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Kushinagar News: बढ़ी सख्ती को तस्करों ने चुना देवरिया का रास्ता, रोकथाम में खाकी नाकाम

Sat, 18 Jan 2025 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 18 Jan 2025 12:57 AM IST
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Due to increased strictness, smugglers chose the route of Deoria, Khaki failed in prevention
पडरौना। तस्करों के ‘’संडे’’ वाले ट्रेंड की चर्चा जोरों पर है, लेकिन इस ट्रेंड के आगे खाकी के डंडे ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। पुलिस रूट को लेकर असमंजस में है। कुशीनगर हाईवे पर पुलिस की सक्रियता बढ़ने के बाद तस्करों ने देवरिया के रास्ते को चुन लिया है। पर वहां की पुलिस तस्करी को रोकने में कमजोर साबित हो रही है।
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सूत्रों की मानें तो देवरिया और कुशीनगर से होने वाली तस्करी के लिए तस्करों का अपना अलग-अलग मानदंड तय कर रखा है। अगर प्रत्यक्ष रूप से मंडियों में तस्करों को माल पहुंचाना हो तो राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए सीधे एनएच-27 से जुड़ते हैं, जो बंगाल होते हुए असम तक जाता है।
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छोटे-छोटे कारोबारियों तक पशुओं की खेप पहुंचाने के लिए तस्कर लिंक सड़क और पगडंडियों के रास्ते गोपालगंज में दाखिल होते हैं। इधर, सख्ती बढ़ने पर देवरिया के रास्ते गोपालगंज और सिवान में पहुंच जाते हैं। दोनों जिले की पुलिस संयुक्त रूप से काम करें तो पशु तस्करों पर नकेल कसना और आसान हो जाएगा।
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पशु तस्करी को लेकर कुशीनगर पुलिस सक्रिय हुई है। गांव से लेकर गाड़ियों और तस्करों के रूट पर प्रहार करते हुए नाकाबंदी कर पुलिस तस्करों को दबोचा रही है। मुठभेड़ के बाद कई बड़े तस्कर पुलिस गिरफ्त में हैं। बावजूद इसके स्थानीय चेहरों के साथ पशुओं की खेप दूसरे जिलों में पकड़ी जा रही है। जिले के रास्ते गोपालगंज दाखिल होने के बाद पकड़े जाने के सवाल पर कुशीनगर की पुलिस इधर-उधर के अधर में उलझी है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जो पड़ोसी प्रांत बिहार में तस्कर गिरफ्तार हो रहे हैं, वह देवरिया जिले के रास्ते दाखिल हो रहे हैं। कुशीनगर के सटे देवरिया के अंतिम छोर पर बसे गांव के तस्कर भी पशुओं को कुशीनगर के रास्ते बिहार के दाखिल कराते हैं, हालांकि, देवरिया के रास्ते भी गोपालगंज के भोरे, विजयीपुर में पशुओं के दाखिल होने से नकारा नहीं जा सकता। पुलिस सख्ती के बावजूद कुशीनगर से तस्कर बेखौफ होकर गोपालगंज में दाखिल हो जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बसहिया के रियाज उर्फ ननकी समेत ऐसे कई गैंगस्टर हैं, जिन्होंने युवाओं से तस्करी के लिए मदद ली है।
पुलिस की सक्रियता देख रूट पर लगती है मुहर : पशु तस्करी के लिए तस्करों का रूट जरूरत के अनुसार तय होता है। अगर उन्हें बिहार के सुदूर इलाकों तक तस्करी कर प्रत्यक्ष बाजारों तक पशुओं को ले जाना होता है तो इसके लिए वह कुशीनगर के राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए गोपालगंज के एनएच-27 से जुड़ जाते हैं। यह गोपालगंज, मोतिहारी, दरभंगा होते हुए सीधे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल सिलीगुड़ी, सोनपुर आदि जगहों तक जाता है। यही हाईवे असम के सिलचर में जाकर समाप्त होता है।
ऐसे में बंगाल और असम तक पशुओं के खेप पहुंचाने का मुख्य रूट तो यह है ही, लेकिन जब कैरियरों के माध्यम से पशुओं की खेप छोटे कारोबारियों या सिवान, सारण, छपरा और आसपास के अन्य जिलों में पहुंचानी होती है तो इसके लिए तस्कर या तो कुशीनगर के अधिकांश संपर्क मार्गों और पगडंडियों के रास्ते बिहार में दाखिल होते हैं या तो देवरिया के रास्ते पकहा होते हुए कुशीनगर के बनकटा और फिर गोपालगंज में प्रवेश कर जाते हैं।

देवरिया जिले से दाखिल होने के लिए भोरे और विजयीपुर, सोहनपुर एकडंगा के रास्ते दाखिल होकर सीधे भोरे-मीरगंज सड़क के रास्ते निकल जाते हैं। एक अन्य रास्ता देवरिया से बिहार के सिवान में दाखिल होता है जो गोरखपुर-बड़हलगंज से बरहज और लार थाना के मेहरौना बाॅर्डर से बिहार के सिवान तक जाता है। वहीं दूसरा रूट गौरी बाजार के रास्ते रामपुर कारखाना से सिवान को जाता है।
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