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Kushinagar News: तीसरे दिन भी जारी रहा कटान, खैरखुटा गांव के छह मकानों पर खतरा गहराया
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अहिरौलीदान के खैरखुटा मे जारी कटान को रोकने की कोशिशों जुटे अभियंता।
- कटान की जद में छह मकान, तीन दिन से डटे बाढ़ खंड के अभियंता,नदी के रुख से सहमे गांव वाले
- जलस्तर घटते ही नारायणी नदी की बैक रोलिंग से बढ़ा खतरा, पूर्व प्रधान समेत कई लोगों के घर निशाने पर
- वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ में नदी में समा गया था खैरखुटा गांव का करीब तीन चौथाई हिस्सा
तमकुहीरोड। अहिरौलीदान के खैरखुटा में गंडक नदी का जलस्तर घटने के साथ शुरू हुआ कटान सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। नदी की धारा तेजी से गांव की ओर बढ़ने से पूर्व प्रधान समेत छह लोगों के मकान कटान की जद में आ गए हैं। साथ ही कई अन्य पक्के और कच्चे मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ खंड के एसई, एक्सईएन समेत सभी अभियंता तीन दिन से कटान स्थल पर डटे हैं। बोल्डर डालकर कटान रोकने का काम लगातार जारी है।
अहिरौलीदान का खैरखुटा गांव 14 साल बाद एक बार फिर गंडक नदी के निशाने पर है। वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ में गांव का करीब तीन चौथाई हिस्सा नदी में समा गया था। इसके बाद बाढ़ खंड ने बोल्डर से एप्रन का निर्माण कराकर कटान से गांव को सुरक्षित किया था। पिछले दो-तीन वर्षों से इस हिस्से में प्रभावी बचाव कार्य नहीं होने से एप्रन जर्जर हो गया। शनिवार को गंडक का जलस्तर नीचे आने के बाद नदी में अचानक बैक रोलिंग शुरू हो गई। इससे कटान की रफ्तार बढ़ गई और नदी गांव की ओर बढ़ते हुए पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान समेत कई लोगों के मकानों के करीब पहुंच गई। कटान को लेकर गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
कटान जारी रहने से पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान, भगवान पासवान, रामपूजन पासवान और बली सिंह समेत छह लोगों के मकान सीधे नदी के निशाने पर हैं। इसके अलावा हीरा शर्मा, रामाशंकर सिंह, उमेश सिंह, सुग्रीव सिंह और रामनाथ शर्मा समेत कई अन्य लोगों के पक्के और कच्चे मकानों पर भी कटान का खतरा बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ खंड के एसई केपी सिंह, एक्सईएन महेश कुमार सिंह और एसडीओ दीपरतन सिंह समेत विभाग के सभी अभियंता पिछले तीन दिनों से मौके पर मौजूद हैं। उनकी निगरानी में बोल्डर डालकर कटान को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
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वर्जन
फिलहाल कटान की स्थिति नियंत्रण में है। बचाव कार्य लगातार जारी है और विभाग के सभी अभियंता मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं। मौके पर पर्याप्त बोल्डर गिरवाया गया है। नदी का रुख लगातार बदल रहा है, लेकिन बचाव कार्य के लिए पूरा इंतजाम है।
- महेश कुमार सिंह, एक्सईएन बाढ़ खंड कुशीनगर
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- जलस्तर घटते ही नारायणी नदी की बैक रोलिंग से बढ़ा खतरा, पूर्व प्रधान समेत कई लोगों के घर निशाने पर
- वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ में नदी में समा गया था खैरखुटा गांव का करीब तीन चौथाई हिस्सा
तमकुहीरोड। अहिरौलीदान के खैरखुटा में गंडक नदी का जलस्तर घटने के साथ शुरू हुआ कटान सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। नदी की धारा तेजी से गांव की ओर बढ़ने से पूर्व प्रधान समेत छह लोगों के मकान कटान की जद में आ गए हैं। साथ ही कई अन्य पक्के और कच्चे मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ खंड के एसई, एक्सईएन समेत सभी अभियंता तीन दिन से कटान स्थल पर डटे हैं। बोल्डर डालकर कटान रोकने का काम लगातार जारी है।
अहिरौलीदान का खैरखुटा गांव 14 साल बाद एक बार फिर गंडक नदी के निशाने पर है। वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ में गांव का करीब तीन चौथाई हिस्सा नदी में समा गया था। इसके बाद बाढ़ खंड ने बोल्डर से एप्रन का निर्माण कराकर कटान से गांव को सुरक्षित किया था। पिछले दो-तीन वर्षों से इस हिस्से में प्रभावी बचाव कार्य नहीं होने से एप्रन जर्जर हो गया। शनिवार को गंडक का जलस्तर नीचे आने के बाद नदी में अचानक बैक रोलिंग शुरू हो गई। इससे कटान की रफ्तार बढ़ गई और नदी गांव की ओर बढ़ते हुए पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान समेत कई लोगों के मकानों के करीब पहुंच गई। कटान को लेकर गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
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कटान जारी रहने से पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान, भगवान पासवान, रामपूजन पासवान और बली सिंह समेत छह लोगों के मकान सीधे नदी के निशाने पर हैं। इसके अलावा हीरा शर्मा, रामाशंकर सिंह, उमेश सिंह, सुग्रीव सिंह और रामनाथ शर्मा समेत कई अन्य लोगों के पक्के और कच्चे मकानों पर भी कटान का खतरा बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ खंड के एसई केपी सिंह, एक्सईएन महेश कुमार सिंह और एसडीओ दीपरतन सिंह समेत विभाग के सभी अभियंता पिछले तीन दिनों से मौके पर मौजूद हैं। उनकी निगरानी में बोल्डर डालकर कटान को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
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फिलहाल कटान की स्थिति नियंत्रण में है। बचाव कार्य लगातार जारी है और विभाग के सभी अभियंता मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं। मौके पर पर्याप्त बोल्डर गिरवाया गया है। नदी का रुख लगातार बदल रहा है, लेकिन बचाव कार्य के लिए पूरा इंतजाम है।
- महेश कुमार सिंह, एक्सईएन बाढ़ खंड कुशीनगर