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समस्या अजब, समाधान गजब
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जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे प्लेट खत्म
एक्सरे कराने के लिए रोजाना आते हैं करीब 250 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन की प्लेट महीनों से खत्म है। इसलिए यहां डिजिटल एक्सरे कराने वाले मरीजों को एक्सरे फिल्म नहीं मिलती, न ही समस्या का समाधान किया जाता है। अलबत्ता जो मरीज स्मॉर्टफोन रखते हैं, उन्हें स्क्रीन पर ही रिपोर्ट दिखा दी जाती है। इसके अलावा उन्हें सुझाव दिया जाता है कि उस रिपोर्ट की फोटो मोबाइल में खींचकर डॉक्टर को दिखा लें। जिन मरीजों या उनके घरवालों के पास स्मॉर्टफोन नहीं होता, उन्हें साधारण एक्सरे मशीन का सहारा लेना पड़ता है।
चोट-मोच, हाथ-पैर टूटने, सीने में किसी प्रकार की बीमारी की जांच के लिए जिला अस्पताल में एक्सरे की तीन मशीनें लगी हैं। एक छोटे साइज और एक बड़े साइज की सामान्य एक्सरे मशीन है। जबकि एक डिजिटल एक्सरे मशीन है। इस अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन तो छह साल पहले लगी थी, लेकिन इधर लगभग छह माह से एक्सरे प्लेट ही नहीं आ रही है। चूंकि डिजिटल एक्सरे मशीन की रिपोर्ट उसकी फिल्म पर काफी स्पष्ट आती है, इसलिए वह सुविधाजनक होती है। एक्सरे कक्ष के कर्मचारियों या अस्पताल प्रशासन की तरफ से यही सुझाव दिया जाता है कि स्क्रीन पर दिख रही रिपोर्ट की फोटो मोबाइल में खींच लें और डॉक्टर को दिखा दें। ऐसी दशा में मरीजों के परिवारीजनों को अपने मोबाइल में ही उसकी तस्वीर लेनी पड़ती है। ऐसे मरीज डिजिटल एक्सरे के लिए प्रतिदिन लगभग 250 की संख्या में आते हैं। इस बाबत जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि डिजिटल एक्सरे मशीन की प्लेट अभी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसलिए मरीजों के परिजनों ने डिजिटल एक्सरे कराने केेेे बाद उसकी रिपोर्ट मोबाइल में लेने के लिए कहा जाता है। क्योंकि वह ज्यादा स्पष्ट दिखता है।
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एक्सरे कराने के लिए रोजाना आते हैं करीब 250 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन की प्लेट महीनों से खत्म है। इसलिए यहां डिजिटल एक्सरे कराने वाले मरीजों को एक्सरे फिल्म नहीं मिलती, न ही समस्या का समाधान किया जाता है। अलबत्ता जो मरीज स्मॉर्टफोन रखते हैं, उन्हें स्क्रीन पर ही रिपोर्ट दिखा दी जाती है। इसके अलावा उन्हें सुझाव दिया जाता है कि उस रिपोर्ट की फोटो मोबाइल में खींचकर डॉक्टर को दिखा लें। जिन मरीजों या उनके घरवालों के पास स्मॉर्टफोन नहीं होता, उन्हें साधारण एक्सरे मशीन का सहारा लेना पड़ता है।
चोट-मोच, हाथ-पैर टूटने, सीने में किसी प्रकार की बीमारी की जांच के लिए जिला अस्पताल में एक्सरे की तीन मशीनें लगी हैं। एक छोटे साइज और एक बड़े साइज की सामान्य एक्सरे मशीन है। जबकि एक डिजिटल एक्सरे मशीन है। इस अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन तो छह साल पहले लगी थी, लेकिन इधर लगभग छह माह से एक्सरे प्लेट ही नहीं आ रही है। चूंकि डिजिटल एक्सरे मशीन की रिपोर्ट उसकी फिल्म पर काफी स्पष्ट आती है, इसलिए वह सुविधाजनक होती है। एक्सरे कक्ष के कर्मचारियों या अस्पताल प्रशासन की तरफ से यही सुझाव दिया जाता है कि स्क्रीन पर दिख रही रिपोर्ट की फोटो मोबाइल में खींच लें और डॉक्टर को दिखा दें। ऐसी दशा में मरीजों के परिवारीजनों को अपने मोबाइल में ही उसकी तस्वीर लेनी पड़ती है। ऐसे मरीज डिजिटल एक्सरे के लिए प्रतिदिन लगभग 250 की संख्या में आते हैं। इस बाबत जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि डिजिटल एक्सरे मशीन की प्लेट अभी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसलिए मरीजों के परिजनों ने डिजिटल एक्सरे कराने केेेे बाद उसकी रिपोर्ट मोबाइल में लेने के लिए कहा जाता है। क्योंकि वह ज्यादा स्पष्ट दिखता है।
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