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एथेनॉल प्लांट : 42 किसानों का मुआवजा लेने से इन्कार
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सुकरौली। ढाढ़ा चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला अटकता दिख रहा है। करीब 17 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया में लगभग आधी जमीन पर मिल प्रबंधन को कब्जा मिल चुका है, जबकि करीब आठ हेक्टेयर भूमि पर अब भी मुआवजे का पेच फंस गया है। 87 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, जिनमें 42 किसानों ने मुआवजा लेने से इन्कार दिया है। इन किसानों का कहना है कि उनके पास यही जमीन है। इसे भी चीनी मिल को दे दिया तो वे भूमिहीन हो जाएंगे।
भूमि अधिग्रहण को लेकर दिसंबर 2024 में हरपुर गांव में किसानों और मिल प्रबंधन के बीच कई बार विवाद हुआ था। प्रशासनिक टीम जब जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंची तो किसानों ने विरोध किया था। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। इसमें कई किसान घायल हुए थे। बाद में मिल प्रबंधन की ओर से 56 किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कुछ किसानों का शांतिभंग की आशंका में चालान भी हुआ था। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
मार्च 2025 में 29 किसानों की ओर से दाखिल याचिका खारिज करते हुए भूमि अध्याप्ति अधिकारी, देवरिया की ओर से 24 अगस्त 2008 को घोषित मुआवजा लेने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी सभी किसान मुआवजा लेने के लिए तैयार नहीं हुए। इसी बीच गेहूं की बुआई को लेकर भी मिल के गार्डों और किसानों में नोकझोंक हुई थी। किसानों का कहना था कि जब तक मुआवजा नहीं लिया है, तब तक वे खेती करेंगे। बाद में पिलर और तार फेंसिंग लगाने को लेकर भी विवाद सामने आया और मिल प्रबंधन ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब स्थिति यह है कि मुआवजा ले चुके किसानों की जमीन पर मिल प्रबंधन कब्जा ले चुका है, जबकि करीब आठ हेक्टेयर जमीन का किसानों ने अब मुआवजा नहीं लिया है। इसलिए उस हिस्से पर अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
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इस संबंध में महाप्रबंधक आरके गुप्ता ने बताया कि मुआवजा प्राप्त कर चुके किसानों की अधिग्रहित जमीन पर नियमानुसार कब्जा लिया जा चुका है। शेष भूमि के संबंध में भी मिल प्रबंधन नियम-कानून के दायरे में प्रयास कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार और कार्रवाई जारी है।
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-जिस राजस्व अभिलेख में चीनी मिल का नाम दर्ज हो गया है, अधिग्रहण के हिसाब से मिल प्रबंधन ने सरकार के खाते में मुआवजे की राशि जमा कर दी है,। तहसील में शिविर लगाया गया था। किसानों की समस्याएं सुनकर उनका निस्तारण किया गया। 42 किसान मुआवजा नहीं ले रहे हैं। उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -जया सिंह, तहसीलदार हाटा
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दिसंबर 2024 में तीन बार गरमाया था मामला
सुकरौली। एथेनॉल प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर दिसंबर 2024 में करीब एक महीने तक किसानों, मिल प्रबंधन और प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। कब्जा दिलाने पहुंची टीम का किसानों ने विरोध किया था। बाद में पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई हुई। इसी दौरान 56 किसानों पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और मार्च 2025 में किसानों की याचिका खारिज होने के बाद मुआवजा लेने का रास्ता साफ हुआ। अब मुआवजा लेने वाले किसानों की जमीन पर कब्जा हो चुका है, जबकि मुआवजा न लेने वाले किसानों की करीब आठ हेक्टेयर भूमि पर प्रक्रिया लंबित है।
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भूमि अधिग्रहण को लेकर दिसंबर 2024 में हरपुर गांव में किसानों और मिल प्रबंधन के बीच कई बार विवाद हुआ था। प्रशासनिक टीम जब जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंची तो किसानों ने विरोध किया था। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। इसमें कई किसान घायल हुए थे। बाद में मिल प्रबंधन की ओर से 56 किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कुछ किसानों का शांतिभंग की आशंका में चालान भी हुआ था। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
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मार्च 2025 में 29 किसानों की ओर से दाखिल याचिका खारिज करते हुए भूमि अध्याप्ति अधिकारी, देवरिया की ओर से 24 अगस्त 2008 को घोषित मुआवजा लेने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी सभी किसान मुआवजा लेने के लिए तैयार नहीं हुए। इसी बीच गेहूं की बुआई को लेकर भी मिल के गार्डों और किसानों में नोकझोंक हुई थी। किसानों का कहना था कि जब तक मुआवजा नहीं लिया है, तब तक वे खेती करेंगे। बाद में पिलर और तार फेंसिंग लगाने को लेकर भी विवाद सामने आया और मिल प्रबंधन ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब स्थिति यह है कि मुआवजा ले चुके किसानों की जमीन पर मिल प्रबंधन कब्जा ले चुका है, जबकि करीब आठ हेक्टेयर जमीन का किसानों ने अब मुआवजा नहीं लिया है। इसलिए उस हिस्से पर अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
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इस संबंध में महाप्रबंधक आरके गुप्ता ने बताया कि मुआवजा प्राप्त कर चुके किसानों की अधिग्रहित जमीन पर नियमानुसार कब्जा लिया जा चुका है। शेष भूमि के संबंध में भी मिल प्रबंधन नियम-कानून के दायरे में प्रयास कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार और कार्रवाई जारी है।
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-जिस राजस्व अभिलेख में चीनी मिल का नाम दर्ज हो गया है, अधिग्रहण के हिसाब से मिल प्रबंधन ने सरकार के खाते में मुआवजे की राशि जमा कर दी है,। तहसील में शिविर लगाया गया था। किसानों की समस्याएं सुनकर उनका निस्तारण किया गया। 42 किसान मुआवजा नहीं ले रहे हैं। उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -जया सिंह, तहसीलदार हाटा
दिसंबर 2024 में तीन बार गरमाया था मामला
सुकरौली। एथेनॉल प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर दिसंबर 2024 में करीब एक महीने तक किसानों, मिल प्रबंधन और प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। कब्जा दिलाने पहुंची टीम का किसानों ने विरोध किया था। बाद में पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई हुई। इसी दौरान 56 किसानों पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और मार्च 2025 में किसानों की याचिका खारिज होने के बाद मुआवजा लेने का रास्ता साफ हुआ। अब मुआवजा लेने वाले किसानों की जमीन पर कब्जा हो चुका है, जबकि मुआवजा न लेने वाले किसानों की करीब आठ हेक्टेयर भूमि पर प्रक्रिया लंबित है।