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Kushinagar News: जवही दयाल में नारायणी की बैक रोलिंग से हो रहा कटान, बचाव कार्य जारी
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नदी में पानी कम होने के बाद लगातार कटान कर रही नदी, तटवर्ती गांव वालों की चिंता बढ़ी
बाढ़ खंड के जेई कटान स्थल पर जमे, बचाव कार्य जारी, बोल्डर, जिओ बैग से रोका जा रहा कटान
तमकुहीरोड। नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर घटने के बाद भी कटान का सिलसिला थम नहीं रहा है। बृहस्पतिवार को जवही दयाल में एपी बांध के किमी 4.400 के पास बैक रोलिंग से तेज कटान शुरू हो गया था। शुक्रवार को भी कटान जारी है। बांध को खतरा देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंता बचाव कार्य में जुटे हैं। बोल्डर और जिओ बैग डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध का यह हिस्सा एक महीने से अधिक समय से नदी के निशाने पर है। यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो बांध को नुकसान पहुंच सकता है। नरवाजोत से अहिरौलीदान तक बहने वाली गंडक नदी का डिस्चार्ज कम हुआ है लेकिन कटान जारी है। इससे पहले नदी ने अहिरौलीदान के नोनियापट्टी, खैरखुटा और मदरही गांवों को प्रभावित किया था। यहां 20 दिनों से अधिक समय तक कटान जारी रहा। कई पक्के और कच्चे मकानों पर भी कटान का खतरा मंडराता रहा।
बृहस्पतिवार से नदी ने जवही दयाल में एपी बांध के किमी 4.400 के पास कटान शुरू कर दिया है। यह कटान इन वन क्षेत्र में हो रहा है। बैक रोलिंग के कारण बांध की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभियंता देर रात तक कटान रोकने में जुटे रहे। जेई रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव और रामचंद्र प्रसाद की देखरेख में बचाव कार्य कराया जा रहा है।
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ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल सहित ग्रामीणों ने बताया कि इस साल क्षेत्र बाढ़ और कटान से बुरी तरह प्रभावित रहा है। बांध को कई बार कटान और रिसाव की समस्या से जूझना पड़ा है। उन्होंने बांध की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
वर्जन
बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने बताया कि विभाग बांध को सुरक्षित करने में जुटा है। कटान स्थल पर बोल्डर और जिओ बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और बचाव कार्य जारी है। हालांकि, दिन-प्रतिदिन बैक रोलिंग बढ़ती जा रही है।
-दीपरतन सिंह, एसडीओ, बाढ़ खंड
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बाढ़ खंड के जेई कटान स्थल पर जमे, बचाव कार्य जारी, बोल्डर, जिओ बैग से रोका जा रहा कटान
तमकुहीरोड। नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर घटने के बाद भी कटान का सिलसिला थम नहीं रहा है। बृहस्पतिवार को जवही दयाल में एपी बांध के किमी 4.400 के पास बैक रोलिंग से तेज कटान शुरू हो गया था। शुक्रवार को भी कटान जारी है। बांध को खतरा देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंता बचाव कार्य में जुटे हैं। बोल्डर और जिओ बैग डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध का यह हिस्सा एक महीने से अधिक समय से नदी के निशाने पर है। यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो बांध को नुकसान पहुंच सकता है। नरवाजोत से अहिरौलीदान तक बहने वाली गंडक नदी का डिस्चार्ज कम हुआ है लेकिन कटान जारी है। इससे पहले नदी ने अहिरौलीदान के नोनियापट्टी, खैरखुटा और मदरही गांवों को प्रभावित किया था। यहां 20 दिनों से अधिक समय तक कटान जारी रहा। कई पक्के और कच्चे मकानों पर भी कटान का खतरा मंडराता रहा।
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बृहस्पतिवार से नदी ने जवही दयाल में एपी बांध के किमी 4.400 के पास कटान शुरू कर दिया है। यह कटान इन वन क्षेत्र में हो रहा है। बैक रोलिंग के कारण बांध की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभियंता देर रात तक कटान रोकने में जुटे रहे। जेई रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव और रामचंद्र प्रसाद की देखरेख में बचाव कार्य कराया जा रहा है।
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ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल सहित ग्रामीणों ने बताया कि इस साल क्षेत्र बाढ़ और कटान से बुरी तरह प्रभावित रहा है। बांध को कई बार कटान और रिसाव की समस्या से जूझना पड़ा है। उन्होंने बांध की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
वर्जन
बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने बताया कि विभाग बांध को सुरक्षित करने में जुटा है। कटान स्थल पर बोल्डर और जिओ बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और बचाव कार्य जारी है। हालांकि, दिन-प्रतिदिन बैक रोलिंग बढ़ती जा रही है।
-दीपरतन सिंह, एसडीओ, बाढ़ खंड