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Kushinagar News: गंडक का डिस्चार्ज घटा, तटबंधों पर दबाव बरकरार
Sat, 18 Jul 2026 02:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 18 Jul 2026 02:22 AM IST
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पिपराघाट मे बांध से सट कर बहती गंडक नदी।संवाद
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज शुक्रवार को घटकर करीब एक लाख क्यूसेक पर आ गया लेकिन तटबंधों पर दबाव अब भी बना हुआ है। बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं के सभी कार्यस्थलों पर पानी भरा होने से बाढ़ बचाव का काम प्रभावित है। बाढ़ खंड के अभियंता तटबंधों की निगरानी के साथ स्लोप का काम पूरा कराने में जुटे हैं। स्थानीय लोगों ने जलस्तर घटने के साथ कटान का खतरा बढ़ने की आशंका जताते हुए संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।
सेवरही क्षेत्र में गंडक नदी नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब 17.5 किलोमीटर की लंबाई में बहती है। इस हिस्से में करीब 32.71 करोड़ रुपये की लागत से तीन बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं पर पिछले तीन माह से कार्य चल रहा था। मंगलवार को गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़कर 2.24 लाख क्यूसेक पहुंचने के बाद नदी उफान पर आ गई थी। पिपराघाट से अहिरौलीदान तक तटबंधों पर दबाव बढ़ गया था।
दो दिन में डिस्चार्ज घटकर करीब एक लाख क्यूसेक रह गया है। पिपराघाट, घघवा जगदीश, बिरवट कोन्हवलिया, नोनिया पट्टी, कचहरी टोला, डीह टोला और अहिरौलीदान में नदी कहीं तटबंध तो कहीं ठोकरों से टकरा रही है। तटबंधों की निगरानी की जा रही है। स्लोप निर्माण चल रहा है। तटबंध के किनारे रहने वाले मथुरा सिंह, दिनेश जायसवाल, पप्पू सिंह और अशोक पटेल का कहना है कि जैसे-जैसे नदी का जलस्तर घटेगा, कटान का खतरा बढ़ता जाएगा। उनका कहना है कि कई स्थानों पर तटबंध जर्जर स्थिति में हैं, इसलिए दोबारा जलस्तर बढ़ने से पहले सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए।
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-तटबंध के सभी संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। रेन कट को ठीक कराया जा रहा है। -दीपरतन सिंह,एसडीओ बाढ़ खंड
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सेवरही क्षेत्र में गंडक नदी नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब 17.5 किलोमीटर की लंबाई में बहती है। इस हिस्से में करीब 32.71 करोड़ रुपये की लागत से तीन बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं पर पिछले तीन माह से कार्य चल रहा था। मंगलवार को गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़कर 2.24 लाख क्यूसेक पहुंचने के बाद नदी उफान पर आ गई थी। पिपराघाट से अहिरौलीदान तक तटबंधों पर दबाव बढ़ गया था।
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दो दिन में डिस्चार्ज घटकर करीब एक लाख क्यूसेक रह गया है। पिपराघाट, घघवा जगदीश, बिरवट कोन्हवलिया, नोनिया पट्टी, कचहरी टोला, डीह टोला और अहिरौलीदान में नदी कहीं तटबंध तो कहीं ठोकरों से टकरा रही है। तटबंधों की निगरानी की जा रही है। स्लोप निर्माण चल रहा है। तटबंध के किनारे रहने वाले मथुरा सिंह, दिनेश जायसवाल, पप्पू सिंह और अशोक पटेल का कहना है कि जैसे-जैसे नदी का जलस्तर घटेगा, कटान का खतरा बढ़ता जाएगा। उनका कहना है कि कई स्थानों पर तटबंध जर्जर स्थिति में हैं, इसलिए दोबारा जलस्तर बढ़ने से पहले सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए।
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-तटबंध के सभी संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। रेन कट को ठीक कराया जा रहा है। -दीपरतन सिंह,एसडीओ बाढ़ खंड