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Kushinagar News: कार्रवाई के बाद भी लेखपालों की कार्यशैली में नहीं हो रहा सुधार
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-कसया, कप्तानगंज और पडरौना तहसील में तैनात पांच लेखपालों पर एक माह में हो चुकी है कार्रवाई
-रोक के बावजूद गलत रिपोर्ट के चलते कप्तानगंज चीनी मिल की जमीन बेचने का मामला चर्चा में
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। देवरिया के फत्तेहपुर नरसंहार के बाद शासन-प्रशासन विवादित जमीनों की आने वाली शिकायतों के निस्तारण पर जोर तो दे रहा है, लेकिन मामला फिर पुराने ढर्रे पर आ गया है। कसया में तैनात तीन लेखपालों पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाने के मामले में जहां केस दर्ज होने की चर्चा अभी कम नहीं हुई थी, कि कप्तानगंज चीनी मिल की जमीन लेखपाल के गलत रिपोर्ट लगाने के चलते बिक गई। एक माह में कसया और कप्तानगंज तहसील में तैनात करीब पांच लेखपालों पर गलत रिपोर्ट देने के मामले में कार्रवाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद वह मनमानेपन से बाज नहीं आ रहे हैं। विभागीय गठजोड़ के चलते एक ही तहसील में काफी दिनों से अंगद की तरह पांव जमाए पड़े हैं।
कप्तानगंज तहसील में तैनात लेखपाल मारकंडेय गुप्ता अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। कप्तानगंज चीनी मिल पर किसानों का करीब 77 करोड़ रुपये बकाया है। किसानों का दबाव पड़ने पर जिला प्रशासन ने चीनी मिल को सील कर दिया और कुर्क करने के लिए लेखपाल से रिपोर्ट मांगी। लेखपाल की ओर से दी गई रिपोर्ट में चीनी मिल की जमीन की तीन गाटा संख्या की जमीन को छिपाकर रिपोर्ट दी गई। इस आधार पर प्रशासन ने चीनी मिल को कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की। इसकी जानकारी होने पर आईएमसीआई लिमिटेड दिल्ली ने कप्तानगंज चीनी मिल पर 86.87 करोड़ रुपये कर्ज बताते हुए ट्रिब्यूनल दिल्ली के माध्यम से संपूर्ण संपत्ति की बिक्री पर रोक लगवा दी।
इसके बाद जिला प्रशासन की कार्रवाई ठप हो गई। लेखपाल की ओर से दी गई रिपोर्ट में जिस तीन गाटा संख्या को छोड़ा गया था, उसकी बिक्री के बाद किसानों का गुस्सा बढ़ गया है। अगर इसकी ईमानदारी से जांच की जाए तो कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है।
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इसके अलावा कप्तानगंज नगर के दीनानाथ मिश्र की जमीन में भी लेखपाल ने खेल किया है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन पर दूसरे को कब्जा दिला दिया गया है। पीड़ित की शिकायत पर डीएम ने जांच बैठाई। इसके अलावा कसया तहसील में तैनात लेखपाल श्रीनिवास सिंह ने एक ही मामले में अलग-अलग रिपोर्ट देकर अफसरों को गुमराह कर दिया था। इसी तहसील में तैनात लेखपाल गौरव प्रताप सिंह गायब व्यक्ति को मृत दिखाकर दूसरे के नाम जमीन की वरासत गलत तरीके से कर दी। इसके अलावा लेखपाल सुरेश गुप्ता ने अंश निर्धारण में साक्ष्य छिपाते हुए गलती की थी। इन मामलों में डीएम के निर्देश पर तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंकिता जैन ने निलंबित कर दिया था।
कसया तहसील में तैनात निलेश रंजन राव, शैलेष दुबे, श्रीनिवास सिंह ने बिना आवेदन के ही फर्जी तरीके से जाति प्रमाणपत्र बना दिया था। इस मामले में प्रियेश गोंड़ की शिकायत पर तीनों लेखपालों पर कसया थाने में केस दर्ज हुआ है। पीड़ित का आरोप है कि काफी दिनों से कसया थाने में तैनात निलेश रंजन राय केस वापस करने के लिए धमकी दे रहे हैं। इनका स्थानांतरण दूसरी तहसील में किया जाए। इसकी शिकायत डीएम से भी की गई है। कप्तानगंज तहसील में तैनात विचित्र मणि त्रिपाठी को साक्ष्य छिपाकर जमीन का पट्टा करने के मामले में एसडीएम ने निलंबित कर दिया है। हालांकि जिन लेखपालों पर केस दर्ज है, उन्हें अभी तक निलंबित नहीं किया गया है।
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि ज्यादा दिनों से तहसीलों में तैनात लेखपालों को हटाया जाएगा। किसी की मनमानी नहीं चलेगी। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई लगातार की जा रही है।
