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इंसेफेलाइटिस से दो बच्चियों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/कुशीनगर
Updated Sat, 24 Oct 2015 11:45 PM IST
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पिपरा बाजार। विशुनपुरा ब्लॉक के दो गांवों के दो मासूमों की शनिवार को इंसेफेलाइटिस की वजह से मौत हो गई। बसडीला गांव की रंजना दो दिनों के अंतराल में जान गंवाने वाली गांव में दूसरी मासूम है।
खजुरिया गांव में अपनी ननिहाल में रहने वाली पांच वर्षीया छोटी की मौत हो गई है जबकि खजुरिया की ही कुसुम का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
बसडिला में 16, खजुरिया में चार और बाबूराम सेमरा में छह बच्चे अब भी बुखार और उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। इस बीच बसडिला में शनिवार को एएनएम और आशा को दवा बांटने और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने के लिए भेजा गया था।
विभागीय प्रशासन की लापरवाही को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी है। शनिवार को दिन के लगभग 10 बजे मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान छोटी की और जिला अस्पताल में सवा साल की रंजना की मौत हो गई। छोटी अपने मामा के घर रहती थी।
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खजुरिया के ही प्रमोद मद्धेशिया की बेटी कुसुम मेडिकल कॉलेज में पांच दिनों से भर्ती है। बृहस्पतिवार की रात मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बसडिला गांव के सिहोरवा टोला निवासी अलाउद्दीन के चार वर्षीय बेटा इसराफिल की मौत से गांववाले पहले से ही चिंतित थे कि शनिवार को वकील अंसारी की बेटी ने भी दम तोड़ दिया।
बुधवार की रात बाबूराम सेमरा गांव के सेमरा टोले की तीन वर्षीया साबरा की मौत हो गई थी जबकि छह बच्चे तेज बुखार से प्रभावित हैं।
शुक्रवार को सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सिहोरवा टोले में पहुंची थी और बीमार बच्चों को दवाएं देने के साथ ही गांव में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया था।
टीम के साथ आए डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह से गांववालों ने एएनएम और सफाई कर्मचारी पर लापरवाही का आरोप लगाया था। उधर, सिहोरवा टोले में दो दिनों के दरम्यान दूसरे मासूम की मौत से लोग दुखी हैं।
गांववालों का कहना है कि बार-बार कहने के बावजूद जिम्मेदार लोग ध्यान नहीं देते हैं। दस दिनों से बच्चे बीमार हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी नहीं आया।
जब डीएम और सीएमओ ने संज्ञान लिया तब जाकर ब्लॉक की टीम को गांव की सुधि आई। इस संबंध में डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह ने कहा कि जिन गांवों में बच्चे बीमार हैं, वहां नजर रखी जा रही है।
वायरल बुखार का प्रकोप है। खानपान में सफाई और मच्छरों से बचाव किया जाना जरूरी है।
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खजुरिया गांव में अपनी ननिहाल में रहने वाली पांच वर्षीया छोटी की मौत हो गई है जबकि खजुरिया की ही कुसुम का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
बसडिला में 16, खजुरिया में चार और बाबूराम सेमरा में छह बच्चे अब भी बुखार और उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। इस बीच बसडिला में शनिवार को एएनएम और आशा को दवा बांटने और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने के लिए भेजा गया था।
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विभागीय प्रशासन की लापरवाही को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी है। शनिवार को दिन के लगभग 10 बजे मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान छोटी की और जिला अस्पताल में सवा साल की रंजना की मौत हो गई। छोटी अपने मामा के घर रहती थी।
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खजुरिया के ही प्रमोद मद्धेशिया की बेटी कुसुम मेडिकल कॉलेज में पांच दिनों से भर्ती है। बृहस्पतिवार की रात मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बसडिला गांव के सिहोरवा टोला निवासी अलाउद्दीन के चार वर्षीय बेटा इसराफिल की मौत से गांववाले पहले से ही चिंतित थे कि शनिवार को वकील अंसारी की बेटी ने भी दम तोड़ दिया।
बुधवार की रात बाबूराम सेमरा गांव के सेमरा टोले की तीन वर्षीया साबरा की मौत हो गई थी जबकि छह बच्चे तेज बुखार से प्रभावित हैं।
शुक्रवार को सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सिहोरवा टोले में पहुंची थी और बीमार बच्चों को दवाएं देने के साथ ही गांव में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया था।
टीम के साथ आए डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह से गांववालों ने एएनएम और सफाई कर्मचारी पर लापरवाही का आरोप लगाया था। उधर, सिहोरवा टोले में दो दिनों के दरम्यान दूसरे मासूम की मौत से लोग दुखी हैं।
गांववालों का कहना है कि बार-बार कहने के बावजूद जिम्मेदार लोग ध्यान नहीं देते हैं। दस दिनों से बच्चे बीमार हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी नहीं आया।
जब डीएम और सीएमओ ने संज्ञान लिया तब जाकर ब्लॉक की टीम को गांव की सुधि आई। इस संबंध में डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह ने कहा कि जिन गांवों में बच्चे बीमार हैं, वहां नजर रखी जा रही है।
वायरल बुखार का प्रकोप है। खानपान में सफाई और मच्छरों से बचाव किया जाना जरूरी है।