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Kushinagar News: रात भर वन विभाग की कांबिंग, सुबह से खेतों में सर्च अभियान
Mon, 25 May 2026 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 25 May 2026 02:02 AM IST
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मंसाछापर। विशुनपुरा ब्लॉक के बलकुड़िया गांव में शनिवार की देर शाम को केले के खेत में दो तेंदुओं के दिखने के दावे के बाद वन विभाग सतर्क है। शनिवार देर रात तक वन विभाग की टीम ने गांव और खेतों के आसपास कांबिंग की। रविवार की सुबह से ही डिप्टी रेंजर अमित तिवारी की अगुवाई में टीम ने खेतों और बागानों में सर्च अभियान शुरू किया, लेकिन कहीं भी तेंदुआ दिखाई नहीं दिया। हालांकि, लोगों में दहशत बनी हुई है।
वन विभाग की टीम गांव के बाहर नहर किनारे स्थित केले और लीची के बागानों के आसपास लगातार निगरानी कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक टीम को शिफ्टवाइज ड्यूटी पर लगाई गई है, ताकि दिन और रात दोनों समय निगरानी बनी रहे। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और अकेले खेतों की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
बताया जा रहा है कि बीते दो सप्ताह से इलाके में तेंदुए के दिखने की चर्चा लगातार हो रही है। शनिवार देर शाम ग्रामीणों ने एक साथ दो तेंदुओं को देखने का दावा किया था। इसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी और बड़ी संख्या में लोग लाठी-डंडा लेकर खेतों की तरफ दौड़ पड़े थे। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रात में कांबिंग शुरू कर दी।
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डिप्टी रेंजर अमित तिवारी ने बताया कि कांबिंग के समय तेंदुआ नहीं दिखे, लेकिन एहतियात के तौर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। टीम आसपास के खेतों, बागानों और नहर किनारे के इलाकों में गश्त कर रही है।
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तेंदुए की दहशत से खेतों की ओर नहीं जा रहे किसान
मंसाछापर। बलकुड़िया गांव में दो तेंदुओं के दिखने के दावे के बाद ग्रामीणों में भय बना हुआ है। किसान खेतों और बागानों की तरफ जाने से बच रहे हैं। खासकर शाम ढलने के बाद गांव के बाहर का इलाका लगभग सूना हो जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि केले और लीची के बागानों के पास लगातार तेंदुए की चर्चा होने से लोगों में डर बैठ गया है। कई किसान सुबह देर से खेत जा रहे हैं और शाम होने से पहले वापस लौट आ रहे हैं। कुछ लोगों ने तो बच्चों को भी अकेले बाहर निकलने से रोक दिया है। नहर किनारे और खेतों की तरफ जाने वाली पगडंडियों पर पहले जहां देर शाम तक आवाजाही रहती थी, वहीं अब लोग समूह में ही निकल रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विनोद गुप्त ने बताया कि गांव के लोग लगातार डरे हुए हैं। वन विभाग की टीम निगरानी कर रही है, लेकिन तेंदुए की पुष्टि नहीं होने से लोगों की चिंता कम नहीं हो रही। किसानों का कहना है कि डर की वजह से खेती-बाड़ी का काम भी प्रभावित हो रहा है।
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वन विभाग की टीम गांव के बाहर नहर किनारे स्थित केले और लीची के बागानों के आसपास लगातार निगरानी कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक टीम को शिफ्टवाइज ड्यूटी पर लगाई गई है, ताकि दिन और रात दोनों समय निगरानी बनी रहे। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और अकेले खेतों की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
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बताया जा रहा है कि बीते दो सप्ताह से इलाके में तेंदुए के दिखने की चर्चा लगातार हो रही है। शनिवार देर शाम ग्रामीणों ने एक साथ दो तेंदुओं को देखने का दावा किया था। इसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी और बड़ी संख्या में लोग लाठी-डंडा लेकर खेतों की तरफ दौड़ पड़े थे। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रात में कांबिंग शुरू कर दी।
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डिप्टी रेंजर अमित तिवारी ने बताया कि कांबिंग के समय तेंदुआ नहीं दिखे, लेकिन एहतियात के तौर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। टीम आसपास के खेतों, बागानों और नहर किनारे के इलाकों में गश्त कर रही है।
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तेंदुए की दहशत से खेतों की ओर नहीं जा रहे किसान
मंसाछापर। बलकुड़िया गांव में दो तेंदुओं के दिखने के दावे के बाद ग्रामीणों में भय बना हुआ है। किसान खेतों और बागानों की तरफ जाने से बच रहे हैं। खासकर शाम ढलने के बाद गांव के बाहर का इलाका लगभग सूना हो जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि केले और लीची के बागानों के पास लगातार तेंदुए की चर्चा होने से लोगों में डर बैठ गया है। कई किसान सुबह देर से खेत जा रहे हैं और शाम होने से पहले वापस लौट आ रहे हैं। कुछ लोगों ने तो बच्चों को भी अकेले बाहर निकलने से रोक दिया है। नहर किनारे और खेतों की तरफ जाने वाली पगडंडियों पर पहले जहां देर शाम तक आवाजाही रहती थी, वहीं अब लोग समूह में ही निकल रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विनोद गुप्त ने बताया कि गांव के लोग लगातार डरे हुए हैं। वन विभाग की टीम निगरानी कर रही है, लेकिन तेंदुए की पुष्टि नहीं होने से लोगों की चिंता कम नहीं हो रही। किसानों का कहना है कि डर की वजह से खेती-बाड़ी का काम भी प्रभावित हो रहा है।