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-रोक के बावजूद गलत रिपोर्ट के चलते कप्तानगंज चीनी मिल की जमीन बेचने का मामला चर्चा में
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। देवरिया के फत्तेहपुर नरसंहार के बाद शासन-प्रशासन विवादित जमीनों की आने वाली शिकायतों के निस्तारण पर जोर तो दे रहा है, लेकिन मामला फिर पुराने ढर्रे पर आ गया है। कसया में तैनात तीन लेखपालों पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाने के मामले में जहां केस दर्ज होने की चर्चा अभी कम नहीं हुई थी, कि कप्तानगंज चीनी मिल की जमीन लेखपाल के गलत रिपोर्ट लगाने के चलते बिक गई। एक माह में कसया और कप्तानगंज तहसील में तैनात करीब पांच लेखपालों पर गलत रिपोर्ट देने के मामले में कार्रवाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद वह मनमानेपन से बाज नहीं आ रहे हैं। विभागीय गठजोड़ के चलते एक ही तहसील में काफी दिनों से अंगद की तरह पांव जमाए पड़े हैं।
कप्तानगंज तहसील में तैनात लेखपाल मारकंडेय गुप्ता अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। कप्तानगंज चीनी मिल पर किसानों का करीब 77 करोड़ रुपये बकाया है। किसानों का दबाव पड़ने पर जिला प्रशासन ने चीनी मिल को सील कर दिया और कुर्क करने के लिए लेखपाल से रिपोर्ट मांगी। लेखपाल की ओर से दी गई रिपोर्ट में चीनी मिल की जमीन की तीन गाटा संख्या की जमीन को छिपाकर रिपोर्ट दी गई। इस आधार पर प्रशासन ने चीनी मिल को कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की। इसकी जानकारी होने पर आईएमसीआई लिमिटेड दिल्ली ने कप्तानगंज चीनी मिल पर 86.87 करोड़ रुपये कर्ज बताते हुए ट्रिब्यूनल दिल्ली के माध्यम से संपूर्ण संपत्ति की बिक्री पर रोक लगवा दी।
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इसके बाद जिला प्रशासन की कार्रवाई ठप हो गई। लेखपाल की ओर से दी गई रिपोर्ट में जिस तीन गाटा संख्या को छोड़ा गया था, उसकी बिक्री के बाद किसानों का गुस्सा बढ़ गया है। अगर इसकी ईमानदारी से जांच की जाए तो कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है।
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इसके अलावा कप्तानगंज नगर के दीनानाथ मिश्र की जमीन में भी लेखपाल ने खेल किया है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन पर दूसरे को कब्जा दिला दिया गया है। पीड़ित की शिकायत पर डीएम ने जांच बैठाई। इसके अलावा कसया तहसील में तैनात लेखपाल श्रीनिवास सिंह ने एक ही मामले में अलग-अलग रिपोर्ट देकर अफसरों को गुमराह कर दिया था। इसी तहसील में तैनात लेखपाल गौरव प्रताप सिंह गायब व्यक्ति को मृत दिखाकर दूसरे के नाम जमीन की वरासत गलत तरीके से कर दी। इसके अलावा लेखपाल सुरेश गुप्ता ने अंश निर्धारण में साक्ष्य छिपाते हुए गलती की थी। इन मामलों में डीएम के निर्देश पर तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंकिता जैन ने निलंबित कर दिया था।
कसया तहसील में तैनात निलेश रंजन राव, शैलेष दुबे, श्रीनिवास सिंह ने बिना आवेदन के ही फर्जी तरीके से जाति प्रमाणपत्र बना दिया था। इस मामले में प्रियेश गोंड़ की शिकायत पर तीनों लेखपालों पर कसया थाने में केस दर्ज हुआ है। पीड़ित का आरोप है कि काफी दिनों से कसया थाने में तैनात निलेश रंजन राय केस वापस करने के लिए धमकी दे रहे हैं। इनका स्थानांतरण दूसरी तहसील में किया जाए। इसकी शिकायत डीएम से भी की गई है। कप्तानगंज तहसील में तैनात विचित्र मणि त्रिपाठी को साक्ष्य छिपाकर जमीन का पट्टा करने के मामले में एसडीएम ने निलंबित कर दिया है। हालांकि जिन लेखपालों पर केस दर्ज है, उन्हें अभी तक निलंबित नहीं किया गया है।
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि ज्यादा दिनों से तहसीलों में तैनात लेखपालों को हटाया जाएगा। किसी की मनमानी नहीं चलेगी। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई लगातार की जा रही है।