{"_id":"664bd108c615bf6bf2063b44","slug":"discussion-about-the-new-law-to-be-implemented-from-july-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-117101-2024-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: जुलाई से लागू होने वाले नए कानून के बारे में की चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: जुलाई से लागू होने वाले नए कानून के बारे में की चर्चा
Tue, 21 May 2024 04:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 21 May 2024 04:09 AM IST
विज्ञापन
पडरौना। जिला एवं सत्र न्यायालय में सोमवार को गोष्ठी हुई। जुलाई से लागू होने वाले नए कानूनों के बारे में चर्चा की गई। अपर जिला जज/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि एक जुलाई से लागू होने वाले कानून, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता व भारतीय साक्ष्य अधिनियम का प्रचार-प्रसार करना है। उन्होंने पुराने वादों के निस्तारण संबंधित उच्चतम न्यायालय के माॅडल एक्शन प्लान के बारे में भी जानकारी दी।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महंत गोपाल दास ने कहा कि एक जुलाई से लागू हो रहे नियम में कानून परीक्षणों, अपीलों और गवाही की रिकाॅर्डिग के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि यह कानून फरार अपराधियों पर न्यायालय द्वारा उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने और सजा सुनाने की अनुमति देता है। यह कानून मजिस्ट्रेटों को ई-मेल, एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज आदि जैसे इलेक्ट्रानिक रिकाॅर्ड के आधार पर अपराधों का संज्ञान लेने का अधिकार देता है, जिससे साक्ष्य संग्रह और सत्यापन की सुविधा मिल सकती है। इसके बाद एडीजीसी सुनली मिश्र ने नए कानून पर विस्तार से बताया।
इस दौरान एडीजीसी रामवृक्ष यादव, अभयानंद दीक्षित, हरिशंकर दीक्षित, विंध्यवासिनी प्रकाश त्रिपाठी, सुनील तिवारी, धनंजय त्रिपाठी, राजीव कुमार शुक्ल, राकेश तिवारी, प्रवीण कुमार दूबे, परितोष शुक्ल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महंत गोपाल दास ने कहा कि एक जुलाई से लागू हो रहे नियम में कानून परीक्षणों, अपीलों और गवाही की रिकाॅर्डिग के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि यह कानून फरार अपराधियों पर न्यायालय द्वारा उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने और सजा सुनाने की अनुमति देता है। यह कानून मजिस्ट्रेटों को ई-मेल, एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज आदि जैसे इलेक्ट्रानिक रिकाॅर्ड के आधार पर अपराधों का संज्ञान लेने का अधिकार देता है, जिससे साक्ष्य संग्रह और सत्यापन की सुविधा मिल सकती है। इसके बाद एडीजीसी सुनली मिश्र ने नए कानून पर विस्तार से बताया।
विज्ञापन
इस दौरान एडीजीसी रामवृक्ष यादव, अभयानंद दीक्षित, हरिशंकर दीक्षित, विंध्यवासिनी प्रकाश त्रिपाठी, सुनील तिवारी, धनंजय त्रिपाठी, राजीव कुमार शुक्ल, राकेश तिवारी, प्रवीण कुमार दूबे, परितोष शुक्ल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन