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Kushinagar News: महंगी कॉपी-किताब अभिभावकों की जेब कर दे रहीं खाली

Mon, 03 Apr 2023 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 03 Apr 2023 12:21 AM IST
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Expensive copy-books emptying the pockets of parents
निफॉर्म की खरीदारी करते बच्चे और अभिभावक।संवाद
कॉपी-किताब से लेकर यूनिफॉर्म तक दामों में 20 से 40 फीसदी तक का इजाफा
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। महंगाई की मार पढ़ाई के सामान पर पड़ने लगा है। कॉपी-किताब से लेकर यूनिफॉर्म तक के दामों में बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 20 से 40 फीसदी इजाफा हुआ। बच्चों को पढ़ा-लिखाकर कामयाब शख्स बनाने का सपना देखने वाले मध्य वर्गीय अभिभावक महंगाई से परेशान हैं। उनकी साल भर की बचत और मार्च-अप्रैल की सेलरी बच्चों की कॉपी-किताब खरीदने व स्कूल की फीस भरने में ही खर्च हो जाती है। ऐसे में महीने भर फांका कसी में जीवन गुजारना पड़ता है।
रबर, पेंसिल और शॉर्पनर के दाम में भी 10 से 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। स्टेशनरी व्यवसाय से जुड़े सच्चिदानंद श्रीवास्तव ने बताया कि रद्दी के दाम में हुई बढ़ोतरी के चलते पढ़ाई से जुड़े हर सामान के मूल्य आसमान छूने लगे हैं। इसका सीधा असर अभिभावकों पर पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान ऑनलाइन क्लास में अभिभावकों को किताब-कॉपियों पर कम खर्च करना पड़ा था। अब स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने से किताब-कापियों के दामों में बढ़ोतरी का असर लोगों की जेब पर दिख रहा है।
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किताबों, ड्रेस, जूता आदि की कीमत में भी 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। स्कूली बैग की कीमत में सौ से डेढ़ सौ रुपये का इजाफा हुआ है। दुकानदारों के मुताबिक कॉपी-किताबों का जो सेट पहले औसतन तीन हजार रुपये में आता था, वह इस बार पांच हजार रुपये में है।
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दाम वही, मगर कम हो गई कॉपियों में पन्नों की संख्या
कॉपी-किताब के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि बीते वर्ष दस रुपये की कॉपी में 60 पेज होते थे। इस वर्ष कॉपी के पेज 44 हो गए हैं। 20 रुपये में मिलने वाली कॉपी के पेज 120 से घटकर 82, 40 रुपये में मिलने वाली 240 पेज की कॉपी का पेज घटकर 200 और 50 रुपये में मिलने वाली 300 पेज की कॉफी का पेज कम होकर 250 पेज हो गया है। उन्होंने बताया कि कागज के दाम बढ़ने से प्राइवेट विद्यालयों की पुस्तकों का मूल्य भी बढ़ा है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष प्रत्येक कक्षा के किताबों के दाम में 400 से 500 रुपये तक बढ़ोत्तरी हुई है।
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दिन-प्रतिदिन शिक्षा महंगी होती जा रही है। इससे बच्चों को पढ़ना मुश्किल हो गया है। स्कूलों और कोचिंग का शुल्क चुकाने में पहले ही पसीने छूटते थे। अब स्टेशनरी का बोझ भी बढ़ गया। इससे महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है।

पप्पू यादव, अभिभावक
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अन्य सामानों के दाम बढ़ने के साथ ही कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के दाम में 20 से 40 फीसदी तक बढ़ गई है। सबसे अधिक परेशानी उन अभिभावकों को है, जिनके घर तीन या चार बच्चे पढ़ने वाले हैं। ऐसे अभिभावकों का आधा वेतन बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो जाता है।
राजू जायसवाल, अभिभावक
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एलकेजी से कक्षा पांच तक कक्षावार किताबों का मूल्य

कक्षा वर्ष 2022 (रुपये में) वर्ष 2023 (रुपये में)
एलकेजी 800 1200
यूकेजी 1000 13000
एक 1200 1500
दो 1500 2000
तीन 2100 2400
चार 2400 2800
पांच 2600 3200
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