{"_id":"65b2cc85cfb4f5a43b051774","slug":"four-warriors-of-dudhi-block-had-sacrificed-their-lives-in-the-freedom-movement-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-111520-2024-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: स्वतंत्रता आंदोलन में दुदही ब्लॉक के चार रणबांकुरों ने दिया था बलिदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: स्वतंत्रता आंदोलन में दुदही ब्लॉक के चार रणबांकुरों ने दिया था बलिदान
Fri, 26 Jan 2024 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 26 Jan 2024 02:33 AM IST
विज्ञापन
दुदही(कुशीनगर)। पिछड़े इलाकों में शुमार दुदही ब्लॉक के रणबांकुरों का स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान था। 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन उग्र होने के बाद अंग्रेजों ने यहां के चार रणबांकुरों को मौत के घाट उतार दिया था। 74 लोगों को कठोर सजा दी थी।
आज़ादी की लड़ाई में दुदही क्षेत्र के क्रांतिकारियों की कमान सरवन पांडेय उर्फ़ सुराजी बाबा चंद्रदेव तिवारी व गेंदा सिंह जैसे लोगों के हाथ में थी। बांसगांव चौरिया, बैरिया, खैरवा, अमवाखास, पंचरुखीया, गौरीश्रीराम, मिश्रौली, दुदही, नाराहवा, कैथवलिया, शाहपुर, धोकरहा, चाफ, अमवा दीगर, बड़हरा, सरगटीया, रामपुर बरहन, अमही, धर्मपुर पर्वत, गौरीजगदीश आदि गांवों के नौजवान सिर पर कफ़न बांधकर गांधीजी के आंदोलन में शामिल हुए थे। इन लोगों ने जगह-जगह रेल पटरियां उखाड़ दी थीं। सरकारी गेहूं का गोदाम लूट लिया था। फ़ोन के तार भी काट दिए थे। अंग्रेज अफ़सरों ने इस आंदोलन को दबाने के लिए गौरी शुक्ल गांव के जतन मलाह, अमवाखास खास टोला करवतहि कर धरीक्षण व मंगल राय और किशुनवा के भोला नोनिया को गोली मरवा दिया था, लेकिन आंदोलन की धार कुंद नहीं हुई।
क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि कई गांव जला दिए गए थे। अंग्रेजों ने मंगल भगत को जिंदा जला दिया था। आंदोलन दबाने के लिए फिरंगियों ने महिला, बच्चों और बुजुर्गों पर भी जुल्म ढाया था। तब क्रांतिकारियों ने तुर्कपट्टी कसया रोड के खनुवा नाले पर बने पुल को पांच घंटे में ध्वस्त कर दिया। इसी रास्ते से फिरंगी आते थे। अंग्रेजों ने 74 लोगों पर केस चलाकर उन्हें कठोर सजा दिलाई। बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजी हुक़ूमत में गेंदा सिंह और देवकली को तीन-तीन साल, चंद्रदेव तिवारी को दो साल की कैद, दिलीप राय को एक साल कैद और 12 बेंत, बांसगांव के नकछेद को एक साल कैद और छह बेंत, अमवादीगर के सूर्यदेव को 18 बूट, गौरीश्रीराम के श्रीकिशन गुप्ता पर पांच सौ रुपये हर्जाना, बांसगांव चौरिया के बच्चा बाबू को तीन माह कैद और 11 सौ रुपये जुर्माना व छह बेंत की सजा दी गई। जेल में बंद माधोपुर के जनार्दन को लकवा मार दिया। इस जुल्म को देखते हुए कुतुबुद्दीन, सत्यनारायण, लुटावन और छठु भूमिगत हो गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
आज़ादी की लड़ाई में दुदही क्षेत्र के क्रांतिकारियों की कमान सरवन पांडेय उर्फ़ सुराजी बाबा चंद्रदेव तिवारी व गेंदा सिंह जैसे लोगों के हाथ में थी। बांसगांव चौरिया, बैरिया, खैरवा, अमवाखास, पंचरुखीया, गौरीश्रीराम, मिश्रौली, दुदही, नाराहवा, कैथवलिया, शाहपुर, धोकरहा, चाफ, अमवा दीगर, बड़हरा, सरगटीया, रामपुर बरहन, अमही, धर्मपुर पर्वत, गौरीजगदीश आदि गांवों के नौजवान सिर पर कफ़न बांधकर गांधीजी के आंदोलन में शामिल हुए थे। इन लोगों ने जगह-जगह रेल पटरियां उखाड़ दी थीं। सरकारी गेहूं का गोदाम लूट लिया था। फ़ोन के तार भी काट दिए थे। अंग्रेज अफ़सरों ने इस आंदोलन को दबाने के लिए गौरी शुक्ल गांव के जतन मलाह, अमवाखास खास टोला करवतहि कर धरीक्षण व मंगल राय और किशुनवा के भोला नोनिया को गोली मरवा दिया था, लेकिन आंदोलन की धार कुंद नहीं हुई।
विज्ञापन
क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि कई गांव जला दिए गए थे। अंग्रेजों ने मंगल भगत को जिंदा जला दिया था। आंदोलन दबाने के लिए फिरंगियों ने महिला, बच्चों और बुजुर्गों पर भी जुल्म ढाया था। तब क्रांतिकारियों ने तुर्कपट्टी कसया रोड के खनुवा नाले पर बने पुल को पांच घंटे में ध्वस्त कर दिया। इसी रास्ते से फिरंगी आते थे। अंग्रेजों ने 74 लोगों पर केस चलाकर उन्हें कठोर सजा दिलाई। बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजी हुक़ूमत में गेंदा सिंह और देवकली को तीन-तीन साल, चंद्रदेव तिवारी को दो साल की कैद, दिलीप राय को एक साल कैद और 12 बेंत, बांसगांव के नकछेद को एक साल कैद और छह बेंत, अमवादीगर के सूर्यदेव को 18 बूट, गौरीश्रीराम के श्रीकिशन गुप्ता पर पांच सौ रुपये हर्जाना, बांसगांव चौरिया के बच्चा बाबू को तीन माह कैद और 11 सौ रुपये जुर्माना व छह बेंत की सजा दी गई। जेल में बंद माधोपुर के जनार्दन को लकवा मार दिया। इस जुल्म को देखते हुए कुतुबुद्दीन, सत्यनारायण, लुटावन और छठु भूमिगत हो गए थे।
विज्ञापन