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किसानों ने कोर्ट का दरवाजा खटकटाया

Tue, 06 Jul 2021 11:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 11:51 PM IST
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Farmers has gone to High Court
मुआवजा के लिए हाईकोर्ट गए किसान
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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। सीमावर्ती बिहार राज्य के गांवों को गंडक नदी की कटान से बचाने के लिए बिहार के जल संसाधन विभाग ने जिन किसानों से जमीन ली थी, उसके एवज में मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है। परेशान किसानों ने मुआवजा के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
विशुनपुर गाइड बांध के लिए वर्ष 2017 में सीमावर्ती अहिरौलीदान से सटे बिहार बार्डर के भसही, काला मटिहिनिया, शैलेपुर, भगवानपुर, दुर्ग मटिहिनिया, विशंभरपुर सहित आसपास के कई गांवों को गंडक नदी की कटान से बचाने के लिए बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने अहिरौलीदान से विशुनपुर तक लगभग साढ़े आठ किलोमीटर लंबे बांध का निर्माण कराया था। इसमें लगभग 600 किसानों से उनकी खेती योग्य भूमि मुआवजा दिए जाने के शर्त पर अधिग्रहित की गई थी। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी किसानों को भूमि का मुआवजा नहीं मिला। किसान सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं। बिहार विधान परिषद सदस्य आदित्य नारायण पांडेय सदन में भी मामले को उठा चुके हैं। बिहार सरकार ने बांध निर्माण में जिन किसानों की जमीनें ली गई हैं, उन्हें मुआवजा देने का आदेश भी जारी किया था।
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किसान वीरेंद्र राय, संतोष पाठक सहित अन्य किसानों ने जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी गोपालगंज, आयुक्त सारण और जल संसाधन विभाग पटना को प्रार्थना पत्र भेज कर भुगतान की गुहार लगाई थी। न्याय नहीं मिला तो नाराज किसानों ने अब पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हम पार्टी के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह राणा ने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत पांडेय की तरफ से पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
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