंटीमीटर ऊपर 95.18 मीटर था।
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नदी का बहाव धीमा व धारा परिवर्तन से स्थिति में सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। क्षेत्र के महदेवा के पास नदी का बहाव धीमा व धारा परिवर्तित होने से दस दिनों से इस गांव की तरफ कटान नहीं हुई। इससे इस गांव के आस स्थिति सामान्य बनी हुई है।
पिछले चार वर्ष से महदेवा गांव गंडक के निशाने पर बना रहा है। पिछले वर्ष नदी के एकदम करीब होने के चलते 22 परिवारों को विस्थापित करने की घोषणा तहसील प्रशासन ने की थी। हालांकि, इस पर अब तक अमल नहीं हो सका है। बांध की जगह परक्युपाइन लगाकर कटान रोकने का प्रयास दो वर्ष से चल रहा है। इस वर्ष भी यही उपाय किए गए हैं। लगभग दस दिन से नदी की धारा कटान वाली जगह से दूसरी ओर मुड़ गई है। बहाव भी धीमा हो गया है। इस वजह से कोई कटान नहीं हुई है।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा, पूर्व प्रधान जितेंद्र एवं रमायन गुप्ता, भीमबली आदि ने बताया है कि फिलहाल दस दिन से कोई कटान नहीं हुई है। धारा भी बदलने से सिल्ट जमा हो रही है। दस दिन से राहत है।
गंडक नदी में छोड़े गए पानी से बांसी नदी का बढ़ा जलस्तर संपर्क मार्ग पर खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में हो रहे पानी के डिस्चार्ज के चलते अब बांसी नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। इससे गोलाघाट-जोगनी संपर्क मार्ग पर भी खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि बांसी नदी संपर्क मार्ग से चार पांच मीटर की दूरी पर आ गई है। इस क्षेत्र के लोगो का कहना है कि यदि समय रहते नदी को मार्ग के पास आने से नही रोका गया तो संपर्क मार्ग को खतरा हो सकता है।
गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज लगातार बढ़ने से अब बांसी नदी भी उफान पर आने लगी है। इससे गोलाघाट से जोगनी जाने वाले संपर्क मार्ग पर खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि जो नदी पिछले साल संपर्क मार्ग से 25-30 मीटर की दूरी पर बहती थी, वह अब मार्ग से चार पांच मीटर की दूरी पर आकर बहने लगी है। इससे इस मार्ग से नियमित आवाजाही करने वाले राजपुर खास, गोलाघाट, इमिलिया टोला, बुटन टोला, प्रभुनाथ चौराहा, नौका टोला, जोगनी के लोगों को आशंका है कि बांसी नदी के दबाव से संपर्क मार्ग को कोई क्षति पहुंचती है तो बरसात में उनकी आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
कारण यह कि मार्ग हर साल आने वाली बाढ़ के पानी के चलते पहले से ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर जगह जगह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। नदी का दबाव झेलने की स्थिति में नहीं है। ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, क्षेत्र पंचायत सदस्य सरल शर्मा, यमुना सिंह, ध्रुव निषाद, पन्नालाल यादव, शिवजी रजक, संजय सिंह, विश्वनाथ चौधरी सहित अनेक लोगों ने प्रशासन से नदी को संपर्क मार्ग तक आने से रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध कराए जाने की मांग की है।
नरवाजोत और एपी बांध पर दबाव
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में लगातार बढ़ते व घटते जल स्तर से जहां नरवाजोत बांध से लगायत पूरे एपी बांध पर पानी का भारी दबाव बना हुआ है। वहीं, खतरे की आशंका को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने जवही दयाल और नरवाजोत में अधूरी परियोजना को पूरा कराने की कोशिश तेज कर दी है।
बुधवार को एसडीओ ने बचाव कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और कार्य की गति बढ़ाकर शीघ्र परियोजना के कार्यों को पूरा कराए जाने की हिदायत दी।
वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में पिछले दो दिनों से लगातार एक लाख से सवा लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जाने लगा है। यह डिस्चार्ज लगातार बढ़ सकता है। डिस्चार्ज बढ़ने के संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ रमेश कुमार ने जेई चंद्रप्रकाश, जेई सुनील कुमार यादव, जेई रमेशधर दुबे के साथ नरवाजोत में किमी 1.000 पर 3.30 करोड़ की लागत से चल रहे ठोकर पुनर्स्थापना व रिवेटमेंट के कार्यों का और जवही दयाल में किमी 3.300 पर 4.90 करोड़ की लागत से चल रहे ठोकर पुनर्स्थापना व रिवेटमेंट के कार्यों का जायजा लिया। कार्य प्रगति की समीक्षा की। साथ ही उन्होंने मौसम के रुख का हवाला देते हुए कार्य में तेजी लाकर शीघ्र अधूरी परियोजना को पूरा कराए जाने की भी हिदायत दी। दूसरी ओर मंगलवार को रात में वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए सवा लाख क्यूसेक से अधिक पानी का असर बुधवार से नरवाजोत बांध व एपी तटबंध पर दिखाई देने लगा है।
बुधवार को इन तटबंधों पर गंडक नदी के पानी का दबाव बना हुआ है। इससे तटबंध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, बिन टोली, जंगली पट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनिया पट्टी, कचहरी टोला, डीहटोला और अहिरौलीदान के लोग सहमे हुए हैं। क्योंकि इन लोगों को आशंका है कि यदि डिस्चार्ज में वृद्धि का सिलसिला जारी रहता है तो स्थिति बिगड़ने में देर नहीं लगेगी और इसका खामियाजा बांध के किनारे बसे गांवों को उठाना पड़ सकता है।
इस संबंध में एसडीओ रमेश यादव का कहना है कि परियोजना के कार्यों को पूरा कराए जाने के साथ तटबंध पर भी नजर रखी जा रही है और बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
एडीएम ने बाढ़खंड के अभियंताओं के साथ किया निरीक्षण, दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। एडीएम ने अधिकारियों व बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ बुधवार की शाम नरवाजोत बांध पर 2.45 करोड़ की लागत से निर्मित ठोकर पुनर्स्थापना व रिवेटमेंट कार्य की सघन माप कराकर उसकी जांच-पड़ताल की। बाढ़ के खतरे को देखते हुए अभियंताओं से पूरी तैयारी के साथ बांध पर चौकसी बरतने के निर्देश दिए।
एडीएम वैभव मिश्र बुधवार की शाम तमकुहीराज के एसडीएम विकास चंद्र व सिंचाई विभाग के अभियंता और बाढ़ खंड के एसडीओ रमेश यादव, जेई चंद्रप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव के साथ नरवाजोत बांध पर पहुंचे और वहां 2.45 करोड़ की लागत से निर्मित ठोकर पुनर्स्थापना और रिवेटमेंट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सबसे पहले रिवेटमेंट कार्यों की माप कराकर सघनता से जांच-पड़ताल की। उसके बाद टीम ठोकर पर पहुंची और वहां भी पूरी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने कार्य के बारे में अभियंताओं और ग्रामीणों से भी जानकारी ली। साथ ही एडीएम ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए और बांध की सुरक्षा को लेकर बाढ़ खंड के अभियंताओं से पूरी तैयारी के साथ बांध पर चौकस रहने के निर्देश दिए।
इस दौरान राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता, लेखपाल प्रमोद यादव, विनोद कुमार गौतम, पुजारी सिंह, कमलेश सिंह, प्रदीप सिंह, नखलाल सिंह, बैजनाथ सिंह, नगनारायन सिंह, उपेंद्र सिंह, अनिरुद्ध सिंह, रामनरेश सिंह सहित अनेंक लोग मौजूद थे।
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तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में भी बढ़ा है गंडक नदी का जलस्तर
गोलाघाट-जोगनी मार्ग पर कटान का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। गंडक नदी का जलस्तर मंगलवार से फिर बढ़ता जा रहा है। हालांकि, इसकी गति अभी धीमी है। फिर भी गंडक नदी चेतावनी के निशान को पार कर गई है। बुधवार को सुबह डिस्चार्ज 1.29 लाख क्यूसेक रिकाॅर्ड किया गया। इससे गंडक के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। इससे निकली बांसी नदी में भी पानी बढ़ने लगा है, जिससे तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में गोलाघाट-जाेगनी मार्ग पर कटान का खतरा बढ़ गया है।
गंडक नदी चेतावनी बिंदु से 22 सेंटीमीटर ऊपर
