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Kushinagar News: मुर्दों को भी चाहिए अपने नाम की जमीन!
Thu, 13 Feb 2025 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 13 Feb 2025 12:08 AM IST
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खड्डा। मुर्दे भी जमीन अपने नाम कराना चाहते हैं। तहसील दिवस व अन्य अधिकारियों को आवेदन पत्र देकर एआरओ कार्यालय से आए परवाना के आधार पर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने का दबाव बना रहे हैं।
यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि गोरखपुर एआरओ कार्यालय से खड्डा तहसील पहुंचे आदेश के फर्जी परवाना की जांच में इसका खुलासा हुआ है। हैरत की बात यह है कि बिना जांच के ही इनका नाम मालिकान रजिस्टर में भी दर्ज हो गया है।
तहसीलदार ने जब मामले की जांच शुरू कर है तो परत दर परत फर्जीवाड़े की पोल खुलने लगी है। अब तक ऐसे करीब 14 मामले अभी तक जांच में सामने आ चुके हैं। फिलहाल, मामले में दो सदस्यीय टीम भी गठित कर दी गई है जो अभी तक आए परवाना को लेकर एआरओ कार्यालय गोरखपुर जांच के लिए जाएगी। खड्डा तहसील के नदी उस पार के गांवों की जमीन पर भू-माफियाओं का नजर है। तहसील के कुछ कर्मचारी भी इस खेल में पर्दे के पीछे से शामिल हैं। इसकी मदद से अफसरों का आदेश जालसाजों की मदद से तैयार कर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने का खेल चल रहा है। सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) न्यायालय का जो फर्जी आदेश व परवाना खड्डा तहसील में रजिस्टर्ड डाक से पहुंचा है।
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इसमें गुरुचरन पुत्र परसादी निवासी ग्राम शिवपुर तथा सर्वा पुत्र ठग निवासी ग्राम सोहगीबरवा जिला महराजगंज का नाम भी है। हैरानी की बात यह है कि सर्वा सिंह की मृत्यु 17 वर्ष पहले हो चुकी है, जबकि गुरुचरन भी करीब दस वर्ष पहले मर चुके हैं। इनकी तरफ से तहसील दिवस व अन्य अधिकारियों को आवेदन पत्र देकर एआरओ कार्यालय से आए फर्जी परवाना के आधार पर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने का आए दिन दबाव बनाया जाता रहा है।
तहसील खड्डा के कर्मचारियों ने बिना परवाना की जांच किए ही इन लोगों समेत करीब सात लोगों का नाम मालिकान (आर-6) रजिस्टर पर दर्ज भी कर दिया गया है। इस आधार पर खतौनी में नाम दर्ज करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के पास तक पहुंच गया है, हालांकि समय रहते इसकी भनक कुछ काश्तकारों को लगी तो अफसरों तक शिकायत पहुंची और खतौनी में नाम दर्ज नहीं हो सका।
तहसीलदार ने एआरओ कार्यालय से पिछले एक साल में आए परवाना से जुड़ी फाइलों को कब्जे में ले लिया और इसमें होने वाली विभागीय कार्रवाई को होल्ड करा दिया है। करीब 14 से ज्यादा आदेश हैं जो एआरओ न्यायालय के नाम से तहसील में पहुंची है। उनकी विस्तृत जांच के लिए टीम गठित कर दिया गया है।
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यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि गोरखपुर एआरओ कार्यालय से खड्डा तहसील पहुंचे आदेश के फर्जी परवाना की जांच में इसका खुलासा हुआ है। हैरत की बात यह है कि बिना जांच के ही इनका नाम मालिकान रजिस्टर में भी दर्ज हो गया है।
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तहसीलदार ने जब मामले की जांच शुरू कर है तो परत दर परत फर्जीवाड़े की पोल खुलने लगी है। अब तक ऐसे करीब 14 मामले अभी तक जांच में सामने आ चुके हैं। फिलहाल, मामले में दो सदस्यीय टीम भी गठित कर दी गई है जो अभी तक आए परवाना को लेकर एआरओ कार्यालय गोरखपुर जांच के लिए जाएगी। खड्डा तहसील के नदी उस पार के गांवों की जमीन पर भू-माफियाओं का नजर है। तहसील के कुछ कर्मचारी भी इस खेल में पर्दे के पीछे से शामिल हैं। इसकी मदद से अफसरों का आदेश जालसाजों की मदद से तैयार कर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने का खेल चल रहा है। सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) न्यायालय का जो फर्जी आदेश व परवाना खड्डा तहसील में रजिस्टर्ड डाक से पहुंचा है।
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इसमें गुरुचरन पुत्र परसादी निवासी ग्राम शिवपुर तथा सर्वा पुत्र ठग निवासी ग्राम सोहगीबरवा जिला महराजगंज का नाम भी है। हैरानी की बात यह है कि सर्वा सिंह की मृत्यु 17 वर्ष पहले हो चुकी है, जबकि गुरुचरन भी करीब दस वर्ष पहले मर चुके हैं। इनकी तरफ से तहसील दिवस व अन्य अधिकारियों को आवेदन पत्र देकर एआरओ कार्यालय से आए फर्जी परवाना के आधार पर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने का आए दिन दबाव बनाया जाता रहा है।
तहसील खड्डा के कर्मचारियों ने बिना परवाना की जांच किए ही इन लोगों समेत करीब सात लोगों का नाम मालिकान (आर-6) रजिस्टर पर दर्ज भी कर दिया गया है। इस आधार पर खतौनी में नाम दर्ज करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के पास तक पहुंच गया है, हालांकि समय रहते इसकी भनक कुछ काश्तकारों को लगी तो अफसरों तक शिकायत पहुंची और खतौनी में नाम दर्ज नहीं हो सका।
तहसीलदार ने एआरओ कार्यालय से पिछले एक साल में आए परवाना से जुड़ी फाइलों को कब्जे में ले लिया और इसमें होने वाली विभागीय कार्रवाई को होल्ड करा दिया है। करीब 14 से ज्यादा आदेश हैं जो एआरओ न्यायालय के नाम से तहसील में पहुंची है। उनकी विस्तृत जांच के लिए टीम गठित कर दिया गया है।