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Kushinagar News: ड्रेन में जाल-चिलवन से जलनिकासी बाधित, फसल डूबी
Fri, 24 Jul 2026 01:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:22 AM IST
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सीधरिया ड्रेन में मछुवारों के तरफ से लगाई गई जाल।स्रोत-सोशल मीडिया
मंसाछापर। विशुनपुरा ब्लॉक के सिधरिया और सरपतही खुर्द ड्रेन में जगह-जगह मछुआरों ने जाल और चिलवन लगा दिया है। इससे जलनिकासी नहीं हो पा रही है।आसपास के खेतों में बारिश का पानी भर गया है। धान और गन्ने की फसल खराब होने की आशंका है। किसानों ने जिला प्रशासन से जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि कुछ मछुआरों ने पुलिया समेत ड्रेन के कई स्थानों पर चिलवन और जाल लगा दिए हैं। इससे पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है और बारिश का पानी खेतों से निकल नहीं पा रहा है। लगातार जलभराव के कारण धान की फसल खराब होने लगी हैं। गन्ने की फसल में भी रोग फैलने की आशंका है। किसानों का कहना है कि उनकी महीनों की मेहनत और लाखों रुपये की लागत बर्बाद होने के कगार पर है। क्षेत्र के संतोष गुप्ता, जोगिंदर सिंह, खरचू पाल, रामअवध, राजू, राजेश, संजय कुशवाहा, शशि प्रताप, रितेश, विनोद, भृगुनाथ, प्रमोद ने बताया कि विरईठ, श्रीराम चौराहा, पटेरा, नरचोचवा, धर्मपुर, चितहा, खजुरिया, सरपतही, पिपरा, अकबरपुर, बभनौली, दुबौली और बहोरा रामनगर समेत कई गांव के किसानों का खेत जलमग्न हो गया है। कई किसानों की धान की फसल सड़ने लगी है, जबकि गन्ने की फसल गलने और गिरने लगी है। करीब दो वर्ष पहले ड्रेन की सफाई कराई गई थी, लेकिन वह खानापूरी तक सीमित रह गई। इसके बाद दोबारा सफाई कराई गई, लेकिन वह भी अधूरी रहने से जलनिकासी की समस्या दूर नहीं हो सकी। अब मामूली बारिश में भी ड्रेन का पानी खेतों में भर जा रहा है। किसानों ने प्रशासन से ड्रेन में लगाए गए जाल और चिलवन तत्काल हटवाकर जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। इस संबंध में बीडीओ अखंड प्रताप ने बताया कि इसके बारे में जानकारी नही है। पता कराकर शीघ्र ही जलनिकासी की व्यवस्था कराई जाएगी।
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किसानों का आरोप है कि कुछ मछुआरों ने पुलिया समेत ड्रेन के कई स्थानों पर चिलवन और जाल लगा दिए हैं। इससे पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है और बारिश का पानी खेतों से निकल नहीं पा रहा है। लगातार जलभराव के कारण धान की फसल खराब होने लगी हैं। गन्ने की फसल में भी रोग फैलने की आशंका है। किसानों का कहना है कि उनकी महीनों की मेहनत और लाखों रुपये की लागत बर्बाद होने के कगार पर है। क्षेत्र के संतोष गुप्ता, जोगिंदर सिंह, खरचू पाल, रामअवध, राजू, राजेश, संजय कुशवाहा, शशि प्रताप, रितेश, विनोद, भृगुनाथ, प्रमोद ने बताया कि विरईठ, श्रीराम चौराहा, पटेरा, नरचोचवा, धर्मपुर, चितहा, खजुरिया, सरपतही, पिपरा, अकबरपुर, बभनौली, दुबौली और बहोरा रामनगर समेत कई गांव के किसानों का खेत जलमग्न हो गया है। कई किसानों की धान की फसल सड़ने लगी है, जबकि गन्ने की फसल गलने और गिरने लगी है। करीब दो वर्ष पहले ड्रेन की सफाई कराई गई थी, लेकिन वह खानापूरी तक सीमित रह गई। इसके बाद दोबारा सफाई कराई गई, लेकिन वह भी अधूरी रहने से जलनिकासी की समस्या दूर नहीं हो सकी। अब मामूली बारिश में भी ड्रेन का पानी खेतों में भर जा रहा है। किसानों ने प्रशासन से ड्रेन में लगाए गए जाल और चिलवन तत्काल हटवाकर जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। इस संबंध में बीडीओ अखंड प्रताप ने बताया कि इसके बारे में जानकारी नही है। पता कराकर शीघ्र ही जलनिकासी की व्यवस्था कराई जाएगी।
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