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। वाल्मीकि गंडक बैराज से बुधवार को नदी में एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया। इससे जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर गया। नदी चेतावनी के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। हालांकि, पूर्व के वर्षों में गंडक के निशाने पर आने वाले महदेवा गांव के पास नदी की धारा धीमी व परिवर्तित होने से स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
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बुधवार की सुबह छह बजे गंडक नदी का डिस्चार्ज 1,26,000 क्यूसेक था। सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक 1,16,500 क्यूसेक दर्ज किया गया। डिस्चार्ज के सापेक्ष खड्डा क्षेत्र के भैसहां गेज स्थल पर सुबह आठ बजे चेतावनी बिंदु से 22 सेंटीमीटर ऊपर 95.22 मीटर था। दोपहर 12 बजे छह सेंटीमीटर की कमी आई और 95.16 मीटर था। शाम चार बजे नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 18 सेंटीमीटर ऊपर 95.18 मीटर था।
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नदी का बहाव धीमा व धारा परिवर्तन से स्थिति में सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। क्षेत्र के महदेवा के पास नदी का बहाव धीमा व धारा परिवर्तित होने से दस दिनों से इस गांव की तरफ कटान नहीं हुई। इससे इस गांव के आस स्थिति सामान्य बनी हुई है।
पिछले चार वर्ष से महदेवा गांव गंडक के निशाने पर बना रहा है। पिछले वर्ष नदी के एकदम करीब होने के चलते 22 परिवारों को विस्थापित करने की घोषणा तहसील प्रशासन ने की थी। हालांकि, इस पर अब तक अमल नहीं हो सका है। बांध की जगह परक्युपाइन लगाकर कटान रोकने का प्रयास दो वर्ष से चल रहा है। इस वर्ष भी यही उपाय किए गए हैं। लगभग दस दिन से नदी की धारा कटान वाली जगह से दूसरी ओर मुड़ गई है। बहाव भी धीमा हो गया है। इस वजह से कोई कटान नहीं हुई है।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा, पूर्व प्रधान जितेंद्र एवं रमायन गुप्ता, भीमबली आदि ने बताया है कि फिलहाल दस दिन से कोई कटान नहीं हुई है। धारा भी बदलने से सिल्ट जमा हो रही है। दस दिन से राहत है।
गंडक नदी में छोड़े गए पानी से बांसी नदी का बढ़ा जलस्तर संपर्क मार्ग पर खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में हो रहे पानी के डिस्चार्ज के चलते अब बांसी नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। इससे गोलाघाट-जोगनी संपर्क मार्ग पर भी खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि बांसी नदी संपर्क मार्ग से चार पांच मीटर की दूरी पर आ गई है। इस क्षेत्र के लोगो का कहना है कि यदि समय रहते नदी को मार्ग के पास आने से नही रोका गया तो संपर्क मार्ग को खतरा हो सकता है।
गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज लगातार बढ़ने से अब बांसी नदी भी उफान पर आने लगी है। इससे गोलाघाट से जोगनी जाने वाले संपर्क मार्ग पर खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि जो नदी पिछले साल संपर्क मार्ग से 25-30 मीटर की दूरी पर बहती थी, वह अब मार्ग से चार पांच मीटर की दूरी पर आकर बहने लगी है। इससे इस मार्ग से नियमित आवाजाही करने वाले राजपुर खास, गोलाघाट, इमिलिया टोला, बुटन टोला, प्रभुनाथ चौराहा, नौका टोला, जोगनी के लोगों को आशंका है कि बांसी नदी के दबाव से संपर्क मार्ग को कोई क्षति पहुंचती है तो बरसात में उनकी आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
कारण यह कि मार्ग हर साल आने वाली बाढ़ के पानी के चलते पहले से ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर जगह जगह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। नदी का दबाव झेलने की स्थिति में नहीं है। ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, क्षेत्र पंचायत सदस्य सरल शर्मा, यमुना सिंह, ध्रुव निषाद, पन्नालाल यादव, शिवजी रजक, संजय सिंह, विश्वनाथ चौधरी सहित अनेक लोगों ने प्रशासन से नदी को संपर्क मार्ग तक आने से रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध कराए जाने की मांग की है।
