{"_id":"64aef8eda04a2f409408f8f4","slug":"dogs-bite-problem-kushinagar-news-c-205-1-sgkp1014-1327-2023-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: खौफ रॉटविलर का और इर्द-गिर्द मंडरा रहा खतरा बिना वैक्सीनेशन वाले देसी का","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: खौफ रॉटविलर का और इर्द-गिर्द मंडरा रहा खतरा बिना वैक्सीनेशन वाले देसी का
Thu, 13 Jul 2023 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:33 AM IST
विज्ञापन
गली के कुत्ते ज्यादा खतरनाक, इन्हें मारिए-पीटिए मत...वैक्सीनेशन करा दीजिए
पडरौना के अहिरौली दीक्षित, रामकोला सहित कई जगह कुत्ते हो गए हैं हमलावर, कई लोगों को काटकर कर चुके जख्मी
कुत्तों के आतंक से घबराए परिवारवाले बच्चों को खुले में खेलने से कर रहे मना
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। घरों में पाले गए जर्मन शेफर्ड, रॉटविलर और पुटबिल से ज्यादा खतरनाक गली के कुत्ते हैं। गली के कुत्तों का वैक्सीनेशन नहीं होता है और ये दरवाजे के इर्द-गिर्द मंडराते हैं। अगर काट लिए तो जान पर बन आएगी। इन्हें न तो मारिए-पीटिए और न भगाइए। बस जरूरत है, इन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने की। यह काम मोहल्ले और कॉलोनी के लोग भी कर सकते हैं। क्योंकि कुत्तों को काटने के बाद जो परेशानी होती है, उससे बचने के लिए यह ज्यादा सुविधाजनक है। नगर पालिका और पशुपालन विभाग भी चाहे तो आपसी सामंजस्य से कुत्तों को पकड़कर वैक्सीनेशन कर सकते हैं, जिससे हर कोई सुरक्षित रहेगा।
गली के कुत्तों के आतंक से आम से लेकर खास सभी वर्ग के लोग परेशान हैं, लेकिन इनसे बचने का इंतजाम किसी के पास नहीं है। जबकि यह मुसीबत हर दरवाजे पर खड़ी है। इसका शिकार कब कौन हो जाए, किसी को भी नहीं पता।
जिला अस्पताल में हर दिन आने वाले 50-60 मरीजों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगना भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि गली के कुत्ते किस कदर लोगों काे अपना शिकार बना रहे हैं। इसमें भी लगभग 30 फीसदी बच्चे हैं।
विज्ञापन
हर गली, कॉलोनी और मोहल्ले में कुत्तों का झुंड रात-दिन घूम रहा है। कहीं-कहीं तो सड़कों से होकर गुजरने वाली साइकिल, बाइक और चार पहिया वाहनों का पीछा भी करने लगते हैं। इनसे बचकर भागने की कोशिश में लोग गिरकर घायल हो जाते हैं।
गली के कुत्ते ज्यादा खतरनाक, इनका वैक्सीनेशन जरूरी
पडरौना शहर के कई मोहल्लों में गली के कुत्ते आते-जाते लोगों के पीछे पड़ जाते हैं। खदेड़ने पर दौड़ाने लगते हैं। ये पालतू कुत्तों से ज्यादा खतरनाक हैं। यह स्थिति हमारे तिलक नगर मोहल्ले में भी होती है। रात के समय कुत्तों का झुंड सड़क पर घूमता रहता है। जैसे ही कोई राहगीर गुजरता है, उन पर भौंकने लगते हैं और यदि उसने बचने के लिए भागना चाहे तो दौड़ा लेते हैं। इसलिए कुत्तों से बचाव के लिए उनका वैक्सीनेशन होना जरूरी है।
-प्रमोद श्रीवास्तव, तिलक नगर
कुत्ते रात भर भौंकते हैं, खदेड़ने पर काटने दौड़ते हैं
कुत्ते पडरौना शहर के प्रमुख सड़कों पर घूमते रहते हैं। शाम को शहर में निकलने पर कुत्तों का झुंड सड़क पर घूमता रहता है। आस-पास के लोग बताते हैं कि कुत्तों के शोर के कारण बातचीत करना मुश्किल रहता है। लोग भगाने जाते हैं तो काटने के लिए दौड़ा लेते हैं। अभिभावक बच्चों को कुत्तों से बचकर रहने की नसीहत देते हैं। कुत्तों का वैक्सीनेशन जरूरी है, ताकि इनके काटने पर भी किसी को नुकसान न पहुंचे। नगर पालिका प्रशासन और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से इसके लिए पहल करनी चाहिए।
-संतोष जायसवाल, पडरौना
वैसे तो सामान्य कुत्तों को पकड़कर छोड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन यदि कोई कुत्ता हिंसक हो जाए या पागल हो जाए तो उसे पकड़ने के लिए कैटल कैचर वाहन है। ताकि पकड़ने के बाद उसमें बंद कर कहीं बाहर छोड़ा जा सके।
-विनय जायसवाल, अध्यक्ष, नगरपालिका पडरौना
वर्ष 2019 में हुई 20वीं पशुगणना में कुशीनगर जनपद में 497 कुत्ते पाए गए थे। कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर पालिका या नगर पंचायत के पास संसाधन होते हैं। महानगरों में यह सुविधा होती है। जिले स्तर पर इसकी व्यवस्था कम होती है। कुत्तों को पकड़कर उनका वैक्सीनेशन कर पाना अकेले पशुपालन विभाग के वश की बात नहीं है। यदि नगर पालिका प्रशासन कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था कर एक तिथि तय कर ले तो कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा सकता है। हमारे पास वैक्सीन उपलब्ध है।
