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Kushinagar News: गंडक नदी का डिस्चार्ज 40 हजार क्यूसेक से नीचे, बांधों पर खतरा टला
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तमकुहीरोड। सेवरही। गंडक नदी का डिस्चार्ज पिछले तीन-चार दिनों से लगातार घट रहा है। मंगलवार को नदी का डिस्चार्ज 40 हजार क्यूसेक से नीचे पहुंच गया। इससे नरवाजोत बांध और एपी बांध पर पानी के दबाव का खतरा टल गया है। नदी का बहाव अब संवेदनशील स्थानों से दूर होने लगा है। जलस्तर घटने से बांध के किनारे बसे लोगों ने भी राहत की सांस ली है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इसके किनारे करीब 40 हजार से अधिक की आबादी निवास करती है। इस वर्ष बाढ़ खंड सेवरही की ओर से एपी बांध की सुरक्षा के लिए 32.71 करोड़ रुपये की लागत से तीन परियोजनाओं का काम कराया गया था।
इसके बावजूद नदी का रुख अचानक बांध की तरफ होने से जवही दयाल में किमी 3.500 से किमी 4.320 के बीच कटान शुरू हो गया था। इससे 25 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बोई गई धान और गन्ने की फसल बर्बाद हो चुकी है। वहीं, एपी बांध के बघाचौर में किमी 10.518 और अहिरौलीदान में किमी 13.980 पर ठोकरों पर भी कटान का खतरा बढ़ गया था।
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स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं को दिन-रात बांध की निगरानी करनी पड़ रही थी। पिछले तीन-चार दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार कमी आने के कारण अब नदी बांध के सभी संवेदनशील स्थानों से दूर होने लगी है। इससे तटबंधों पर कटान का खतरा भी काफी कम हो गया है।
क्षेत्र के दीनानाथ सिंह, अशोक पटेल, रमेश यादव, कृष्णा निषाद और प्रदीप सिंह आदि ने बताया कि बरसात के चार महीने बांध के किनारे बसे लोगों के लिए जोखिम भरे होते हैं। अब नदी का जलस्तर कम होने से बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है।
बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीप रतन सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर सामान्य होने से तटबंधों पर खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, बांधों की सुरक्षा को लेकर निगरानी लगातार जारी है।
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सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इसके किनारे करीब 40 हजार से अधिक की आबादी निवास करती है। इस वर्ष बाढ़ खंड सेवरही की ओर से एपी बांध की सुरक्षा के लिए 32.71 करोड़ रुपये की लागत से तीन परियोजनाओं का काम कराया गया था।
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इसके बावजूद नदी का रुख अचानक बांध की तरफ होने से जवही दयाल में किमी 3.500 से किमी 4.320 के बीच कटान शुरू हो गया था। इससे 25 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बोई गई धान और गन्ने की फसल बर्बाद हो चुकी है। वहीं, एपी बांध के बघाचौर में किमी 10.518 और अहिरौलीदान में किमी 13.980 पर ठोकरों पर भी कटान का खतरा बढ़ गया था।
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स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं को दिन-रात बांध की निगरानी करनी पड़ रही थी। पिछले तीन-चार दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार कमी आने के कारण अब नदी बांध के सभी संवेदनशील स्थानों से दूर होने लगी है। इससे तटबंधों पर कटान का खतरा भी काफी कम हो गया है।
क्षेत्र के दीनानाथ सिंह, अशोक पटेल, रमेश यादव, कृष्णा निषाद और प्रदीप सिंह आदि ने बताया कि बरसात के चार महीने बांध के किनारे बसे लोगों के लिए जोखिम भरे होते हैं। अब नदी का जलस्तर कम होने से बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है।
बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीप रतन सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर सामान्य होने से तटबंधों पर खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, बांधों की सुरक्षा को लेकर निगरानी लगातार जारी है।