नरवाजोत और एपी बांध पर दबाव
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में लगातार बढ़ते व घटते जल स्तर से जहां नरवाजोत बांध से लगायत पूरे एपी बांध पर पानी का भारी दबाव बना हुआ है। वहीं, खतरे की आशंका को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने जवही दयाल और नरवाजोत में अधूरी परियोजना को पूरा कराने की कोशिश तेज कर दी है।
बुधवार को एसडीओ ने बचाव कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और कार्य की गति बढ़ाकर शीघ्र परियोजना के कार्यों को पूरा कराए जाने की हिदायत दी।
वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में पिछले दो दिनों से लगातार एक लाख से सवा लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जाने लगा है। यह डिस्चार्ज लगातार बढ़ सकता है। डिस्चार्ज बढ़ने के संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ रमेश कुमार ने जेई चंद्रप्रकाश, जेई सुनील कुमार यादव, जेई रमेशधर दुबे के साथ नरवाजोत में किमी 1.000 पर 3.30 करोड़ की लागत से चल रहे ठोकर पुनर्स्थापना व रिवेटमेंट के कार्यों का और जवही दयाल में किमी 3.300 पर 4.90 करोड़ की लागत से चल रहे ठोकर पुनर्स्थापना व रिवेटमेंट के कार्यों का जायजा लिया। कार्य प्रगति की समीक्षा की। साथ ही उन्होंने मौसम के रुख का हवाला देते हुए कार्य में तेजी लाकर शीघ्र अधूरी परियोजना को पूरा कराए जाने की भी हिदायत दी। दूसरी ओर मंगलवार को रात में वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए सवा लाख क्यूसेक से अधिक पानी का असर बुधवार से नरवाजोत बांध व एपी तटबंध पर दिखाई देने लगा है।
बुधवार को इन तटबंधों पर गंडक नदी के पानी का दबाव बना हुआ है। इससे तटबंध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, बिन टोली, जंगली पट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनिया पट्टी, कचहरी टोला, डीहटोला और अहिरौलीदान के लोग सहमे हुए हैं। क्योंकि इन लोगों को आशंका है कि यदि डिस्चार्ज में वृद्धि का सिलसिला जारी रहता है तो स्थिति बिगड़ने में देर नहीं लगेगी और इसका खामियाजा बांध के किनारे बसे गांवों को उठाना पड़ सकता है।
इस संबंध में एसडीओ रमेश यादव का कहना है कि परियोजना के कार्यों को पूरा कराए जाने के साथ तटबंध पर भी नजर रखी जा रही है और बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
एडीएम ने बाढ़खंड के अभियंताओं के साथ किया निरीक्षण, दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। एडीएम ने अधिकारियों व बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ बुधवार की शाम नरवाजोत बांध पर 2.45 करोड़ की लागत से निर्मित ठोकर पुनर्स्थापना व रिवेटमेंट कार्य की सघन माप कराकर उसकी जांच-पड़ताल की। बाढ़ के खतरे को देखते हुए अभियंताओं से पूरी तैयारी के साथ बांध पर चौकसी बरतने के निर्देश दिए।
एडीएम वैभव मिश्र बुधवार की शाम तमकुहीराज के एसडीएम विकास चंद्र व सिंचाई विभाग के अभियंता और बाढ़ खंड के एसडीओ रमेश यादव, जेई चंद्रप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव के साथ नरवाजोत बांध पर पहुंचे और वहां 2.45 करोड़ की लागत से निर्मित ठोकर पुनर्स्थापना और रिवेटमेंट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सबसे पहले रिवेटमेंट कार्यों की माप कराकर सघनता से जांच-पड़ताल की। उसके बाद टीम ठोकर पर पहुंची और वहां भी पूरी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने कार्य के बारे में अभियंताओं और ग्रामीणों से भी जानकारी ली। साथ ही एडीएम ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए और बांध की सुरक्षा को लेकर बाढ़ खंड के अभियंताओं से पूरी तैयारी के साथ बांध पर चौकस रहने के निर्देश दिए।
इस दौरान राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता, लेखपाल प्रमोद यादव, विनोद कुमार गौतम, पुजारी सिंह, कमलेश सिंह, प्रदीप सिंह, नखलाल सिंह, बैजनाथ सिंह, नगनारायन सिंह, उपेंद्र सिंह, अनिरुद्ध सिंह, रामनरेश सिंह सहित अनेंक लोग मौजूद थे।