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Kushinagar News: सेवरही में 1945 में हुई थी डोल मेले की शुरुआत...अब सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बना
Wed, 13 Aug 2025 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 13 Aug 2025 01:37 AM IST
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सेवरही में सजाई जा रही हनुमान की मूर्ति। संवाद
कुशीनगर/तमकुहीरोड। सेवरही के महाबीरी अखाड़े का डोल मेला पूर्वांचल का सबसे बड़ा मेला है। यह आपसी एकता व सौहार्द का प्रतीक भी है। जिसमें सभी वर्गों की सहभागिता होती है। यह मेला 1945 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इसके बाद डोल मेले का पूरे जिले में विस्तार हुआ। सेवरही में मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार को रात में शस्त्र पूजा के बाद कस्बे के सभी आठ अखाड़े एक साथ उठाए जायेंगे। यह पूरी रात कस्बे का भ्रमण करेंगे और पुनः यही अखाड़े बृहस्पतिवार को दिन में तीन बजे से उठाए जायेंगे और देर रात इनका समापन हो जाएगा।
सेवरही में सर्वप्रथम महाबीरी अखाड़ा डोल मेला का शुभारंभ अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 1945 में हुआ था। उस समय जब यह डोल मेला उठाया गया था तो कुछ ही लोग इसमें शामिल हुए थे। बाद में मेला परवान चढ़ता गया और इसकी लोकप्रियता साल दर साल बढ़ती चली गई। इसकी लोकप्रियता का पता इस बात से चलता है कि आज यह पूर्वी उत्तर प्रदेश व पश्चिमी बिहार का प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन बन गया है। मेला से जुड़े लोग बताते हैं कि यह अब क्षेत्र में आपसी एकता और सौहार्द का प्रतीक है। जिसमें सभी वर्ग के लोगों की अहम भूमिका होती है। इस साल यह मेला 13 अगस्त को रात में व 14 अगस्त को दिन में पड़ा है। इस मेले की खास विशेषता खिलाडियों के अद्भुत खेल कौशल का प्रदर्शन, भगवान महाबीर की झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होता है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग बड़ी संख्या में आते हैं। जिसमें बुधवार को रात में उठाए जाने वाले अखाड़े की सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी हैं। बुधवार को कस्बे के सभी आठ अखाड़े रात में दस बजे शस्त्र पूजन के बाद अलग अलग स्थानों से एक साथ उठाये जायेंगे। मुख्य मार्ग पर निर्धारित क्रम के अनुसार एक दूसरे के पीछे लग कर खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
मेले में शामिल होंगे यह अखाड़े
श्रीबड़ा महाबीरी अखाड़ा-एक, स्थान रामजानकी मंदिर पुरानी पुलिस चौकी चौराहा, स्वर्णकार संघ महाबीरी अखाड़ा-दो स्थान हनुमान मंदिर सब्जी मंडी से, छत्रपति शिवाजी मास्बीरी अखाड़ा-तीन, स्थान तिलकधारी साह का घोठा से, महाराणा प्रताप महाबीरी अखाड़ा-चार, स्थान शाही मस्जिद पुरानी बाजार से, वीर बंदा बैरागी महाबीरी अखाड़ा-पांच, स्थान पुराना कुआं राजेंद्र नगर से, वीर भीमसेन महाबीरी अखाड़ा- छह स्थान दुर्गा मंदीर जवाहर नगर से, आजाद महाबीरी अखाड़ा-सात, स्थान ब्रह्मस्थान स्वर्णनगर से, वीर भगत सिंह महाबीरी अखाड़ा-आठ, स्थान बेलवा माता मंदिर आजाद नगर से शामिल होंगे।
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सेवरही में सर्वप्रथम महाबीरी अखाड़ा डोल मेला का शुभारंभ अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 1945 में हुआ था। उस समय जब यह डोल मेला उठाया गया था तो कुछ ही लोग इसमें शामिल हुए थे। बाद में मेला परवान चढ़ता गया और इसकी लोकप्रियता साल दर साल बढ़ती चली गई। इसकी लोकप्रियता का पता इस बात से चलता है कि आज यह पूर्वी उत्तर प्रदेश व पश्चिमी बिहार का प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन बन गया है। मेला से जुड़े लोग बताते हैं कि यह अब क्षेत्र में आपसी एकता और सौहार्द का प्रतीक है। जिसमें सभी वर्ग के लोगों की अहम भूमिका होती है। इस साल यह मेला 13 अगस्त को रात में व 14 अगस्त को दिन में पड़ा है। इस मेले की खास विशेषता खिलाडियों के अद्भुत खेल कौशल का प्रदर्शन, भगवान महाबीर की झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होता है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग बड़ी संख्या में आते हैं। जिसमें बुधवार को रात में उठाए जाने वाले अखाड़े की सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी हैं। बुधवार को कस्बे के सभी आठ अखाड़े रात में दस बजे शस्त्र पूजन के बाद अलग अलग स्थानों से एक साथ उठाये जायेंगे। मुख्य मार्ग पर निर्धारित क्रम के अनुसार एक दूसरे के पीछे लग कर खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
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मेले में शामिल होंगे यह अखाड़े
श्रीबड़ा महाबीरी अखाड़ा-एक, स्थान रामजानकी मंदिर पुरानी पुलिस चौकी चौराहा, स्वर्णकार संघ महाबीरी अखाड़ा-दो स्थान हनुमान मंदिर सब्जी मंडी से, छत्रपति शिवाजी मास्बीरी अखाड़ा-तीन, स्थान तिलकधारी साह का घोठा से, महाराणा प्रताप महाबीरी अखाड़ा-चार, स्थान शाही मस्जिद पुरानी बाजार से, वीर बंदा बैरागी महाबीरी अखाड़ा-पांच, स्थान पुराना कुआं राजेंद्र नगर से, वीर भीमसेन महाबीरी अखाड़ा- छह स्थान दुर्गा मंदीर जवाहर नगर से, आजाद महाबीरी अखाड़ा-सात, स्थान ब्रह्मस्थान स्वर्णनगर से, वीर भगत सिंह महाबीरी अखाड़ा-आठ, स्थान बेलवा माता मंदिर आजाद नगर से शामिल होंगे।
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