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Kushinagar News: सफेद दिखने वाली हर तरल चीज दूध नहीं, जांचने के बाद ही करें इस्तेमाल

Tue, 09 May 2023 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Tue, 09 May 2023 01:17 AM IST
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duplicate milk
पडरौना नगर की दुकानों में दूध देता ग्वाला।संवाद
फोटो है।
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लैब में कराई गई जांच में 99 में से 58 नमूने मिले फेल, शहर से लेकर देहात तक मिलावटी दूध का धंधा जोरों पर
मिलावटी दूध से बचें, नहीं तो कर देगा लिवर और किडनी को खराब
अकेले पडरौना शहर में है डेढ़ लाख लीटर से अधिक दूध की खपत
दूध के सैंपल की हुई जांच में आए हैं मिलावट के मामले
77 कारोबारियों पर न्यायालय ने लगाया है 12 लाख छह हजार रुपये का अर्थदंड
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। पडरौना शहर में ही डेढ़ लाख लीटर से अधिक दूध की खपत है। जरा सोचें, इतना दूध आता कहां से है? क्योंकि इस सफेद कारोबार में मिलावट जोरों पर है। मिलावट करके इसे खतरनाक बना दिया जा रहा है। ऐसे में जिसे लोग दूध समझकर पी रहे हैं, वह तरह-तरह की बीमारियां दे रहा है। दूध में पानी मिलाकर इसकी मात्रा बढ़ा दी जा रही है। ऊपर से गाढ़ा करने के लिए डिटर्जेंट, सिंथेटिक, स्टार्च सहित कई चीजें मिलाई जा रही हैं। केवल दूध ही नहीं, इससे बनी मिठाइयों और अन्य खाद्य वस्तुएं भी मिलावटखोरों से नहीं बच पाई हैं। जानकारों का कहना है कि दूध से बने प्रोडक्ट में 70 प्रतिशत मिलावट की शिकायतें आ रही हैं। जांच में मामले पकड़ में भी आ चुके हैं। ऐसे दूध का सेवन करने से लिवर और किडनी पर असर पड़ रहा है। जिले से दूध के लिए गए 69 नमूनों और उसके पिछले वित्तीय वर्ष समेत 99 सैंपल की जांच रिपोर्ट में 58 में मिलावट पाई गई है। यही नहीं एडीएम न्यायालय ने मुकदमों की सुनवाई के दौरान 77 व्यवसायियों पर 12 लाख रुपये से अधिक का अर्थदंड लगाया है। दूध में मिलावट की यह रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की है।
दूषित खान-पान से लोगों की सेहत खराब न हो, उसके लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग है। जिले पर इसका दफ्तर और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम है। इसके तहसील स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं। विभाग की तरफ से समय-समय पर अभियान चलाकर खाद्य वस्तुओं के नमूने लिए जाते हैं और नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद दूध और इससे बनीं खाद्य वस्तुओं में मिलावट नहीं रुक रही है। विभागीय रिपोर्ट ही इस बात की तस्दीक करती है।
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बीते सत्र 2022-23 में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने दूध और इससे बने 69 उत्पादों के नमूने लिए थे। इसके अलावा कुछ नमूनों की रिपोर्ट उसके पिछले वित्तीय वर्ष की भी आई। कुल 91 सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिसमें से 58 सैंपल में मिलावट पाई गई।
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विभाग की तरफ से लिए गए नमूनों से संबंधित मुकदमे एडीएम के न्यायालय में दाखिल किए जाते हैं। सुनवाई भी इसकी एडीएम कोर्ट में होती है। बीते वित्तीय वर्ष में दूध व इससे बने उत्पादों से संबंधित 77 मुकदमों की सुनवाई हुई। उसके बाद संबंधित उन सभी व्यवसायियों पर मिलावट करने का दोष साबित होने पर 12.06 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसके अलावा मिलावट के 49 नए मुकदमे एडीएम कोर्ट में दायर किए गए हैं।

दूध में इन वस्तुओं की होती है मिलावट
सूत्रों की मानी जाए तो मुनाफाखोर दूध में यूरिया, अमोनिया, नाइट्रेट, फर्टिलाइजर और स्टार्च जैसे कई हानिकारक तत्व मिलाकर दूध तैयार करते हैं। ज्यादातर दुधिया दूध में मिले पानी को गाढ़ा बनाने के लिए इन सब चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ता है असर
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. दीन मोहम्मद बताते हैं कि इस तरह की हानिकारक चीजों से युक्त दूध पीने से सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है। लिवर डैमेज हो जाता है। बच्चों का लिवर बड़ों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील और कमजोर होता है। ऐसे में मिलावटी दूध से इन्हें जल्दी और ज्यादा नुकसान पहुंचता है। बुजुर्ग लोगों का लिवर भी एक समय के बाद कमजोर होने लगता है। ऐसे में मिलावटी दूध को पचाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसमें मिले केमिकल शरीर की क्षमता पर भी नकारात्मक असर डालते हैं।

मिलावटी दूध की ऐसे करें जांच
दूध में पानी मिलाएं। यदि झाग आए तो दूध में डिटरजेंट मिला हुआ है। दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें, यदि यह साबुन जैसा चिकना लगे तो यह सिंथेटिक दूध हो सकता है। इसके अलावा इसे गर्म करने पर यह हल्का पीला हो जाता है। स्टार्च के मिलावट की जांच के लिए दूध में कुछ बूंदें आयोडीन की टिंचर या आयोडीन सॉल्यूशन को डालें। यदि दूध का रंग नीला हो जाए तो इसका मतलब दूध मिलावटी है। पानी मिश्रित दूध की कुछ बूंदें चिकने स्थान पर गिराने पर वह बहकर निकल जाता है। यूरिया मिश्रित होगा तो हाथ में लेने पर दूध की अपेक्षा अधिक ठंडा महसूस होगा।

इसलिए धंधेबाज करते हैं मिलावट
दूध में डिटरजेंट, यूरिया, अमोनिया, नाइट्रेट और नमक मिलाकर इसकी मात्रा बढ़ाई जाती है। इससे दूध में गाढ़ापन आता है और फैट भी बढ़ता है। इन सबको मिलाने से दूध में खटास पैदा होती है। उसे रोकने के लिए इसमें न्यूटलाइजर मिलाया जाता है। वहीं, हाइड्रोजन पराक्साइड और फार्मेलियन मिलाने से दूध को कई दिनों तक स्टॉक किया जा सकता है। यूरिया और अमोनिया मिलाने से इसका टेस्ट खराब हो जाता है। उसे ठीक करने के लिए ही स्टार्च को मिलाते हैं।

ब्रांडेड दूध के नमूने भी हुए हैं फेल
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि उनकी तरफ से लिए गए ब्रांडेड दूध के नमूने भी फेल हुए हैं। उनमें मदर डेयरी, कृष्णा दूध व अन्य कंपनियों के दूध शामिल थे।

बोलीं गृहिणियां
दूध हर किसी का प्रिय होता है। चाहे बच्चे हों या बड़े। क्योंकि इसमें पोषक तत्व अधिक होते हैं, लेकिन आजकल जो दूध मिल रहा है, उसका स्वाद ठीक नहीं लगता।
-उर्मिला गुप्ता

दूध का उपयोग लगभग हर परिवार में होता है, लेकिन दूध के कारोबारी अधिक मुनाफे के लिए इसमें हानिकारक चीजें मिला देते हैं। ग्राहक इससे अनजान रहते हैं। वह दूध शरीर को लाभ पहुंचाने के लिए खरीदते हैं, लेकिन दबे पांव बीमारियां शरीर को जकड़ लेती हैं।
-दिव्या लक्ष्मी

बोलीं युवतियां
दूध का उपयोग चाय से लेकर मिठाइयों तक में होता है। इसके अलावा रात में भी इसका सेवन किया जाता है। ऐसे में दूध में मिलावट करने वालों पर अंकुश लगना चाहिए।
-धन्नु गुप्ता
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दूध में अब पहले जैसा स्वाद नहीं मिलता है। दुधिया अधिक पानी मिलाकर देते ही हैं, सुना जाता है कि हानिकारक केमिकल का उपयोग भी करते हैं। इस तरह की मिलावट करने वालों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

-श्वेता सिंह

वर्जन-
दूध और इससे बनी खाद्य वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। व्यापारियों और आम जनमानस को जागरूक किया जाता है। हमारे विभाग में फूड सेफ्टी व्हील (चालित प्रयोगशाला) भी है, जो मंडल कार्यालय पर रहती है। सप्ताह में एक बार जिले में भ्रमण करती है। यदि किसी को दूध या उससे बनी वस्तुएं और अन्य खाद्य सामग्री की जांच करानी हो तो करा सकता है। बीते वित्तीय वर्ष में दूध के 99 सैंपल की जांच कराई गई थी, जिसमें 58 नमूने फेल हो गए। इसके अलावा मिलावट में दोषी पाए गए 77 कारोबारियों पर एडीएम न्यायालय ने 12.06 लाख रुपये अर्थदंड लगाया है।
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