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नदी के डिस्चार्ज में उतार चढ़ाव
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गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी, बांधों पर खतरा
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। लगभग एक महीने से गंडक नदी के जलस्तर पर उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके चलते नदी के नरवाजोत और एपी बांध पर दबाव बना हुआ है। इसके आसपास बसे गांवों के लोग बांधों को क्षति पहुंचने की आशंका से चिंतित हैं।
गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते नरवाजोत बांध पर नदी के दबाव के चलते कटान का खतरा बना हुआ है। हालांकि इस बांध की सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने 40.85 करोड़ रुपये की लागत वाली चार परियोजनाओं की मंजूरी दी है। लेकिन इन परियोजनाओं का कार्य अभी भी अधूरा है और सभी बचाव कार्य बाढ़ के पानी में डूब जाने के कारण काम रुका हुआ है। जिन क्षेत्रों में बचाव कार्य नहीं हुआ है। वहां नदी के कटान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे बांध के किनारे बसे तवकल टोला, दहारी टोला, भंगी टोला, मोतीराय टोला और नरवाजोत गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि अगर नदी में कटान की स्थिति उत्पन्न होती है तो सबसे पहले इन्हीं पुरवों को निशाना बना सकती है और बाद में बूटन टोला, चौकी टोला, हनुमान टोला, शिव टोला, जोगनी, इमिलिया टोला, मुसहरी टोला सहित अन्य कई पुरवे भी इसकी जद में आ सकते हैं।
ग्रामीण पुजारी सिंह बताते हैं कि वर्ष 2016 में भी नदी इसी तरह उफान पर थी, लेकिन अचानक कटान शुरू हो जाने पर देखते ही देखते नदी ने कटान के चलते पूरी सड़क नदी की धारा में विलीन हो गई थी। कैलाश सिंह, पन्नालाल यादव, राजेंद्र सिंह, दूधनाथ शर्मा, ध्रुव निषाद, सकलदेव सिंह, विपिन यादव, सुरेंद्र सिंह ने नदी के रुख पर चिंता जताते हुए शीघ्र परियोजना के कार्यों को पूरा कराने और कटान वाले हिस्से में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराए जाने की मांग की है।
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बाढ़ खंड के जेई संजय कुमार मौर्य का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और पानी कम होने पर बचाव कार्य तेज कर दिया जाएगा। फिलहाल नरवाजोत बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। लगभग एक महीने से गंडक नदी के जलस्तर पर उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके चलते नदी के नरवाजोत और एपी बांध पर दबाव बना हुआ है। इसके आसपास बसे गांवों के लोग बांधों को क्षति पहुंचने की आशंका से चिंतित हैं।
गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते नरवाजोत बांध पर नदी के दबाव के चलते कटान का खतरा बना हुआ है। हालांकि इस बांध की सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने 40.85 करोड़ रुपये की लागत वाली चार परियोजनाओं की मंजूरी दी है। लेकिन इन परियोजनाओं का कार्य अभी भी अधूरा है और सभी बचाव कार्य बाढ़ के पानी में डूब जाने के कारण काम रुका हुआ है। जिन क्षेत्रों में बचाव कार्य नहीं हुआ है। वहां नदी के कटान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे बांध के किनारे बसे तवकल टोला, दहारी टोला, भंगी टोला, मोतीराय टोला और नरवाजोत गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि अगर नदी में कटान की स्थिति उत्पन्न होती है तो सबसे पहले इन्हीं पुरवों को निशाना बना सकती है और बाद में बूटन टोला, चौकी टोला, हनुमान टोला, शिव टोला, जोगनी, इमिलिया टोला, मुसहरी टोला सहित अन्य कई पुरवे भी इसकी जद में आ सकते हैं।
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ग्रामीण पुजारी सिंह बताते हैं कि वर्ष 2016 में भी नदी इसी तरह उफान पर थी, लेकिन अचानक कटान शुरू हो जाने पर देखते ही देखते नदी ने कटान के चलते पूरी सड़क नदी की धारा में विलीन हो गई थी। कैलाश सिंह, पन्नालाल यादव, राजेंद्र सिंह, दूधनाथ शर्मा, ध्रुव निषाद, सकलदेव सिंह, विपिन यादव, सुरेंद्र सिंह ने नदी के रुख पर चिंता जताते हुए शीघ्र परियोजना के कार्यों को पूरा कराने और कटान वाले हिस्से में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराए जाने की मांग की है।
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बाढ़ खंड के जेई संजय कुमार मौर्य का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और पानी कम होने पर बचाव कार्य तेज कर दिया जाएगा। फिलहाल नरवाजोत बांध पूरी तरह सुरक्षित है।