-डॉ. रवींद्र प्रसाद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
पडरौना के अहिरौली दीक्षित, रामकोला सहित कई जगह कुत्ते हो गए हैं हमलावर, कई लोगों को काटकर कर चुके जख्मी
कुत्तों के आतंक से घबराए परिवारवाले बच्चों को खुले में खेलने से कर रहे मना
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। घरों में पाले गए जर्मन शेफर्ड, रॉटविलर और पुटबिल से ज्यादा खतरनाक गली के कुत्ते हैं। गली के कुत्तों का वैक्सीनेशन नहीं होता है और ये दरवाजे के इर्द-गिर्द मंडराते हैं। अगर काट लिए तो जान पर बन आएगी। इन्हें न तो मारिए-पीटिए और न भगाइए। बस जरूरत है, इन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने की। यह काम मोहल्ले और कॉलोनी के लोग भी कर सकते हैं। क्योंकि कुत्तों को काटने के बाद जो परेशानी होती है, उससे बचने के लिए यह ज्यादा सुविधाजनक है। नगर पालिका और पशुपालन विभाग भी चाहे तो आपसी सामंजस्य से कुत्तों को पकड़कर वैक्सीनेशन कर सकते हैं, जिससे हर कोई सुरक्षित रहेगा।
गली के कुत्तों के आतंक से आम से लेकर खास सभी वर्ग के लोग परेशान हैं, लेकिन इनसे बचने का इंतजाम किसी के पास नहीं है। जबकि यह मुसीबत हर दरवाजे पर खड़ी है। इसका शिकार कब कौन हो जाए, किसी को भी नहीं पता।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में हर दिन आने वाले 50-60 मरीजों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगना भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि गली के कुत्ते किस कदर लोगों काे अपना शिकार बना रहे हैं। इसमें भी लगभग 30 फीसदी बच्चे हैं।
विज्ञापन
हर गली, कॉलोनी और मोहल्ले में कुत्तों का झुंड रात-दिन घूम रहा है। कहीं-कहीं तो सड़कों से होकर गुजरने वाली साइकिल, बाइक और चार पहिया वाहनों का पीछा भी करने लगते हैं। इनसे बचकर भागने की कोशिश में लोग गिरकर घायल हो जाते हैं।
गली के कुत्ते ज्यादा खतरनाक, इनका वैक्सीनेशन जरूरी
पडरौना शहर के कई मोहल्लों में गली के कुत्ते आते-जाते लोगों के पीछे पड़ जाते हैं। खदेड़ने पर दौड़ाने लगते हैं। ये पालतू कुत्तों से ज्यादा खतरनाक हैं। यह स्थिति हमारे तिलक नगर मोहल्ले में भी होती है। रात के समय कुत्तों का झुंड सड़क पर घूमता रहता है। जैसे ही कोई राहगीर गुजरता है, उन पर भौंकने लगते हैं और यदि उसने बचने के लिए भागना चाहे तो दौड़ा लेते हैं। इसलिए कुत्तों से बचाव के लिए उनका वैक्सीनेशन होना जरूरी है।
-प्रमोद श्रीवास्तव, तिलक नगर
कुत्ते रात भर भौंकते हैं, खदेड़ने पर काटने दौड़ते हैं
कुत्ते पडरौना शहर के प्रमुख सड़कों पर घूमते रहते हैं। शाम को शहर में निकलने पर कुत्तों का झुंड सड़क पर घूमता रहता है। आस-पास के लोग बताते हैं कि कुत्तों के शोर के कारण बातचीत करना मुश्किल रहता है। लोग भगाने जाते हैं तो काटने के लिए दौड़ा लेते हैं। अभिभावक बच्चों को कुत्तों से बचकर रहने की नसीहत देते हैं। कुत्तों का वैक्सीनेशन जरूरी है, ताकि इनके काटने पर भी किसी को नुकसान न पहुंचे। नगर पालिका प्रशासन और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से इसके लिए पहल करनी चाहिए।
-संतोष जायसवाल, पडरौना
वैसे तो सामान्य कुत्तों को पकड़कर छोड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन यदि कोई कुत्ता हिंसक हो जाए या पागल हो जाए तो उसे पकड़ने के लिए कैटल कैचर वाहन है। ताकि पकड़ने के बाद उसमें बंद कर कहीं बाहर छोड़ा जा सके।
-विनय जायसवाल, अध्यक्ष, नगरपालिका पडरौना
वर्ष 2019 में हुई 20वीं पशुगणना में कुशीनगर जनपद में 497 कुत्ते पाए गए थे। कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर पालिका या नगर पंचायत के पास संसाधन होते हैं। महानगरों में यह सुविधा होती है। जिले स्तर पर इसकी व्यवस्था कम होती है। कुत्तों को पकड़कर उनका वैक्सीनेशन कर पाना अकेले पशुपालन विभाग के वश की बात नहीं है। यदि नगर पालिका प्रशासन कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था कर एक तिथि तय कर ले तो कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा सकता है। हमारे पास वैक्सीन उपलब्ध है।
-डॉ. रवींद्र प्रसाद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी