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मानसून
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लगातार बारिश से किसानों की बढ़ीं मुश्किलें
पडरौना (कुशीनगर)। जनपद में मानसून शबाब पर है। गत कई दिनों से हो रही बारिश से लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है। लगातार बारिश के चलते निचले इलाके में धान की फसल डूबने से बर्बाद हो गई है।
बृहस्पतिवार सुबह तेज हवा के साथ हुई बारिश के चलते कई जगह गन्ना की फसल गिर गई। गत माह 15 जून के पहले ही जिले में मानसून ने दस्तक दे दी थी। उस समय करीब एक सप्ताह तक लगातार बारिश हुई थी। इसके बाद से ही हर दो दिन बाद कभी मूसलाधार बारिश तो कभी बूंदाबादी हुई है। बुधवार सुबह भी करीब तीन घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। इसके चलते निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया है। इसके चलते खेत में धान की फसल डूब गई है। खेत से जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र के बहुत से किसानों की धान की फसल लगातार पानी में डूबे रहने से बर्बाद हो गई है।
सुबह करीब चार बजे तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हुई। तेज हवा के साथ बारिश होने से पडरौना, विशुनपुरा, नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के कई किसानों की गन्ने की फसल गिर गई है। सिरसिया गांव के मृत्युंजय पांडेय, दयानंद पांडेय, मनोज पांडेय, हरिओम गुप्ता मटिहनिया के विमलेश यादव, हरका के सचिन मिश्र, विशाल राव आदि ने बताया कि तेज हवा के चलते खेत में गन्ने की फसल गिर गई है। इसके अलावा खेत में पानी लगने से गांव के कई किसानों की धान की फसल भी डूबने से बर्बाद हो रही है। यदि ऐसे ही और कुछ दिनों तक बारिश होती रही है। धान की फसल के साथ सब्जी, गन्ना और मक्के की फसल बर्बाद हो जाएगी।
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जिला कृषि अधिकारी प्यारेलाल ने बताया कि खेत में पानी भरे रहने से सब्जी की फसल को नुकसान होगा। धान की खेत में पानी लगना किसानों के लिए चिंता का विषय है। लेकिन यदि चार से पांच दिनों में पानी निकल जाए तो धान की फसल बचाई जा सकती है। यदि हवा से गन्ने की फसल खेत में गिर गई है तो उसे बांधकर खड़ा करना चाहिए।
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पडरौना (कुशीनगर)। जनपद में मानसून शबाब पर है। गत कई दिनों से हो रही बारिश से लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है। लगातार बारिश के चलते निचले इलाके में धान की फसल डूबने से बर्बाद हो गई है।
बृहस्पतिवार सुबह तेज हवा के साथ हुई बारिश के चलते कई जगह गन्ना की फसल गिर गई। गत माह 15 जून के पहले ही जिले में मानसून ने दस्तक दे दी थी। उस समय करीब एक सप्ताह तक लगातार बारिश हुई थी। इसके बाद से ही हर दो दिन बाद कभी मूसलाधार बारिश तो कभी बूंदाबादी हुई है। बुधवार सुबह भी करीब तीन घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। इसके चलते निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया है। इसके चलते खेत में धान की फसल डूब गई है। खेत से जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र के बहुत से किसानों की धान की फसल लगातार पानी में डूबे रहने से बर्बाद हो गई है।
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सुबह करीब चार बजे तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हुई। तेज हवा के साथ बारिश होने से पडरौना, विशुनपुरा, नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के कई किसानों की गन्ने की फसल गिर गई है। सिरसिया गांव के मृत्युंजय पांडेय, दयानंद पांडेय, मनोज पांडेय, हरिओम गुप्ता मटिहनिया के विमलेश यादव, हरका के सचिन मिश्र, विशाल राव आदि ने बताया कि तेज हवा के चलते खेत में गन्ने की फसल गिर गई है। इसके अलावा खेत में पानी लगने से गांव के कई किसानों की धान की फसल भी डूबने से बर्बाद हो रही है। यदि ऐसे ही और कुछ दिनों तक बारिश होती रही है। धान की फसल के साथ सब्जी, गन्ना और मक्के की फसल बर्बाद हो जाएगी।
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जिला कृषि अधिकारी प्यारेलाल ने बताया कि खेत में पानी भरे रहने से सब्जी की फसल को नुकसान होगा। धान की खेत में पानी लगना किसानों के लिए चिंता का विषय है। लेकिन यदि चार से पांच दिनों में पानी निकल जाए तो धान की फसल बचाई जा सकती है। यदि हवा से गन्ने की फसल खेत में गिर गई है तो उसे बांधकर खड़ा करना चाहिए।