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इंसेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ा भर गया वार्ड
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:42 AM IST
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इंसेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ा भर गया वार्ड
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। इन दिनों इंसेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ गया है। इसके लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सोमवार को तो अस्पताल में यह स्थिति पैदा हो गई कि इससे पीड़ित गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण देर रात तक अस्पताल का आईसीयू भर गया। रात में तो भर्ती मरीजों का इलाज किया गया, लेकिन मंगलवार को सुबह जिन बच्चों की हालत में सुधार हुआ उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, ताकि आने वाले अन्य गंभीर मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया जा सके।
जुलाई से अक्टूबर का महीना इंसेफेलाइटिस के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। इसलिए इस मर्ज के रोगियों का तत्काल उपचार शुरू करने के लिए जिला अस्पताल के आईसीयू और ईटीसी (इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर) को दवा व स्टॉफ से लैस कर दिया गया है। इस बीमारी का सबसे अधिक असर सोमवार की रात देखने को मिला। जिला अस्पताल में स्थित इंसेफेलाइटिस का 10 बेड का आईसीयू वार्ड मरीजों से भर गया। हालांकि इस वर्ष जनवरी से अब तक वार्ड में मरीजों की संख्या औसतन 4-5 तक ही रहती थी। यहां भर्ती होने वाले मरीजों में जंगल चौरिया के राजू निषाद की साढ़े तीन साल की पुत्री अंशिका, पिपरा बाजार के राजेश की पांच वर्षीय पुत्री अर्चना, भटवलिया के राजेंद्र का छह वर्षीय पुत्र हिमांशु, खेदनी के बुद्धिसेन का 11 वर्षीय पुत्र सुमंत, मोतीपुर के अरविंद का तीन वर्षीय पुत्र प्रियांशु, बड़हरागंज के नूरआलम का 11 वर्षीय पुत्र इब्राहिम, खड्डा के नागेंद्र की तीन वर्षीय पुत्री अंजली, परसौनी के सेराज की चार वर्षीय पुत्री आलिशा, अकबरपुर के राम चौहान की तीन माह की पुत्री खुशी और सिंघापट्टी के रामाशीष की छह माह की पुत्री चुलबुली शामिल थीं। आईसीयू में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर वीके राय ने बताया कि बच्चों के बेहतर इलाज का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जिनकी हालत में सुधार हो जा रहा है, उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है, ताकि आने वाले अन्य मरीजों को भी आईसीयू में भर्ती किया जा सके।
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जुलाई से अक्टूबर का महीना इंसेफेलाइटिस के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। इसलिए इस मर्ज के रोगियों का तत्काल उपचार शुरू करने के लिए जिला अस्पताल के आईसीयू और ईटीसी (इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर) को दवा व स्टॉफ से लैस कर दिया गया है। इस बीमारी का सबसे अधिक असर सोमवार की रात देखने को मिला। जिला अस्पताल में स्थित इंसेफेलाइटिस का 10 बेड का आईसीयू वार्ड मरीजों से भर गया। हालांकि इस वर्ष जनवरी से अब तक वार्ड में मरीजों की संख्या औसतन 4-5 तक ही रहती थी। यहां भर्ती होने वाले मरीजों में जंगल चौरिया के राजू निषाद की साढ़े तीन साल की पुत्री अंशिका, पिपरा बाजार के राजेश की पांच वर्षीय पुत्री अर्चना, भटवलिया के राजेंद्र का छह वर्षीय पुत्र हिमांशु, खेदनी के बुद्धिसेन का 11 वर्षीय पुत्र सुमंत, मोतीपुर के अरविंद का तीन वर्षीय पुत्र प्रियांशु, बड़हरागंज के नूरआलम का 11 वर्षीय पुत्र इब्राहिम, खड्डा के नागेंद्र की तीन वर्षीय पुत्री अंजली, परसौनी के सेराज की चार वर्षीय पुत्री आलिशा, अकबरपुर के राम चौहान की तीन माह की पुत्री खुशी और सिंघापट्टी के रामाशीष की छह माह की पुत्री चुलबुली शामिल थीं। आईसीयू में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर वीके राय ने बताया कि बच्चों के बेहतर इलाज का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जिनकी हालत में सुधार हो जा रहा है, उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है, ताकि आने वाले अन्य मरीजों को भी आईसीयू में भर्ती किया जा सके।
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